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Chamba News: शोभायात्रा के साथ सूही जातर मेले का शानदार आगाज
Tue, 11 Apr 2023 10:32 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 11 Apr 2023 10:32 PM IST
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चंबा। पिंक पैलेस से रानी सुनैयना के चिह्नों को ढोल-नगोड़ों की थाप पर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ सूही माता मंदिर तक शोभायात्रा के जरिये लाया गया। इस दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री आशा कुमारी, सदर विधायक नीरज नैयर, नगर परिषद अध्यक्ष नीलम नैयर, उपाध्यक्ष सीमा कश्यप, विभिन्न वार्डों के पार्षद, प्रशासनिक, विभागीय अधिकारी और स्कूली विद्यार्थी शामिल रहे। रानी सुनैयना के चिह्नों के आगे लाल रंग के जोड़े में बालिका चली। सूही मढ़ में रानी सुनैयना के चिह्न स्थापित करने के साथ ही तीन दिवसीय सूही मेेले का आगाज हो गया।
चंबा रियासत के लोगों की प्यास बुझाने के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों को न्योछावर करने वाली चंबा की रानी सुनैयना की याद में मनाया जाने वाला ऐतिहासिक सूही मेला 11 से और 13 अप्रैल तक चलेगा।
यह है मान्यता
ऐसी मान्यता है कि चंबा नगर की स्थापना के समय यहां पर पानी की काफी समस्या थी। इसके समाधान करने के लिए राजा की ओर से खूब प्रयास किया गया। समस्या का हल निकालने के लिए चंबा के राजा ने नगर से करीब दो मील दूर सरोथा नाले से नगर तक कूहल के माध्यम से पानी लाने का आदेश दिया। राजा के आदेश पर कूहल का निर्माण कार्य किया गया और कर्मचारियों के प्रयासों के बावजूद इसमें पानी नहीं आया। एक रात राजा को सपने में आकाशवाणी हुई जिसमें कहा गया कि कूहल में तभी पानी आएगा जब पानी के मूल स्रोत पर रानी या एक पुत्र को जीवित जमीन में दफना दिया जाए। राजा इस स्वप्न को लेकर काफी परेशान रहने लगा। इस बीच रानी सुनैयना ने राजा से परेशानी की वजह पूछी तो उसने स्वप्न की सारी बात बता दी। लिहाजा रानी सुनैयना ने खुशी से प्रजा की खातिर अपना बलिदान देने की बात कह दी। इसके बाद बलोटा गांव से लाई जा रही कूहल पर एक कब्र तैयार की गई जिसमें रानी ने प्रवेश किया। कहा जाता है कि जैसे-जैसे कब्र मिट्टी से भरने लगी, कूहल में भी पानी चढ़ने लग पड़ा।
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मेले में महिलाएं और बच्चे लेते हैं भाग
सूही मेले की एक और खासियत यह है कि इसमें पुरुषों का दूर-दूर तक कोई भी नाता नहीं है। इसमें महिलाएं और बच्चे ही उपस्थिति दर्ज करवाते हैं। वहीं छठी शताब्दी में चंबा की रानी सुनैयना प्रजा की प्यास बुझाने की खातिर जिंदा जमीन में दफन हो गई थीं। इसका उल्लेख साहिल बर्मन के पुत्र युगाकर बर्मन के एक ताम्रलेख में भी मिलता है
सूही मेले के दौरान सूही मढ़ में राजकन्या के बजाय पहली मर्तबा मंदिर के पंडित की बेटी पूर्वी भारद्वाज ने पूजा की। इस दौरान गद्दी समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा पहन कर घुरेई गायन किया। बताया जाता है कि माता की याद में घुरेई गायन होता है।
सूही मढ़ से बुधवार को माता का चिह्न जातर के जरिये माता के समाधि स्थल मलूणा ले जाया जाएगा जहां पर पूजा-अर्चना होगी। जातर में शामिल लोगों के लिए भंडारा लगाया जाएगा। 13 मार्च को रानी सुनैयना के चिह्न को विधिविधान से पूजा-अर्चना के बाद बैंड-बाजे के साथ पारंपरिक घुरेई गायन के साथ पिंक पैलेस लाया जाएगा।
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चंबा रियासत के लोगों की प्यास बुझाने के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों को न्योछावर करने वाली चंबा की रानी सुनैयना की याद में मनाया जाने वाला ऐतिहासिक सूही मेला 11 से और 13 अप्रैल तक चलेगा।
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यह है मान्यता
ऐसी मान्यता है कि चंबा नगर की स्थापना के समय यहां पर पानी की काफी समस्या थी। इसके समाधान करने के लिए राजा की ओर से खूब प्रयास किया गया। समस्या का हल निकालने के लिए चंबा के राजा ने नगर से करीब दो मील दूर सरोथा नाले से नगर तक कूहल के माध्यम से पानी लाने का आदेश दिया। राजा के आदेश पर कूहल का निर्माण कार्य किया गया और कर्मचारियों के प्रयासों के बावजूद इसमें पानी नहीं आया। एक रात राजा को सपने में आकाशवाणी हुई जिसमें कहा गया कि कूहल में तभी पानी आएगा जब पानी के मूल स्रोत पर रानी या एक पुत्र को जीवित जमीन में दफना दिया जाए। राजा इस स्वप्न को लेकर काफी परेशान रहने लगा। इस बीच रानी सुनैयना ने राजा से परेशानी की वजह पूछी तो उसने स्वप्न की सारी बात बता दी। लिहाजा रानी सुनैयना ने खुशी से प्रजा की खातिर अपना बलिदान देने की बात कह दी। इसके बाद बलोटा गांव से लाई जा रही कूहल पर एक कब्र तैयार की गई जिसमें रानी ने प्रवेश किया। कहा जाता है कि जैसे-जैसे कब्र मिट्टी से भरने लगी, कूहल में भी पानी चढ़ने लग पड़ा।
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मेले में महिलाएं और बच्चे लेते हैं भाग
सूही मेले की एक और खासियत यह है कि इसमें पुरुषों का दूर-दूर तक कोई भी नाता नहीं है। इसमें महिलाएं और बच्चे ही उपस्थिति दर्ज करवाते हैं। वहीं छठी शताब्दी में चंबा की रानी सुनैयना प्रजा की प्यास बुझाने की खातिर जिंदा जमीन में दफन हो गई थीं। इसका उल्लेख साहिल बर्मन के पुत्र युगाकर बर्मन के एक ताम्रलेख में भी मिलता है
सूही मेले के दौरान सूही मढ़ में राजकन्या के बजाय पहली मर्तबा मंदिर के पंडित की बेटी पूर्वी भारद्वाज ने पूजा की। इस दौरान गद्दी समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा पहन कर घुरेई गायन किया। बताया जाता है कि माता की याद में घुरेई गायन होता है।
सूही मढ़ से बुधवार को माता का चिह्न जातर के जरिये माता के समाधि स्थल मलूणा ले जाया जाएगा जहां पर पूजा-अर्चना होगी। जातर में शामिल लोगों के लिए भंडारा लगाया जाएगा। 13 मार्च को रानी सुनैयना के चिह्न को विधिविधान से पूजा-अर्चना के बाद बैंड-बाजे के साथ पारंपरिक घुरेई गायन के साथ पिंक पैलेस लाया जाएगा।