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जिले में बिना एनओसी के चल रहे होटल और रेस्तरां
Updated Sat, 30 Dec 2017 11:20 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। जिले में बिना फायर एनओसी के होटल और रेस्तरां चल रहे हैं। ऐसे में अगर रिहायशी क्षेत्रा के किसी होटल और रेस्तरां में आग लगती है तो इससे निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं है। इससे जानमाल का भारी नुकसान होने का खतरा बना हुआ है। हैरानी इस बात की है कि पर्यटन नगरी डलहौजी के दो होटलों को छोड़कर जिले के किसी भी होटल और रेस्तरां व्यवसायी ने फायर एनओसी नहीं ली है। इसके बावजूद भी
जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने आज तक ऐसे होटलों और रेस्तरां के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में लाई है।
वहीं, हाल ही में मुंबई में रेस्तरां में हुए अग्निकांड में फायर एनओसी को लेकर लापरवाही की बात सामने आ चुकी है। इस हादसे में 14 लोगों की जान चली गई थी। इसमें भी आग बुझाने को लेकर पर्याप्त इंतजाम न होना मुख्य लापरवाही सामने आई है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और विभाग इस मामले को लेकर कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं नववर्ष को लेकर डलहौजी सहित खज्जियार और अन्य पर्यटन स्थलों में सैलानियों की भीड़ उमड़ी है। मगर फायर संबंधित पुख्ता इंतजाम न होने से पर्यटकों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। चंबा शहर में चल रहे एक दर्जन होटल और रेस्तरां रिहायशी इलाकों में में हैं। ऐसे में कोई भी छोटी सी चिंगारी किसी बड़े अग्निकांड की वजह बन सकती है। हैरानी की बात यह है कि इन होटलों और रेस्तरां के पास फायर एनओसी नहीं है। वहीं प्रशासन भी इसको लेकर लापरवाह बना है। शहर के ज्यादातर होटल बहुमंजिला है। ऐसे में फायर एनओसी लेना अधिक जरूरी हो जाता है। फायर एनओसी लेने के लिए होटल मालिक को दमकल विभाग के आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद दमकल विभाग की टीम संबंधित होटल का निरीक्षण करती है। इस दौरान होटल में आगजनी की सुरक्षा को लेकर अग्निशामक यंत्रों की जांच की जाती है। इसके पर्याप्त इंतजाम होने के बाद ही होटल मालिक को एनओसी दी जाती है। यह एनओसी तीन वर्ष के लिए वैद्य होती है। तीन वर्ष के बाद दोबारा एनओसी लेनी पड़ती है। मगर जिले के ज्यादातर होटल और रेस्तरां इसको लेकर पूरी तरह से लापरवाही बरत रहे हैं। स्थानीय निवासी संजीव कुमार, सुरेंद्र, मान सिंह, राकेश, चंद राम, रोशन लाल, कमल कुमार, अविनाश, टेक चंद, रूपलाल, हंसराज और जितेंद्र ने जिला प्रशासन से मांग की है कि चंबा में चल रहे होटलों और रेस्तरां मालिकों को फायर एनओसी लेने के निर्देश दिए जाएं। ताकि वहां जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
होटल और रेस्तरां मालिक नहीं कर रहे आवेदन : कुबज सिंह
फायर अधिकारी कुबज सिंह ने बताया कि चंबा में चल रहे होटल व रेस्तरां मालिक फायर एनओसी के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। उनके आवेदन करने के बाद ही विभागीय निरीक्षण के लिए होटल और रेस्तरां में जा सकती है।
चंबा। जिले में बिना फायर एनओसी के होटल और रेस्तरां चल रहे हैं। ऐसे में अगर रिहायशी क्षेत्रा के किसी होटल और रेस्तरां में आग लगती है तो इससे निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं है। इससे जानमाल का भारी नुकसान होने का खतरा बना हुआ है। हैरानी इस बात की है कि पर्यटन नगरी डलहौजी के दो होटलों को छोड़कर जिले के किसी भी होटल और रेस्तरां व्यवसायी ने फायर एनओसी नहीं ली है। इसके बावजूद भी
जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने आज तक ऐसे होटलों और रेस्तरां के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में लाई है।
वहीं, हाल ही में मुंबई में रेस्तरां में हुए अग्निकांड में फायर एनओसी को लेकर लापरवाही की बात सामने आ चुकी है। इस हादसे में 14 लोगों की जान चली गई थी। इसमें भी आग बुझाने को लेकर पर्याप्त इंतजाम न होना मुख्य लापरवाही सामने आई है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और विभाग इस मामले को लेकर कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं नववर्ष को लेकर डलहौजी सहित खज्जियार और अन्य पर्यटन स्थलों में सैलानियों की भीड़ उमड़ी है। मगर फायर संबंधित पुख्ता इंतजाम न होने से पर्यटकों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। चंबा शहर में चल रहे एक दर्जन होटल और रेस्तरां रिहायशी इलाकों में में हैं। ऐसे में कोई भी छोटी सी चिंगारी किसी बड़े अग्निकांड की वजह बन सकती है। हैरानी की बात यह है कि इन होटलों और रेस्तरां के पास फायर एनओसी नहीं है। वहीं प्रशासन भी इसको लेकर लापरवाह बना है। शहर के ज्यादातर होटल बहुमंजिला है। ऐसे में फायर एनओसी लेना अधिक जरूरी हो जाता है। फायर एनओसी लेने के लिए होटल मालिक को दमकल विभाग के आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद दमकल विभाग की टीम संबंधित होटल का निरीक्षण करती है। इस दौरान होटल में आगजनी की सुरक्षा को लेकर अग्निशामक यंत्रों की जांच की जाती है। इसके पर्याप्त इंतजाम होने के बाद ही होटल मालिक को एनओसी दी जाती है। यह एनओसी तीन वर्ष के लिए वैद्य होती है। तीन वर्ष के बाद दोबारा एनओसी लेनी पड़ती है। मगर जिले के ज्यादातर होटल और रेस्तरां इसको लेकर पूरी तरह से लापरवाही बरत रहे हैं। स्थानीय निवासी संजीव कुमार, सुरेंद्र, मान सिंह, राकेश, चंद राम, रोशन लाल, कमल कुमार, अविनाश, टेक चंद, रूपलाल, हंसराज और जितेंद्र ने जिला प्रशासन से मांग की है कि चंबा में चल रहे होटलों और रेस्तरां मालिकों को फायर एनओसी लेने के निर्देश दिए जाएं। ताकि वहां जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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होटल और रेस्तरां मालिक नहीं कर रहे आवेदन : कुबज सिंह
फायर अधिकारी कुबज सिंह ने बताया कि चंबा में चल रहे होटल व रेस्तरां मालिक फायर एनओसी के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। उनके आवेदन करने के बाद ही विभागीय निरीक्षण के लिए होटल और रेस्तरां में जा सकती है।
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