{"_id":"6624532c2ce349417a096f25","slug":"school-buses-unfit-childrens-lives-in-danger-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-117696-2024-04-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: स्कूल बसें अनफिट,खतरे में बच्चों की जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: स्कूल बसें अनफिट,खतरे में बच्चों की जान
विज्ञापन
यमुनानगर। जिले में करीब 350 निजी स्कूलों के पास 900 से ज्यादा स्कूल बसें हैं मगर इनमें से करीब 90 प्रतिशतें बसें अनफिट हैं। इन बसों में सफर कर विद्यार्थियों की जान पर भी आफत बनी रहती है, क्योंकि ज्यादातर बसें सरकार की सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के मानकों पर खरी नहीं हैं। जिला परिवहन विभाग द्वारा कराई जा रही जांच में यह खुलासा हुआ है।
निजी स्कूलों का ध्यान अभिभावकों से हर माह मोटी फीस वसूलने पर तो है लेकिन सुरक्षित बसों में सुविधा मुहैया कराने पर स्कूल संचालक अपने हाथ पीछे खींच लेते हैं। शनिवार को जिला परिवहन विभाग के ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर जसबीर राणा के नेतृत्व में 22 बसों की जांच की गई। जिनमें से 18 बसें अनफिट मिलीं। शेष चार बसों में भी कमी थी, लेकिन उसे दूर करवा कर उन्हें फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
जांच में पाया गया कि ज्यादातर बसों के पायदान टूट हुए हैं। जिन पर पांव रख कर बस में चढ़ते व उतरते समय विद्यार्थी के साथ कोई भी हादसा हो सकता है। बसों में स्पीड गवर्नर नहीं मिले। जिन बसों में मिले वह खराब किए हुए थे। बसों में सीसीटीवी केवल नाम के लिए लगाए हुए हैं। उनकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग नहीं की जा सकती। बसों के इंडीकेटर, हेड व बैक लाइट, वाइपर तक काम नहीं कर रहे हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बसों में विद्यार्थी कितने सुरक्षित हैं।
विज्ञापन
कई स्कूल तो नया सामान खरीद कर लाए
शनिवार को स्कूल बसों की जो जांच की गई उसमें कई बसों में एकदम नया सामान लगा हुआ मिला। जिसे देखते ही अंदाजा लगाया जा सकता था कि फिटनेस प्रमाण पत्र लेने के लिए ही स्कूल संचालकों ने बसों में नया सामान रख कर भेजा था। यानी अब तक बसों में वह सामान नहीं था। जैसे आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड किट, सीसीटीवी सब नए ही देखने को मिले। वहीं जांच में स्कूल बसों की सीटें फटी मिलीं। बसों के अंदर रोशनी के लिए लगी लाइटें खराब मिलीं।
जांच कराने नहीं भेज रहे बसें
जिला परिवहन विभाग की तरफ से सभी निजी स्कूलों को बसों की जांच कराने के लिए 30 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इसके लिए विभाग ने प्रत्येक शनिवार व रविवार को छुट्टी के दिन भी बसों की जांच करनी है। बसों की फिटनेस जांचने के लिए जगाधरी में जय सिटी के पास बसों की जांच की जा रही है परंतु निजी स्कूल संचालक बसों को फिटनेस परखने के लिए नहीं भेज रहे हैं। अब तक दो बार जांच हो चुकी है। जिसमें केवल 39 बसें ही जांच के लिए आई हैं। गत सोमवार को 17 बसें व शनिवार को 22 बसें ही जांच के लिए भेजी गई। स्कूल संचालकों की मनमानी व लापरवाही मासूमों पर भारी पड़ सकती है।
30 अप्रैल के बाद कार्रवाई होगी : हैरतजीत कौर
जिला परिवहन अधिकारी हैरतजीत कौर ने बताया कि निजी स्कूलों के पास बसों की फिटनेस जांच कराने के लिए 30 अप्रैल तक का समय है। जो जांच नहीं कराएगा उसके लिए स्कूल संचालक खुद जिम्मेदार होंगे। 30 अप्रैल के बाद फिर से सड़कों पर स्कूल बसों की जांच की जाएगी।
विज्ञापन
निजी स्कूलों का ध्यान अभिभावकों से हर माह मोटी फीस वसूलने पर तो है लेकिन सुरक्षित बसों में सुविधा मुहैया कराने पर स्कूल संचालक अपने हाथ पीछे खींच लेते हैं। शनिवार को जिला परिवहन विभाग के ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर जसबीर राणा के नेतृत्व में 22 बसों की जांच की गई। जिनमें से 18 बसें अनफिट मिलीं। शेष चार बसों में भी कमी थी, लेकिन उसे दूर करवा कर उन्हें फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
विज्ञापन
जांच में पाया गया कि ज्यादातर बसों के पायदान टूट हुए हैं। जिन पर पांव रख कर बस में चढ़ते व उतरते समय विद्यार्थी के साथ कोई भी हादसा हो सकता है। बसों में स्पीड गवर्नर नहीं मिले। जिन बसों में मिले वह खराब किए हुए थे। बसों में सीसीटीवी केवल नाम के लिए लगाए हुए हैं। उनकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग नहीं की जा सकती। बसों के इंडीकेटर, हेड व बैक लाइट, वाइपर तक काम नहीं कर रहे हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बसों में विद्यार्थी कितने सुरक्षित हैं।
विज्ञापन
कई स्कूल तो नया सामान खरीद कर लाए
शनिवार को स्कूल बसों की जो जांच की गई उसमें कई बसों में एकदम नया सामान लगा हुआ मिला। जिसे देखते ही अंदाजा लगाया जा सकता था कि फिटनेस प्रमाण पत्र लेने के लिए ही स्कूल संचालकों ने बसों में नया सामान रख कर भेजा था। यानी अब तक बसों में वह सामान नहीं था। जैसे आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड किट, सीसीटीवी सब नए ही देखने को मिले। वहीं जांच में स्कूल बसों की सीटें फटी मिलीं। बसों के अंदर रोशनी के लिए लगी लाइटें खराब मिलीं।
जांच कराने नहीं भेज रहे बसें
जिला परिवहन विभाग की तरफ से सभी निजी स्कूलों को बसों की जांच कराने के लिए 30 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इसके लिए विभाग ने प्रत्येक शनिवार व रविवार को छुट्टी के दिन भी बसों की जांच करनी है। बसों की फिटनेस जांचने के लिए जगाधरी में जय सिटी के पास बसों की जांच की जा रही है परंतु निजी स्कूल संचालक बसों को फिटनेस परखने के लिए नहीं भेज रहे हैं। अब तक दो बार जांच हो चुकी है। जिसमें केवल 39 बसें ही जांच के लिए आई हैं। गत सोमवार को 17 बसें व शनिवार को 22 बसें ही जांच के लिए भेजी गई। स्कूल संचालकों की मनमानी व लापरवाही मासूमों पर भारी पड़ सकती है।
30 अप्रैल के बाद कार्रवाई होगी : हैरतजीत कौर
जिला परिवहन अधिकारी हैरतजीत कौर ने बताया कि निजी स्कूलों के पास बसों की फिटनेस जांच कराने के लिए 30 अप्रैल तक का समय है। जो जांच नहीं कराएगा उसके लिए स्कूल संचालक खुद जिम्मेदार होंगे। 30 अप्रैल के बाद फिर से सड़कों पर स्कूल बसों की जांच की जाएगी।