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Yamuna Nagar News: सफाई कर्मचारियों की कमी से बिगड़ती है स्वच्छता रैंकिंग
Wed, 29 May 2024 05:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 29 May 2024 05:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। लोकसभा चुनाव बाद नगर निगम अफसर स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 की तैयारियों में लग जाएंगे। ये देख निवर्तमान पार्षद शहर की आबादी मुताबिक सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मानें तो इसी कमी से स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग बिगड़ रही है। चूंकि नगर निगम के अंतर्गत मांग से आधे भी सफाई कर्मी नहीं हैं।
मौजूदा समय में निगम क्षेत्र में छह लाख की जनसंख्या पर तीन हजार सफाई कर्मियों की मांग हैं, पर करीब 750 के सहारे काम चल रहा है। वहीं स्वीकृत पदों की संख्या 1400 हैं। इस तरह कम स्टाफ में निगम अफसर चाहकर भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं कर पा रहे हैं। यह मुद्दा निगम की सदन बैठकों में कई बार आ चुका है, बावजूद इसके सफाई कर्मियों की कमी पूरी नहीं हो पाई।
सफाई कर्मियों की कमी का असर शहर की सफाई व्यवस्था के साथ स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग पर पड़ रहा है, जो बीते वर्ष से 51 पायदान नीचे गिरकर 221 पर आ गई। स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में शहर की रैंकिंग 170 थी, जिसमें सुधार कर स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 की रैंकिंग में शहर को देश के टॉप 100 शहरों की सूची में लाने के प्रयास हुए।
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इसके लिए नगर निगम के वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में सफाई पर 35.34 करोड़ रुपये व्यय का लक्ष्य रखा गया। इसमें अकेले 26 से 27 करोड़ रुपये का डोर टू डोर कचरा उठान से निस्तारण के काम का ठेका दिया गया। इसके अलावा करीब सवा करोड़ रुपये में नालों की सफाई का ठेका हुआ।
ऐसे ही स्वीपिंग ट्रक सहित अन्य कचरा उठान वाहनों के रखरखाव, ट्रैक्टर-ट्रॉली व अन्य वाहनों के किराये व शुल्क और झाड़ू, फावड़ा, चूना पाउडर व अन्य सामान पर करोड़ों खर्च किया गया। साथ ही सदन बैठकों में सफाई के कई प्रस्ताव पास हुए और निगम अफसरों की बैठकों में भी कई योजनाएं बनीं। फील्ड से लेकर सोशल मीडिया पर जागरूकता से लेकर चालान जैसी कार्रवाई भी अमल में लाई गई।
इन सभी के बाद भी शहर की स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग एक साल में 51 पायदान नीचे आ गई। इसकी बड़ी वजह निवर्तमान पार्षद सफाई कर्मियों की कमी बता रहे हैं। रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि पूरे पांच वर्षों के कार्यकाल में सफाई कर्मी जरूरत से आधे भी नहीं थे। यह मुद्दा सदन बैठकों में उठाया और सफाई कर्मियों की कमी पूरी करने की मांग रखी, पर इसे नजरअंदाज किया गया। शहर की आबादी मुताबिक तीन हजार सफाई कर्मी होने चाहिएं
रिक्त पद भरने के लिए मुख्यालय को डिमांड भेजी जाती है। जितना स्टाफ है, उससे पूरा प्रयास है कि सफाई का कार्य बेहतर हो। कहीं कचरा होने के बारे में सूचना देने को नंबर भी जारी है, उस पर कोई शिकायत मिलती है तो तुरंत उठान कराया जाता है। - हरजीत सिंह, सीएसआई, नगर निगम।
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यमुनानगर। लोकसभा चुनाव बाद नगर निगम अफसर स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 की तैयारियों में लग जाएंगे। ये देख निवर्तमान पार्षद शहर की आबादी मुताबिक सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मानें तो इसी कमी से स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग बिगड़ रही है। चूंकि नगर निगम के अंतर्गत मांग से आधे भी सफाई कर्मी नहीं हैं।
मौजूदा समय में निगम क्षेत्र में छह लाख की जनसंख्या पर तीन हजार सफाई कर्मियों की मांग हैं, पर करीब 750 के सहारे काम चल रहा है। वहीं स्वीकृत पदों की संख्या 1400 हैं। इस तरह कम स्टाफ में निगम अफसर चाहकर भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं कर पा रहे हैं। यह मुद्दा निगम की सदन बैठकों में कई बार आ चुका है, बावजूद इसके सफाई कर्मियों की कमी पूरी नहीं हो पाई।
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सफाई कर्मियों की कमी का असर शहर की सफाई व्यवस्था के साथ स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग पर पड़ रहा है, जो बीते वर्ष से 51 पायदान नीचे गिरकर 221 पर आ गई। स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में शहर की रैंकिंग 170 थी, जिसमें सुधार कर स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 की रैंकिंग में शहर को देश के टॉप 100 शहरों की सूची में लाने के प्रयास हुए।
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इसके लिए नगर निगम के वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में सफाई पर 35.34 करोड़ रुपये व्यय का लक्ष्य रखा गया। इसमें अकेले 26 से 27 करोड़ रुपये का डोर टू डोर कचरा उठान से निस्तारण के काम का ठेका दिया गया। इसके अलावा करीब सवा करोड़ रुपये में नालों की सफाई का ठेका हुआ।
ऐसे ही स्वीपिंग ट्रक सहित अन्य कचरा उठान वाहनों के रखरखाव, ट्रैक्टर-ट्रॉली व अन्य वाहनों के किराये व शुल्क और झाड़ू, फावड़ा, चूना पाउडर व अन्य सामान पर करोड़ों खर्च किया गया। साथ ही सदन बैठकों में सफाई के कई प्रस्ताव पास हुए और निगम अफसरों की बैठकों में भी कई योजनाएं बनीं। फील्ड से लेकर सोशल मीडिया पर जागरूकता से लेकर चालान जैसी कार्रवाई भी अमल में लाई गई।
इन सभी के बाद भी शहर की स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग एक साल में 51 पायदान नीचे आ गई। इसकी बड़ी वजह निवर्तमान पार्षद सफाई कर्मियों की कमी बता रहे हैं। रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि पूरे पांच वर्षों के कार्यकाल में सफाई कर्मी जरूरत से आधे भी नहीं थे। यह मुद्दा सदन बैठकों में उठाया और सफाई कर्मियों की कमी पूरी करने की मांग रखी, पर इसे नजरअंदाज किया गया। शहर की आबादी मुताबिक तीन हजार सफाई कर्मी होने चाहिएं
रिक्त पद भरने के लिए मुख्यालय को डिमांड भेजी जाती है। जितना स्टाफ है, उससे पूरा प्रयास है कि सफाई का कार्य बेहतर हो। कहीं कचरा होने के बारे में सूचना देने को नंबर भी जारी है, उस पर कोई शिकायत मिलती है तो तुरंत उठान कराया जाता है। - हरजीत सिंह, सीएसआई, नगर निगम।