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चुराह के राजेश सेब उगाकर बदल रहे तकदीर
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उत्कृष्ट बागवान राजेश कुमार।संवाद
- फोटो : Chamba
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तीसा (चंबा)। चुराह उपमंडल के राजेश कुुमार सेब की पैदावार कर अपनी तकदीर बदल रहे हैं। जेबीटी और टेट परीक्षा पास करने के बाद डोरी पंचायत में 300 पेड़ों के बागीचे में उन्होंने रूट स्टॉक एम के 9 पौधे, किंगरूट, डार्क बैरन गाला, गाला मेमा आदि किस्मों के पौध लगाए हैं। सेब की इन प्रजातियों से राजेेश अब अच्छी आमदनी कर रहे हैं। सेब की फसल तैयार होने पर जालंधर, अमृतसर, चंडीगढ़ और दिल्ली में बेचकर उम्दा मुनाफा कमा रहे हैं। उत्कृष्ट बागवान ने कहा कि युवा वर्ग पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी में भी किस्मत आजमाकर आगे बढ़ सकते हैं।
चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत डोरी के गांव डोरी निवासी राजेश कुमार ने जमा दो की परीक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला तीसा से ग्रहण की। उसके बाद महाविद्यालय चंबा से बीए की। तदोपरांत हमीरपुर से वर्ष 2014 से 2016 तक जेबीटी की। साथ ही टेट भी क्वालीफाई किया। राजेश कुमार के पिता जयराम सेवानिवृत्त जेबीटी अध्यापक हैं जबकि माता हरदेई देवी एक गृहिणी हैं। नौकरी न मिलने से निराश होकर राजेश कुमार ने बागवानी करने का मन बनाया। इसमें उनके परिजनों ने भरपूर सहयोग किया। परिजनों के सहयोग और अपनी मेहनत के बल राजेश कुमार ने सेब के 300 पेड़ों का बागीचा तैयार किया है। बताया कि बागीचे में लगाई गई पौध पर मई में सेब का फल तैयार होना शुरू होता है और 15 जुलाई के बाद सेब पूरी तरह से तैयार हो जाता है। इसके बाद सेब तुड़ान कर इसे मंडियों में पहुंचाया जाता है। बताया कि बागवानी विभाग की ओर से निर्धारित किए गए स्प्रे शेडयूल के तहत मार्च से सितंबर तक 6-7 बार बगीचे में स्प्रे की जाती है। कहा कि डोरी, खुशनगरी, सेईकोठी, पद्दर, मदन, सागलोगा सहित अन्य क्षेत्रों में भी अब युवा वर्ग सेब के बागीचे लगाकर अपना भाग्य बदलने के लिए प्रयासरत है।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजीव चंद्रा ने बताया कि क्षेत्र के बागवान सेब की अच्छी पैदावार तैयार कर उम्दा कमाई कर सकता है। युवा वर्ग को बागवानी की तरफ ध्यान देना चाहिए जिससे वे अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं।
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चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत डोरी के गांव डोरी निवासी राजेश कुमार ने जमा दो की परीक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला तीसा से ग्रहण की। उसके बाद महाविद्यालय चंबा से बीए की। तदोपरांत हमीरपुर से वर्ष 2014 से 2016 तक जेबीटी की। साथ ही टेट भी क्वालीफाई किया। राजेश कुमार के पिता जयराम सेवानिवृत्त जेबीटी अध्यापक हैं जबकि माता हरदेई देवी एक गृहिणी हैं। नौकरी न मिलने से निराश होकर राजेश कुमार ने बागवानी करने का मन बनाया। इसमें उनके परिजनों ने भरपूर सहयोग किया। परिजनों के सहयोग और अपनी मेहनत के बल राजेश कुमार ने सेब के 300 पेड़ों का बागीचा तैयार किया है। बताया कि बागीचे में लगाई गई पौध पर मई में सेब का फल तैयार होना शुरू होता है और 15 जुलाई के बाद सेब पूरी तरह से तैयार हो जाता है। इसके बाद सेब तुड़ान कर इसे मंडियों में पहुंचाया जाता है। बताया कि बागवानी विभाग की ओर से निर्धारित किए गए स्प्रे शेडयूल के तहत मार्च से सितंबर तक 6-7 बार बगीचे में स्प्रे की जाती है। कहा कि डोरी, खुशनगरी, सेईकोठी, पद्दर, मदन, सागलोगा सहित अन्य क्षेत्रों में भी अब युवा वर्ग सेब के बागीचे लगाकर अपना भाग्य बदलने के लिए प्रयासरत है।
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उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजीव चंद्रा ने बताया कि क्षेत्र के बागवान सेब की अच्छी पैदावार तैयार कर उम्दा कमाई कर सकता है। युवा वर्ग को बागवानी की तरफ ध्यान देना चाहिए जिससे वे अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं।
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