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चालक के हत्यारोपियों की गिरफ्तारी न होने पर रोडवेज का जाम, भटकते रहे यात्री
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बस के लिए यमुनानगर बस स्टैंड पर पहुंचे यात्री।
- फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। जीटी रोड पर रोडवेज चालक जगबीर सिंह की थार जीप से कुचलकर हत्या करने के विरोध में वीरवार को कर्मचारियों ने रोडवेज का चक्का जाम कर दिया। अल सुबह से देर शाम तक रोडवेज की 125 में से एक भी बस नहीं चली। गर्मी में बसें न मिलने से यात्री बेहाल रहे।
बसों के लिए यात्री बस स्टैंड पर पहुंचे जब चक्का जाम का पता चला तो उन्हें मजबूरन लौटना पड़ा। रोडवेज कर्मचारी विरोध स्वरूप यमुनानगर बस स्टैंड के गेट पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। रोडवेज जीएम बालक राम ने कर्मचारियों से बात की। जिसके बाद कर्मचारी धरना देने के लिए बस स्टैंड के अंदर बैठ गए। चक्का जाम देखते हुए बस स्टैंड के अंदर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त रहे। एक दिन के चक्का जाम से यमुनानगर डिपो को करीब 12 लाख राजस्व का नुकसान हुआ है।
किलोमीटर स्कीम और सहकारी बसों से मिली कुछ राहत
यमुनानगर डिपो में रोडवेज की कुल 135 बसें हैं। इनमें से 10 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत लगी हुई हैं। इसलिए किलोमीटर स्कीम के तहत बसें चलती रही। इसी तरह सहकारी परिवहन समिति की 30 बसें भी चलती रही। परंतु यह बसें बस स्टैंड के बाहर से ही चली। इन्हें बस स्टैंड के अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई। किलोमीटर स्कीम के तहत लगी बसें केवल दिल्ली, हिसार रूट पर ही चलीं। जबकि अन्य रूटों पर यात्रियों को बसों में ही सफर करना पड़ा। यात्री बस अड्डे पर अपना सामान लेकर भटकते रहे।
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रोडवेज हड़ताल का असर स्कूल, कॉलेजों व आईटीआई पर भी पड़ा। दरअसल आम यात्रियों के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी नहीं पता था कि रोडवेज की हड़ताल है। इसलिए वह घरों से निकल अपने-अपने गांवों के अड्डों पर पहुंच गए। परंतु रोडवेज की बसें नहीं आई। कुछ छात्र प्राइवेट बसों में जरूर किराया देकर शहर आए। जबकि अन्य विद्यार्थी अपने गांव के अड्डे से ही लौट गए। क्योंकि उन्हें डर था कहीं शाम के समय वह बस स्टैंड पर ही न फंस जाए। इसलिए शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की हाजिरी काफी कम रही।
कर्मचारी बोले-सुरक्षित होंगे तभी कर सकेंगे ड्यूटी
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा के आह्वान पर कर्मचारी यमुनानगर डिपो के प्रधान राजिंदर कांबोज, नंदलाल कांबोज, मुकेश पोसवाल, रघबीर सिंह व रामकर्ण व अन्य कर्मचारियों ने बस स्टैंड पर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि रोडवेज चालक जगबीर सिंह के हत्यारों को पुलिस ने अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। पिता के हत्यारों की गिरफ्तारी न होने से जगबीर के 22 वर्षीय बेटे संदीप ने भी जहर खाकर जान दे दी है। इसलिए यह एक नहीं बल्कि दो-दो हत्या हुई हैं। आज प्रदेश में कोई भी कर्मचारी सुरक्षित नहीं है। असुरक्षित माहौल में कर्मचारी कैसे काम करेंगे। उन्होंने मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। मौके पर सचिव महीपाल सौदे, प्रदीप, संजीव सैनी, अनिल कुमार, संदीप वर्मा समेत अन्य मौजूद रहे।
रोडवेज की बसें नहीं चल पाईं : बालक राम
