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जलवायु परिवर्तन: सेब के पेड़ों पर अक्तूबर में खिले अप्रैल के फूल, अगले सीजन पर संकट, जानें क्या बोले विशेषज्

Thu, 22 Oct 2026 05:50 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 22 Oct 2026 05:50 AM IST
सार

प्रदेश के सेब उत्पादक क्षेत्रों में इस बार प्रकृति का उल्टा खेल देखने को मिल रहा है। सेब के पेड़ों पर आमतौर पर अप्रैल में फूल खिलते हैं। इस बार अक्तूबर में ही फूल आने लगे हैं। 

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Climate Change effects: Apple trees bloom in October putting the next season at risk; here’s what the experts
सेब में फ्लावरिंग। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादक क्षेत्रों में इस बार प्रकृति का उल्टा खेल देखने को मिल रहा है। सेब के पेड़ों पर आमतौर पर अप्रैल में फूल खिलते हैं। इस बार अक्तूबर में ही फूल आने लगे हैं। शिमला, कुल्लू और मंडी जिलों के कई बगीचों में यह स्थिति बनी है। समय से पूर्व अगस्त या सितंबर में ही पत्तियां झड़ने वाले क्षेत्रों में समस्या अधिक देखी जा रही है। पिछले साल भी अत्यधिक बारिश और समय से पहले पतझड़ के कारण कई क्षेत्रों में सेब के पेड़ों में असामान्य रूप से फूल खिले थे। इसका असर इस वर्ष की फसल पर पड़ा और उत्पादन भी बहुत प्रभावित हुआ। इस बार बारिश कम होने से सेब के फलों का आकार और रंग ठीक ढंग से नहीं आए।

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मार्सोनिना ब्लॉच, अल्टरनेरिया फंगस के हमले और रहस्ममय पतछड़ रोग भी कई बगीचों में फैला। इससे पिछले साल के मुकाबले सेब सीजन कमजोर रहने से बागवानों की चिंता और बढ़ गई है। अब अक्तूबर में दोबारा फूल खिलने से आगामी सीजन में भी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। शिमला के ठियोग, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू, कुल्लू जिलों के आनी क्षेत्र के अलावा मंडी जिले के करसोग क्षेत्र में भी सेब के कई पेड़ों पर असामान्य रूप से फूल आने की स्थिति सामने आ रही है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार समय से पहले पत्तियां झड़ने और तापमान में बदलाव के कारण पेड़ों का प्राकृतिक चक्र प्रभावित हो रहा है।

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समय से पहले पत्तियां झड़ने से बदला पेड़ों का चक्र : विशेषज्ञ
उद्यान विशेषज्ञ एवं नौणी विवि के पूर्व कुलपति डॉ. विजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सेब के पेड़ों में समय से पहले पत्तियां झड़ने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। पत्तियां झड़ने के बाद पेड़ सुप्तावस्था यानी डोरमेंसी में चले जाते हैं। सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया सर्दियों में होती है। इसके बाद तापमान बढ़ने पर पेड़ों में फूल आने लगते हैं। उनके अनुसार इस बार अक्तूबर में ही अप्रैल के आसपास जैसा तापमान रहने के कारण पेड़ों में समय से पहले फूल खिलने की स्थिति बनी है। जिन शाखाओं पर अभी फूल आ गए हैं, उनमें अगले साल अप्रैल में दोबारा फूल आने की संभावना कम हो सकती है। इससे आगामी फसल पर असर पड़ने की आशंका है।

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रेड डिलीशियस किस्म में बढ़ रहीं समस्याएं
कोटखाई के ढांगवी गांव के मशहूर बागवान रामलाल चौहान का कहना है कि रेड डिलीशियस किस्म के सेब के पेड़ों में कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। समय से पहले पत्तियां झड़ने और अक्तूबर में फूल खिलने की समस्या भी इनमें शामिल है। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक बगीचों में बीमारियों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम था, लेकिन अब बागवानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चौहान के अनुसार रेड डिलीशियस पर अत्यधिक निर्भरता कम करते हुए रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल गाला, फ्यूजी आदि सेब किस्मों को अपनाने पर विचार करना चाहिए। जिन पेड़ों पर अक्तूबर में फूल आ गए हैं, उनमें अगले साल अप्रैल में दोबारा फूल आने की संभावना कम रह सकती है।

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बागवानी विभाग जुटाएगा जानकारी
मंत्री बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश में सेब के पेड़ों पर समय से पहले फूल आने की स्थिति का पता लगाया जाएगा। विभाग यह जानकारी जुटाएगा कि किन-किन क्षेत्रों में इस तरह की समस्या सामने आई है।

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