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स्वार्थ के लिए जीना मानवता नहीं : नीलम
Mon, 08 Sep 2025 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 08 Sep 2025 01:14 AM IST
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग सुनती संगत। संस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में साध्वी नीलम भारती ने मानव जीवन में सेवा का महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि स्वार्थ पूर्ण जीवन यापन करना और फिर चले जाना मानवता नहीं होती है।
साध्वी ने कहा कि प्रकृति और परमात्मा ने मनुष्य को सृष्टि का सिरमौर बनाकर पृथ्वी पर भेजा है। सेवा भाव के बिना जीवन अर्थ पूर्ण नहीं हो सकता है। परोपकार व जन कल्याण की भावना से सेवारत होकर जीवन को सार्थक कर लेना ही मानव का परम धर्म है।
सेवा शब्द जितना छोटा है, उसका मर्म उतना ही गहन व गूढ़ है। हमें परमात्मा की कृपा से स्वस्थ तन मिला है, तो हम सभी इसका पूर्ण लाभ उठाएं और संकीर्ण सोच के दायरे व आलस्य का त्याग कर माता-पिता, परिवारजन के साथ समाज के निम्न व जरूरतमंद वर्ग की सेवा अवश्य करें। संतों, भक्तों व गुरुजनों की सेवा ही सेवा का अति दिव्यतम स्वरूप है।
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में साध्वी नीलम भारती ने मानव जीवन में सेवा का महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि स्वार्थ पूर्ण जीवन यापन करना और फिर चले जाना मानवता नहीं होती है।
साध्वी ने कहा कि प्रकृति और परमात्मा ने मनुष्य को सृष्टि का सिरमौर बनाकर पृथ्वी पर भेजा है। सेवा भाव के बिना जीवन अर्थ पूर्ण नहीं हो सकता है। परोपकार व जन कल्याण की भावना से सेवारत होकर जीवन को सार्थक कर लेना ही मानव का परम धर्म है।
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सेवा शब्द जितना छोटा है, उसका मर्म उतना ही गहन व गूढ़ है। हमें परमात्मा की कृपा से स्वस्थ तन मिला है, तो हम सभी इसका पूर्ण लाभ उठाएं और संकीर्ण सोच के दायरे व आलस्य का त्याग कर माता-पिता, परिवारजन के साथ समाज के निम्न व जरूरतमंद वर्ग की सेवा अवश्य करें। संतों, भक्तों व गुरुजनों की सेवा ही सेवा का अति दिव्यतम स्वरूप है।
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