यमुनानगर: सात माह में 245 सड़क हादसे, 114 लोग गंवा चुके जान, टूटी सड़कें भी कारण
जिले में लोग असमय मौत का शिकार हो रहे हैं। सात माह में 245 सड़क हादसों में 114 लोग जान गंवा चुके हैं। सड़कों की खामियां दूर करने को अधिकारी भी गंभीर नहीं हैं। गत वर्ष बताए गए काम अब तक लंबित है।
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हरियाणा के यमुनानगर जिले शहर हो या गांव, हर जगह हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है। इस साल एक जनवरी से 31 जुलाई तक केवल सात माह में ही 114 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। वाहन चालकों की लापरवाही के साथ-साथ काफी हद तक जिला प्रशासन भी इन हादसों के लिए जिम्मेदार है।
सड़कों की खामियां दूर करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को जो काम दिए गए थे वह पूरे ही नहीं किए। इसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है जिनके परिवार के सदस्य असमय मौत का शिकार हो गए।
एक जनवरी से 31 जुलाई तक जिले में कुल 245 सड़क हादसे हुए थे। इनमें 114 लोगों की मौत हुई तो 205 लोग घायल भी हुए। इसी साल मई से जुलाई तक केवल तीन माह में ही 101 हादसे हुए। जिनमें 43 की मौत व 91 घायल हुए। वर्ष 2021 में मई, जून व जुलाई में जहां 88 हादसों में 37 मौत व 87 लोग घायल हुए थे। वहीं इस साल इन्हीं तीन माह में 101 हादसों में 43 लोगों की मौत व 91 लोग घायल हो चुके हैं।
लोग मर रहे, लेकिन अधिकारी कब होंगे गंभीर
सड़क हादसों में लोग मर रहे हैं, लेकिन अधिकारी है कि काम के प्रति गंभीर होने का नाम ही नहीं ले रहे। अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाने के लिए 24 अगस्त को हुई रोड सेफ्टी की बैठक में जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पर्याप्त है। 24 नवंबर 2021 व 28 जनवरी 2022 को हुई रोड सेफ्टी की बैठक में मानकपुर, हथनीकुंड व लाल ढांग पर करने लिए काम दिए गए थे। तीनों ही जगह कुछ नहीं हुआ। जगाधरी-पांवटा नेशनल हाईवे स्थित मानकपुर में हाईवे किनारे से कब्जा हटाना था। 15 दिन का समय एनएचएआई व पीडल्यूडी ने मांगा था। परंतु कुछ नहीं हुआ। हथनीकुंड के पास तीव्र मोड़ पर स्पीड ब्रेकर, ट्रैफिक कंट्रोल डिवाइस लगनी थी। अब तक नहीं लगी। हिमाचल प्रदेश की सीमा पर लाल ढांग पर कोई सुधार नहीं हुआ। इसी तरह पश्चिमी यमुना नहर पर बने फतेहपुर पुल के ऊपर रोड मार्किंग नहीं हो सकी। प्यारा चौक व मातेश्वरी देवी अहिल्या बाई चौक पर स्पीड ब्रेकर, कैटआई, जेबरा क्रॉसिंग नहीं है। गाबा अस्पताल के सामने सीवरेज व सड़क एक लेवल में न होने से हादसे हो रहे हैं।
हादसों की एक वजह टूटी सड़कें भी
सड़क हादसों की एक बड़ी वजह टूटी सड़कें भी हैं। मानसून सीजन में हुई बारिश के बाद ज्यादातर सड़कों का कचूमर निकल चुका है। सड़कों के पत्थर व बजरी उखड़ कर बिखर चुके हैं। शहर के महाराणा प्रताप चौक पर कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन यहां ट्रैफिक लाइट बंद रहती है। चौक के बीचोबीच सड़क टूटी हुई है।
सड़क हादसों में वृद्घि हुई हैः डॉ. सुभाष चंद्र
जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र का कहना है कि यह सही है कि सड़क हादसों में काफी वृद्घि हुई है। सड़कों की खामियों को दूर करने के लिए हर माह रोड सेफ्टी की बैठक में संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाते हैं। जो काम नहीं करते उनकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाती है।
वर्ष 2021 में मई से जुलाई तक हुए हादसे
महीना हादसे मौत घायल
- मई 25 15 24
- जून 32 11 33
- जुलाई 31 11 30
- कुल 88 37 87
वर्ष 2022 में मई से जुलाई तक हुए हादसे
महीना हादसे मौत घायल
- मई 29 13 27
- जून 44 21 37
- जुलाई 28 09 27
- कुल 101 43 91