रोडवेज जीएम बालक राम का कहना है कि रोडवेज की ज्यादातर बसें बंद रही। किलोमीटर स्कीम व सहकारी परिवहन की बसें चलती रही। बसें चलाने को लेकर कर्मचारियों से बातचीत हुई थी, परंतु वह नहीं माने। एक दिन के चक्का जाम से रोडवेज को करीब 12 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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बसों के लिए यात्री बस स्टैंड पर पहुंचे जब चक्का जाम का पता चला तो उन्हें मजबूरन लौटना पड़ा। रोडवेज कर्मचारी विरोध स्वरूप यमुनानगर बस स्टैंड के गेट पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। रोडवेज जीएम बालक राम ने कर्मचारियों से बात की। जिसके बाद कर्मचारी धरना देने के लिए बस स्टैंड के अंदर बैठ गए। चक्का जाम देखते हुए बस स्टैंड के अंदर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त रहे। एक दिन के चक्का जाम से यमुनानगर डिपो को करीब 12 लाख राजस्व का नुकसान हुआ है।
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किलोमीटर स्कीम और सहकारी बसों से मिली कुछ राहत
यमुनानगर डिपो में रोडवेज की कुल 135 बसें हैं। इनमें से 10 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत लगी हुई हैं। इसलिए किलोमीटर स्कीम के तहत बसें चलती रही। इसी तरह सहकारी परिवहन समिति की 30 बसें भी चलती रही। परंतु यह बसें बस स्टैंड के बाहर से ही चली। इन्हें बस स्टैंड के अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई। किलोमीटर स्कीम के तहत लगी बसें केवल दिल्ली, हिसार रूट पर ही चलीं। जबकि अन्य रूटों पर यात्रियों को बसों में ही सफर करना पड़ा। यात्री बस अड्डे पर अपना सामान लेकर भटकते रहे।
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रोडवेज हड़ताल का असर स्कूल, कॉलेजों व आईटीआई पर भी पड़ा। दरअसल आम यात्रियों के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी नहीं पता था कि रोडवेज की हड़ताल है। इसलिए वह घरों से निकल अपने-अपने गांवों के अड्डों पर पहुंच गए। परंतु रोडवेज की बसें नहीं आई। कुछ छात्र प्राइवेट बसों में जरूर किराया देकर शहर आए। जबकि अन्य विद्यार्थी अपने गांव के अड्डे से ही लौट गए। क्योंकि उन्हें डर था कहीं शाम के समय वह बस स्टैंड पर ही न फंस जाए। इसलिए शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की हाजिरी काफी कम रही।
कर्मचारी बोले-सुरक्षित होंगे तभी कर सकेंगे ड्यूटी
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा के आह्वान पर कर्मचारी यमुनानगर डिपो के प्रधान राजिंदर कांबोज, नंदलाल कांबोज, मुकेश पोसवाल, रघबीर सिंह व रामकर्ण व अन्य कर्मचारियों ने बस स्टैंड पर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि रोडवेज चालक जगबीर सिंह के हत्यारों को पुलिस ने अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। पिता के हत्यारों की गिरफ्तारी न होने से जगबीर के 22 वर्षीय बेटे संदीप ने भी जहर खाकर जान दे दी है। इसलिए यह एक नहीं बल्कि दो-दो हत्या हुई हैं। आज प्रदेश में कोई भी कर्मचारी सुरक्षित नहीं है। असुरक्षित माहौल में कर्मचारी कैसे काम करेंगे। उन्होंने मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। मौके पर सचिव महीपाल सौदे, प्रदीप, संजीव सैनी, अनिल कुमार, संदीप वर्मा समेत अन्य मौजूद रहे।
रोडवेज की बसें नहीं चल पाईं : बालक राम
रोडवेज जीएम बालक राम का कहना है कि रोडवेज की ज्यादातर बसें बंद रही। किलोमीटर स्कीम व सहकारी परिवहन की बसें चलती रही। बसें चलाने को लेकर कर्मचारियों से बातचीत हुई थी, परंतु वह नहीं माने। एक दिन के चक्का जाम से रोडवेज को करीब 12 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।