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हमें मजाक तब करना चाहिए जब उसका जवाब सहने की क्षमता हो : वीरेंद्र मुनि
Sat, 22 Nov 2025 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 22 Nov 2025 11:45 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन के प्रांगण में प्रवचन करते हुए वीरेंद्र मुनि महाराज ने जीवन में कर्म का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जो हम कर्म करते हैं उसी के अनुसार हमारे भाव बनते हैं। जो भाव बनते हैं उसी हिसाब से हमारी सोच बनती है। यदि हमारे कर्म अच्छे होंगे तो हमारे भाव भी अच्छे होंगे और हमारी सोच भी अच्छी बनेगी।
उन्होंने एक प्रसंग से समझाया कि दो संत समूह बहुत समय तक इकट्ठे होने के बाद अलग हो रहे थे। अलग होते हुए एक संत दूसरे को विदा करने के लिए गया तो विदा करते हुए उन्होंने सी ऑफ शब्द का प्रयोग किया। दूसरे संत ने इसका मतलब छोटे संत से पूछा तो उन्होंने मजाक में कह दिया दफा हो जाओ। कहना चाहिए था विदा, कह दिया दफा हो जाओ। केवल एक शब्द ने दोनों संतों का संबंध हमेशा के लिए खत्म कर दिया। इसीलिए गुरु महाराज ने फरमाया कि मजाक कभी मत करो और मजाक किसी से न करो क्योंकि हमें मजाक तब करना चाहिए जब हम उसका जवाब सहने की क्षमता रखते हों। मजाक भी उसी से ही करना चाहिए जिसमें आपका मजाक समझने की बुद्धिमत्ता हो। इसके उपरांत काविरत्न सुशील मुनि ने समाज को प्रेरणा दी कि वह इसी प्रकार भक्ति पथ पर आगे बढ़ता रहे। तदोपरांत प्रवर्तक आशीष मुनि ने कहा कि धर्म करने की पुरानी व्याख्या के हिसाब से हम जीवन को चार भागों में बांटते थे। ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास, इन चारों की अवस्था 25-25 वर्ष होती थी। लेकिन, गुरु महाराज ने समझाया कि 75 वर्ष की आयु में यदि आप धर्म करना चाहोगे तो न शरीर में क्षमता होगी न ही भाव बनेंगे। इसलिए जितनी जल्दी हो सके हमें धर्म का मार्ग अपना लेना चाहिए, क्योंकि यही मार्ग अंत में हमें मोक्ष की तरफ ले जाएगा। किसी भी मार्ग में इतनी क्षमता नहीं है कि हमारे जन्म बंधन काटे और हमें परमात्मा से मिलने का मार्ग प्रशस्त करे।
इसके पश्चात समाज के प्रधान राकेश जैन और महामंत्री संदीप जैन ने गुरुओं की वंदना करते हुए आगे के कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया कि रविवार को जैन स्थानक में साध्वी समूह का आगमन होगा। इस मौके पर खूब धर्म वर्षा होगी। गुरुदेव आशीष मुनि तत्व चिंतक, उत्तम मुनि स्वाध्याय रसिक, विराग मुनि, कविरत्न गुरुदेव सुनील मुनि, प्रवचन प्रभावक वीरेंद्र मुनि, अर्हम मुनि महाराज ने भी प्रवचन किए।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन के प्रांगण में प्रवचन करते हुए वीरेंद्र मुनि महाराज ने जीवन में कर्म का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जो हम कर्म करते हैं उसी के अनुसार हमारे भाव बनते हैं। जो भाव बनते हैं उसी हिसाब से हमारी सोच बनती है। यदि हमारे कर्म अच्छे होंगे तो हमारे भाव भी अच्छे होंगे और हमारी सोच भी अच्छी बनेगी।
उन्होंने एक प्रसंग से समझाया कि दो संत समूह बहुत समय तक इकट्ठे होने के बाद अलग हो रहे थे। अलग होते हुए एक संत दूसरे को विदा करने के लिए गया तो विदा करते हुए उन्होंने सी ऑफ शब्द का प्रयोग किया। दूसरे संत ने इसका मतलब छोटे संत से पूछा तो उन्होंने मजाक में कह दिया दफा हो जाओ। कहना चाहिए था विदा, कह दिया दफा हो जाओ। केवल एक शब्द ने दोनों संतों का संबंध हमेशा के लिए खत्म कर दिया। इसीलिए गुरु महाराज ने फरमाया कि मजाक कभी मत करो और मजाक किसी से न करो क्योंकि हमें मजाक तब करना चाहिए जब हम उसका जवाब सहने की क्षमता रखते हों। मजाक भी उसी से ही करना चाहिए जिसमें आपका मजाक समझने की बुद्धिमत्ता हो। इसके उपरांत काविरत्न सुशील मुनि ने समाज को प्रेरणा दी कि वह इसी प्रकार भक्ति पथ पर आगे बढ़ता रहे। तदोपरांत प्रवर्तक आशीष मुनि ने कहा कि धर्म करने की पुरानी व्याख्या के हिसाब से हम जीवन को चार भागों में बांटते थे। ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास, इन चारों की अवस्था 25-25 वर्ष होती थी। लेकिन, गुरु महाराज ने समझाया कि 75 वर्ष की आयु में यदि आप धर्म करना चाहोगे तो न शरीर में क्षमता होगी न ही भाव बनेंगे। इसलिए जितनी जल्दी हो सके हमें धर्म का मार्ग अपना लेना चाहिए, क्योंकि यही मार्ग अंत में हमें मोक्ष की तरफ ले जाएगा। किसी भी मार्ग में इतनी क्षमता नहीं है कि हमारे जन्म बंधन काटे और हमें परमात्मा से मिलने का मार्ग प्रशस्त करे।
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इसके पश्चात समाज के प्रधान राकेश जैन और महामंत्री संदीप जैन ने गुरुओं की वंदना करते हुए आगे के कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया कि रविवार को जैन स्थानक में साध्वी समूह का आगमन होगा। इस मौके पर खूब धर्म वर्षा होगी। गुरुदेव आशीष मुनि तत्व चिंतक, उत्तम मुनि स्वाध्याय रसिक, विराग मुनि, कविरत्न गुरुदेव सुनील मुनि, प्रवचन प्रभावक वीरेंद्र मुनि, अर्हम मुनि महाराज ने भी प्रवचन किए।
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