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Chamba News: तेलका मेले में लोकगीतों पर झूमे दर्शक
Sat, 12 Sep 2026 10:53 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 12 Sep 2026 10:53 PM IST
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चंबा के तेलका में छिंज मेले के दौरान प्रस्तुति देती गायक कलाकार।संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
तेलका (चंबा)। तेलका मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या लोकगीतों और रंगारंग प्रस्तुतियों से यादगार बन गई। ग्राम पंचायत बाड़का की प्रधान सिलमो देवी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इसके बाद स्थानीय कलाकारों और गायकों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर मेला स्थल देर रात तक तालियों और वाहवाही से गूंजता रहा।
सांस्कृतिक संध्या में शिल्पा ठाकुर, अनूप जरियाल, विशाल जरियाल, राधा, अजय ठाकुर, चमन सोनी, टेक चंद, मेहर सिंह और भावना जरियाल सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
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कलाकारों ने ‘चुराही’, ‘घरा में तेरे हो’, ‘लंका के राजया’, ‘एक बंदरु आया’, ‘नवा मनु घूमर’, ‘मेरेया वो केलगा जोबन’, ‘इश्क तेरा तड़फाय’, ‘कावारा लड़ा’, ‘जिनें के है चार दिन’, ‘राजमा’ और ‘गोजरी’ जैसे गीतों से माहौल को संगीतमय बना दिया।
स्थानीय बोली और लोक संस्कृति से जुड़े गीतों ने दर्शकों को खासा आकर्षित किया। पहाड़ी धुनों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे और कलाकारों का तालियों से उत्साहवर्धन किया।
सांस्कृतिक संध्या में लोक संस्कृति, पहाड़ी संगीत और मनोरंजन का शानदार संगम देखने को मिला। आयोजकों ने बताया कि मेले के आगामी कार्यक्रमों में भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
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तेलका (चंबा)। तेलका मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या लोकगीतों और रंगारंग प्रस्तुतियों से यादगार बन गई। ग्राम पंचायत बाड़का की प्रधान सिलमो देवी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इसके बाद स्थानीय कलाकारों और गायकों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर मेला स्थल देर रात तक तालियों और वाहवाही से गूंजता रहा।
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सांस्कृतिक संध्या में शिल्पा ठाकुर, अनूप जरियाल, विशाल जरियाल, राधा, अजय ठाकुर, चमन सोनी, टेक चंद, मेहर सिंह और भावना जरियाल सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
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कलाकारों ने ‘चुराही’, ‘घरा में तेरे हो’, ‘लंका के राजया’, ‘एक बंदरु आया’, ‘नवा मनु घूमर’, ‘मेरेया वो केलगा जोबन’, ‘इश्क तेरा तड़फाय’, ‘कावारा लड़ा’, ‘जिनें के है चार दिन’, ‘राजमा’ और ‘गोजरी’ जैसे गीतों से माहौल को संगीतमय बना दिया।
स्थानीय बोली और लोक संस्कृति से जुड़े गीतों ने दर्शकों को खासा आकर्षित किया। पहाड़ी धुनों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे और कलाकारों का तालियों से उत्साहवर्धन किया।
सांस्कृतिक संध्या में लोक संस्कृति, पहाड़ी संगीत और मनोरंजन का शानदार संगम देखने को मिला। आयोजकों ने बताया कि मेले के आगामी कार्यक्रमों में भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।