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अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीदी, मगर रेडियोलॉजिस्ट के पद नहीं किए सृजित
Updated Sat, 13 Oct 2018 07:56 PM IST
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- फोटो : demo pic
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अमर उजाला ब्यूरो
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चंबा। जिले के चार सिविल अस्पतालों में प्रदेश सरकार ने बेशक लाखों की लागत से अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीदी है। मगर इन्हें चलाने के लिए आज तक रेडियोलॉजिस्ट के पद इन अस्पतालों में सृजित नहीं किए गए हैं। इसमें सिविल अस्पताल भरमौर, किलाड़, चुवाड़ी और तीसा शामिल है। इस वजह से इन क्षेत्रों की जनता को लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद टेस्ट करवाने की सुविधा नहीं मिल पा रही है। वहीं लाखों रुपये से खरीदी गई मशीनें या तो खराब हो चुकी है या फिर बिना इस्तेमाल के शोपीस बनकर रह गई है। ऐसे में लोगों को निजी लैब या कई किलोमीटर का सफर तय कर चंबा मेडिकल कॉलेज में टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं होने के कारण यहां भविष्य में भी यह पद भरने की कोई उम्मीद नहीं है। इस वजह से क्षेत्र के लाखों लोगों का उपचार राम भरोसे चल रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग जुगाड़ तंत्र के सहारे डॉक्टरों को प्रशिक्षण देकर इन अस्पतालों में बीच-बीच में टेस्ट करवाने की व्यवस्था करता है। मगर उक्त डॉक्टर के तबादला होने के बाद व्यवस्था ज्यूं की त्यूं हो जाती है। इस वजह से सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को पेश आती है जिन्हें अल्ट्रासाउंड करवाने 60 से 200 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। चंबा मुख्यालय में इस वजह से अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन करवाने के लिए मरीजों की भीड़ लगी रहती है। यहां पर भी कई बार रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर होने से मरीजों को निजी लैब में महंगे दामों पर टेस्ट करवाने पड़ते हैं।
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एक मशीन की कीमत आठ से 25 लाख तक
जानकारों के अनुसार एक सामान्य अल्ट्रासाउंड की कीमत आठ लाख रुपये से लेकर आधुनिक मशीन करीब 25 लाख रुपये में आती है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों में लाखों की लागत से इन मशीनों को स्थापित किया है। पद सृजित न होने से इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पाया है। इस कारण लाखों रुपये की भी सरकार की गलत नीति के कारण बरबादी हुई है। यशपाल, त्रिलोक नाथ, बचन सिंह, उमेश, कपिल, नारायण, नरेंद्र, अमित, कन्हैया, जगतार, परमेश, संजीव का कहना है कि इन अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत कर प्राथमिकता के आधार पर भरे जाएं। सीएमओ चंबा डॉ. वाईडी शर्मा ने माना कि भरमौर, चुवाड़ी, तीसा और किलाड़ में अल्ट्रासाउंड मशीनें तो हैं। मगर यहां पर रेडियोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत नहीं है। मेडिकल कॉलेज चंबा में ही एक मात्र रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत है। नतीजतन, मेडिकल कॉलेज चंबा में ही अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए गर्भवती महिलाएं अत्यधिक पहुंचती हैं।
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सरकार के समक्ष मामला उठाकर करेंगे पद भरने की मांग : विस उपाध्यक्ष
विस उपाध्यक्ष हंसराज ने बताया कि सिविल अस्पताल भरमौर, चुवाड़ी, तीसा और किलाड़ में रेडियोलॉजिस्ट के पद न होने के बारे में सरकार को अवगत करवाया जाएगा। इसके साथ ही सरकार से आग्रह किया जाएगा कि उक्त अस्पतालों में भी रेडियोलॉजिस्ट के पदों को स्वीकृत कर भरा जाए।