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Chamba News: राधाष्टमी पर डल में डुबकी लगाने की परंपरा टूटी, चौगान में हुई पूजा-अर्चना
Sun, 31 Aug 2025 07:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 31 Aug 2025 07:14 AM IST
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चंबा चौगान में पूजा-अर्चना करने के बाद मीडिया से बातचीत करते मणिमहेश ट्रस्ट डोडा के पदाधिकारी।
चंबा। राधाष्टमी पर पवित्र डल झील में डुबकी लगाने की सदियों पुरानी परंपरा इस बार प्राकृतिक आपदा के कारण टूट गई। मजबूरन पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालुओं ने चंबा चौगान में ही देव चिंह्नों की पूजा-अर्चना कर प्रसाद बांटा और अब वापसी की तैयारी में हैं। कई श्रद्धालु रास्ते बंद होने के कारण मौसम साफ होने पर ही घर लौटने का मन बना रहे हैं।
डोडा और भद्रवाह से आए शिवभक्तों के चेहरों पर राधाष्टमी के पवित्र स्नान न कर पाने का मलाल साफ झलक रहा है। श्रद्धालुओं ने कहा कि अब वे इसे शिव की इच्छा मानकर ही लौट रहे हैं। मणिमहेश ट्रस्ट डोडा के अध्यक्ष जगदीश ठाकुर, ऑडिटर प्यार सिंह, महासचिव सतीश डोगरा और लंगर कमेटी के सदस्य विजय कुमार ने बताया कि उनकी परंपरा के अनुसार हर पड़ाव पर भोले बाबा की पूजा-अर्चना के बाद ही अगला कदम बढ़ाया जाता है। इसी आस्था और अनुशासन की वजह से आपदा के दौरान भी सभी श्रद्धालु सुरक्षित रहे।
उन्होंने कहा कि चंबा चौगान में 600 से 1200 तक श्रद्धालु पिछले पांच से सात दिनों से अपने-अपने छड़ियों के साथ ठहरे हुए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस बार स्नान न कर पाना खल जरूर रहा है, लेकिन शायद शिव की यही इच्छा रही होगी।
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डोडा और भद्रवाह से आए शिवभक्तों के चेहरों पर राधाष्टमी के पवित्र स्नान न कर पाने का मलाल साफ झलक रहा है। श्रद्धालुओं ने कहा कि अब वे इसे शिव की इच्छा मानकर ही लौट रहे हैं। मणिमहेश ट्रस्ट डोडा के अध्यक्ष जगदीश ठाकुर, ऑडिटर प्यार सिंह, महासचिव सतीश डोगरा और लंगर कमेटी के सदस्य विजय कुमार ने बताया कि उनकी परंपरा के अनुसार हर पड़ाव पर भोले बाबा की पूजा-अर्चना के बाद ही अगला कदम बढ़ाया जाता है। इसी आस्था और अनुशासन की वजह से आपदा के दौरान भी सभी श्रद्धालु सुरक्षित रहे।
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उन्होंने कहा कि चंबा चौगान में 600 से 1200 तक श्रद्धालु पिछले पांच से सात दिनों से अपने-अपने छड़ियों के साथ ठहरे हुए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस बार स्नान न कर पाना खल जरूर रहा है, लेकिन शायद शिव की यही इच्छा रही होगी।
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