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Chamba News: दो माह से लकड़ी से भरा चमेरा बांध, विभाग को नहीं परवाह
Tue, 04 Nov 2025 11:11 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 04 Nov 2025 11:11 PM IST
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चंबा के चमेरा डैमके पास अटी लकड़ियां। संवाद
बनीखेत (चंबा)। चमेरा बांध में रावी नदी से बहकर आई लकड़ी के ढेर लग चुके हैं। बांध के भीतर तैर रही यह लकड़ी अब सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही है, लेकिन वन विभाग की ओर से दो महीने बाद भी इसे निकालने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाए हैं।
हालांकि यह लकड़ी स्लीपरनुमा नहीं है बल्कि जड़ के साथ उखड़े दरख्त हैं, जो कि बरसात के मौसम में नदी और नालों में आई बाढ़ के कारण पानी के तेज बहाव में बह गए थे। बांध में जितनी मात्रा में लकड़ी तैर रही है, उसकी कीमत लाखों में हो सकती है। इसमें कुछ लकड़ी इमारती तो कुछ बालन के रूप में इस्तेमाल हो सकती है। इसके अलावा बताया जा रहा है कि पानी में अधिकतर समय तक रहने से लकड़ी की गुणवत्ता खत्म हो चुकी है।
यहां सवाल इस बात पर उठ रहा है कि वन विभाग इतनी अधिक मात्रा में बांध में सड़ रही लकड़ी को सुरक्षित निकालने के लिए उचित कदम क्यों नहीं उठा रहा है। ऐसे ही चलता रहा तो यह वन संपदा नष्ट हो जाएगी। उधर, लोग भी मांग कर रहे हैं कि बांध में जो लकड़ी जमा हुई है। अगर बाढ़ के कारण यहां पहुंची है तो भी उसे सुरक्षित निकालने की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार के खाते में कुछ न कुछ राजस्व इस लकड़ी की नीलामी के जरिये जमा हो सके।
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विभाग कर चुका जांच : वन अरण्यपाल
वन अरण्यपाल राकेश ठाकुर ने बताया कि बाढ़ में बहकर आई लकड़ी की जांच संयुक्त टीम कर चुकी है। हाईकोर्ट को भी इसकी रिपोर्ट सौंपी है। यह लकड़ी स्लीपरनुमा नहीं है। इसके चलते अवैध कटान की कोई आशंका नहीं है। लकड़ी को निकालने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
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हालांकि यह लकड़ी स्लीपरनुमा नहीं है बल्कि जड़ के साथ उखड़े दरख्त हैं, जो कि बरसात के मौसम में नदी और नालों में आई बाढ़ के कारण पानी के तेज बहाव में बह गए थे। बांध में जितनी मात्रा में लकड़ी तैर रही है, उसकी कीमत लाखों में हो सकती है। इसमें कुछ लकड़ी इमारती तो कुछ बालन के रूप में इस्तेमाल हो सकती है। इसके अलावा बताया जा रहा है कि पानी में अधिकतर समय तक रहने से लकड़ी की गुणवत्ता खत्म हो चुकी है।
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यहां सवाल इस बात पर उठ रहा है कि वन विभाग इतनी अधिक मात्रा में बांध में सड़ रही लकड़ी को सुरक्षित निकालने के लिए उचित कदम क्यों नहीं उठा रहा है। ऐसे ही चलता रहा तो यह वन संपदा नष्ट हो जाएगी। उधर, लोग भी मांग कर रहे हैं कि बांध में जो लकड़ी जमा हुई है। अगर बाढ़ के कारण यहां पहुंची है तो भी उसे सुरक्षित निकालने की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार के खाते में कुछ न कुछ राजस्व इस लकड़ी की नीलामी के जरिये जमा हो सके।
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विभाग कर चुका जांच : वन अरण्यपाल
वन अरण्यपाल राकेश ठाकुर ने बताया कि बाढ़ में बहकर आई लकड़ी की जांच संयुक्त टीम कर चुकी है। हाईकोर्ट को भी इसकी रिपोर्ट सौंपी है। यह लकड़ी स्लीपरनुमा नहीं है। इसके चलते अवैध कटान की कोई आशंका नहीं है। लकड़ी को निकालने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।