{"_id":"69542a0966585bb7260c618f","slug":"the-people-of-kalah-village-are-still-waiting-for-a-road-chamba-news-c-399-1-sml1046-409336-2025-12-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: कलाह गांव के लोगों को आज भी सड़क का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: कलाह गांव के लोगों को आज भी सड़क का इंतजार
विज्ञापन
होली (चंबा)। आधुनिक दौर में गांव-गांव तक सड़कें पहुंच चुकी हैं। इसके विपरीत जनजातीय क्षेत्र होली की कुठेड़ पंचायत का कलाह गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कटा हुआ है। करीब 150 की आबादी वाला यह गांव आजादी के दशकों बाद भी सड़क सुविधा से वंचित है।
कलाह गांव के ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाने के लिए खच्चरों का सहारा लेना पड़ता है या फिर पीठ पर बोझ लादकर कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। गांव तक कोई वाहन योग्य मार्ग नहीं है।
ग्रामीण शीला देवी, सत्या देवी, मंगत राम, शमशेर सिंहख, भवनेश कुमार और अंकुश कुमार ने बताया कि वे करीब सात किलोमीटर पैदल चलकर जंगलों से होकर गुजरते संकरे और जोखिमभरे रास्तों के बाद ही सड़क तक पहुंचते हैं। इस मार्ग में खड़ी चढ़ाई और खतरनाक उतराई लोगों की परीक्षा लेती है।
विज्ञापन
सड़क सुविधा के अभाव का सबसे ज्यादा असर बीमारों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को पालकी के सहारे पैदल ही सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार हालात बेहद गंभीर हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आज तक उनके गांव में न तो किसी जनप्रतिनिधि ने आकर स्थिति का जायजा लिया और न ही किसी अधिकारी ने सड़क निर्माण को लेकर कोई सर्वे किया है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलते हैं। नतीजतन, आजादी के बाद भी कलाह गांव के लोग उस दौर में जीने को मजबूर हैं, जहां पैदल सफर ही एकमात्र विकल्प है।
ग्रामीणों ने सरकार और विभाग मांग की है कि कलाह गांव का शीघ्र सर्वे कर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि गांव के लोग भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें तथा बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहें। लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता हेम सिंह का कहना है कि मामला ध्यान में है। इस बारे में उच्चाधिकारी को अवगत करवाया जाएगा।
विज्ञापन
कलाह गांव के ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाने के लिए खच्चरों का सहारा लेना पड़ता है या फिर पीठ पर बोझ लादकर कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। गांव तक कोई वाहन योग्य मार्ग नहीं है।
विज्ञापन
ग्रामीण शीला देवी, सत्या देवी, मंगत राम, शमशेर सिंहख, भवनेश कुमार और अंकुश कुमार ने बताया कि वे करीब सात किलोमीटर पैदल चलकर जंगलों से होकर गुजरते संकरे और जोखिमभरे रास्तों के बाद ही सड़क तक पहुंचते हैं। इस मार्ग में खड़ी चढ़ाई और खतरनाक उतराई लोगों की परीक्षा लेती है।
विज्ञापन
सड़क सुविधा के अभाव का सबसे ज्यादा असर बीमारों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को पालकी के सहारे पैदल ही सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार हालात बेहद गंभीर हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आज तक उनके गांव में न तो किसी जनप्रतिनिधि ने आकर स्थिति का जायजा लिया और न ही किसी अधिकारी ने सड़क निर्माण को लेकर कोई सर्वे किया है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलते हैं। नतीजतन, आजादी के बाद भी कलाह गांव के लोग उस दौर में जीने को मजबूर हैं, जहां पैदल सफर ही एकमात्र विकल्प है।
ग्रामीणों ने सरकार और विभाग मांग की है कि कलाह गांव का शीघ्र सर्वे कर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि गांव के लोग भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें तथा बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहें। लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता हेम सिंह का कहना है कि मामला ध्यान में है। इस बारे में उच्चाधिकारी को अवगत करवाया जाएगा।