{"_id":"6abfdb2d21e227ff140adde4","slug":"62-km-journey-for-tests-due-to-machine-availability-at-the-hospital-chamba-news-c-88-1-ssml1004-198603-2026-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: अस्पताल में मशीन, जांच के लिए 62 किमी का सफर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: अस्पताल में मशीन, जांच के लिए 62 किमी का सफर
Fri, 02 Oct 2026 09:56 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 02 Oct 2026 09:56 PM IST
विज्ञापन
नौ साल से रेडियोलॉजिस्ट का इंतजार, 31 पंचायतों के 55 हजार लोग अल्ट्रासाउंड के लिए जा रहे चंबा
नागरिक अस्पताल का दर्जा मिले एक दशक बीता, विशेषज्ञ के अभाव में धूल फांक रही मशीन
निजी जांच में 500 से 5000 रुपये तक खर्च, जेब और समय पर भारी पड़ रही अतिरिक्त दूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र भरमौर में स्वास्थ्य सुविधा की तस्वीर ऐसी है कि मशीन अस्पताल में है, लेकिन उसकी जांच के लिए मरीजों को 62 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल भरमौर में करीब नौ साल से अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद है। ऐसे में 31 पंचायतों के करीब 55 हजार लोगों को इस जरूरी जांच के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा का रुख करना पड़ रहा है। मरीजों के लिए यह अतिरिक्त दूरी समय और जेब, दोनों पर भारी पड़ रही है।
करीब एक दशक पहले भरमौर अस्पताल को नागरिक अस्पताल का दर्जा मिला था। इसके बाद स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद जगी थी। अस्पताल में पहले अल्ट्रासाउंड जांच होती थी, लेकिन मेडिकल कॉलेज चंबा शुरू होने के बाद यहां तैनात रेडियोलॉजिस्ट का तबादला चंबा कर दिया गया। इसके बाद अस्पताल में उपलब्ध मशीन का संचालन बंद हो गया।
विज्ञापन
नौ साल गुजरने के बाद भी मशीन अस्पताल में मौजूद है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में उसका उपयोग नहीं हो रहा। अल्ट्रासाउंड के लिए चंबा जाने वाले मरीजों को आने-जाने का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। वहीं, निजी जांच केंद्रों का सहारा लेने पर करीब 500 से 5000 रुपये तक खर्च हो रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित जांच के दौरान बार-बार इतनी दूरी तय करना विशेष परेशानी का कारण बन रहा है।
भरमौर की भौगोलिक परिस्थितियां भी इस परेशानी को बढ़ाती हैं। खराब मौसम में चंबा तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की निगरानी के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान में उपयोगी जांच है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध न होना मरीजों के लिए बड़ी कमी बन गया है।
--
लाइसेंस मिलते ही शुरू होगी प्रक्रिया
खंड चिकित्सा अधिकारी भरमौर डॉ. दीपेश बराल ने बताया कि अस्पताल में तैनात चिकित्सक रेडियोलॉजिस्ट प्रशिक्षण पूरा कर लौट चुके हैं। अब उनके लाइसेंस का इंतजार है। लाइसेंस मिलने के बाद उसे सक्रिय करवाकर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल का दर्जा मिले एक दशक बीता, विशेषज्ञ के अभाव में धूल फांक रही मशीन
निजी जांच में 500 से 5000 रुपये तक खर्च, जेब और समय पर भारी पड़ रही अतिरिक्त दूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र भरमौर में स्वास्थ्य सुविधा की तस्वीर ऐसी है कि मशीन अस्पताल में है, लेकिन उसकी जांच के लिए मरीजों को 62 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल भरमौर में करीब नौ साल से अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद है। ऐसे में 31 पंचायतों के करीब 55 हजार लोगों को इस जरूरी जांच के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा का रुख करना पड़ रहा है। मरीजों के लिए यह अतिरिक्त दूरी समय और जेब, दोनों पर भारी पड़ रही है।
विज्ञापन
करीब एक दशक पहले भरमौर अस्पताल को नागरिक अस्पताल का दर्जा मिला था। इसके बाद स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद जगी थी। अस्पताल में पहले अल्ट्रासाउंड जांच होती थी, लेकिन मेडिकल कॉलेज चंबा शुरू होने के बाद यहां तैनात रेडियोलॉजिस्ट का तबादला चंबा कर दिया गया। इसके बाद अस्पताल में उपलब्ध मशीन का संचालन बंद हो गया।
विज्ञापन
नौ साल गुजरने के बाद भी मशीन अस्पताल में मौजूद है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में उसका उपयोग नहीं हो रहा। अल्ट्रासाउंड के लिए चंबा जाने वाले मरीजों को आने-जाने का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। वहीं, निजी जांच केंद्रों का सहारा लेने पर करीब 500 से 5000 रुपये तक खर्च हो रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित जांच के दौरान बार-बार इतनी दूरी तय करना विशेष परेशानी का कारण बन रहा है।
भरमौर की भौगोलिक परिस्थितियां भी इस परेशानी को बढ़ाती हैं। खराब मौसम में चंबा तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की निगरानी के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान में उपयोगी जांच है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध न होना मरीजों के लिए बड़ी कमी बन गया है।
लाइसेंस मिलते ही शुरू होगी प्रक्रिया
खंड चिकित्सा अधिकारी भरमौर डॉ. दीपेश बराल ने बताया कि अस्पताल में तैनात चिकित्सक रेडियोलॉजिस्ट प्रशिक्षण पूरा कर लौट चुके हैं। अब उनके लाइसेंस का इंतजार है। लाइसेंस मिलने के बाद उसे सक्रिय करवाकर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।