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Yamuna Nagar News: मृत मानकर पिता का 40 साल से कर रहे थे श्राद्ध, जीवित मिले तो फूटे आंसू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2024 07:45 AM IST
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Was performing Shraddha of his father for 40 years considering him dead, burst into tears when found alive
सरस्वती नगर। यह कहानी है बिहार जिला गया के गांव बड़ी खाप की। यहां का रहने वाला रामेश्वर दास बिना बताए घर से चला गया था। परिवार ने उसकी काफी तलाश की मगर कुछ अता पता नहीं चला। परेशान होने के बाद परिवार ने उसे मृत मान लिया। इसके बाद उसके नाम का श्राद्ध भी करते आ रहे थे। इस बात को 40 साल बीत गए। परिवार की खुशियों का तब कोई ठिकाना नहीं रहा जब खंड सरस्वती नगर के नी आसरे दा आसरा शेल्टर होम से उनके पास रामेश्वर दास के मिलने की कॉल गई। पहले तो परिवार को यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब शेल्टर होम के पदाधिकारियों ने रामेश्वर दास की परिवार के साथ बात कराई तब उन्हें यकीन हुआ।
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नी आसरे दा आसरा शेल्टर होम के जसकीरत ने बताया रामेश्वर दास को लगभग एक माह पहले कुरुक्षेत्र के सरकारी अस्पताल के सामने से रेस्क्यू किया गया था। तब आसपास पूछने पर पता चला कि यह व्यक्ति यहां पर काफी समय से रह रहा है। यहीं पर खाना, यहीं पर सोना जब उस व्यक्ति से बात की गई तब पता चला कि गिरने के कारण उसको चोट आई है और वह सही से चल नहीं सकता। इसके बाद उसे शेल्टर होम नी आसरे दा आसरा जो की गांव मघरपुर सरस्वती नगर में लेकर आये। यहां पर इसका मेडिकल ट्रीटमेंट किया गया ताकि स्वस्थ होने पर अपने परिवार के बारे में कुछ बता सके। इसके बाद पता चला कि व्यक्ति गांव बड़ी खाप, थाना इमाम गंज, जिला गया, बिहार का रहने वाला है। किसी तरह इनके परिवार वालों से संपर्क किया गया तब वहां से इनके बड़े बेटे राजू भारती से बात हुई वह तुरंत वहां से इन्हें लेने के लिए चल दिए। बेटे ने बताया कि उनके पिता को घर से निकले हुए लगभग 40 साल हो गए है और उन्होंने तो यह मान लिया था कि अब यह इस दुनिया में नहीं रहे और हर वर्ष रामेश्वर का श्राद्ध भी मनाते थे। ऐसे में 40 साल बाद जब रामेश्वर दास अपने परिजनों से मिले तो सभी की आंखों से आंसू फूट पड़े। रामेश्वर दास परिजनों के साथ शुक्रवार को घर रवाना हुए। साथ ही परिजनों ने नी आसरे दा आसरा शेल्टर होम का आभार प्रकट किया।
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