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कन्या भ्रूण हत्या करना महापाप : दीपक महाराज
Mon, 08 Sep 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 08 Sep 2025 01:20 AM IST
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कथा सुनाते दीपक महाराज। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्रतापनगर अनाज मंडी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में छठे दिन दीपक महाराज ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या करना महापाप है। जिस व्यक्ति ने कन्या भ्रूण हत्या की हो, उसे देवियों की उपासना करने का कोई अधिकार नहीं है।
कथा व्यास ने कहा कि बेटा होता है भाग्य से और बेटी होती है सौभाग्य से। उन्होंने कहा कि शादी विवाह का फैसला सोच समझ कर सामाजिक मर्यादा से करें। उन्होंने कहा कि माताएं बेटियों को अच्छे संस्कार देकर योग्य बनाएं। ताकि आप का समाज में सम्मान बड़े और बेटी के गलत आचरण के कारण किसी बाप को पगड़ी दूसरों के पैरों में ना रखनी पड़े।
उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने जरासंध को 18 बार युद्ध में हराया। भगवान अपनी मान मर्यादा का ध्यान भले नहीं रखते, लेकिन भगत की मान मर्यादा का सम्मान जरूर रखते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान भी राधा के प्रेम से पिघल जाते हैं। गोपियों की करुण पुकार सुनकर भगवान भी पिघल गए। उन्होंने कहा कि किसी के शरीर में कोई दोष हो तो उस पर कभी हंसें मत। समय बदलते देर नहीं लगती।
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उन्होंने कहा कि भगवान भाव के प्रेम के भूखे हैं धन दौलत के नहीं। भगवान को अगर पाना है तो समर्पण भाव से उन्हें सिमरन करें। इस अवसर पर पं. राजेश शर्मा, पं. जय भगवान शर्मा, ज्ञान सिंह गुर्जर, स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, शिव कुमार शर्मा, अशोक गुप्ता, सुभाष चंद, सरपंच रविंद्र कुमार, राधेलाल गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
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यमुनानगर। प्रतापनगर अनाज मंडी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में छठे दिन दीपक महाराज ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या करना महापाप है। जिस व्यक्ति ने कन्या भ्रूण हत्या की हो, उसे देवियों की उपासना करने का कोई अधिकार नहीं है।
कथा व्यास ने कहा कि बेटा होता है भाग्य से और बेटी होती है सौभाग्य से। उन्होंने कहा कि शादी विवाह का फैसला सोच समझ कर सामाजिक मर्यादा से करें। उन्होंने कहा कि माताएं बेटियों को अच्छे संस्कार देकर योग्य बनाएं। ताकि आप का समाज में सम्मान बड़े और बेटी के गलत आचरण के कारण किसी बाप को पगड़ी दूसरों के पैरों में ना रखनी पड़े।
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उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने जरासंध को 18 बार युद्ध में हराया। भगवान अपनी मान मर्यादा का ध्यान भले नहीं रखते, लेकिन भगत की मान मर्यादा का सम्मान जरूर रखते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान भी राधा के प्रेम से पिघल जाते हैं। गोपियों की करुण पुकार सुनकर भगवान भी पिघल गए। उन्होंने कहा कि किसी के शरीर में कोई दोष हो तो उस पर कभी हंसें मत। समय बदलते देर नहीं लगती।
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उन्होंने कहा कि भगवान भाव के प्रेम के भूखे हैं धन दौलत के नहीं। भगवान को अगर पाना है तो समर्पण भाव से उन्हें सिमरन करें। इस अवसर पर पं. राजेश शर्मा, पं. जय भगवान शर्मा, ज्ञान सिंह गुर्जर, स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, शिव कुमार शर्मा, अशोक गुप्ता, सुभाष चंद, सरपंच रविंद्र कुमार, राधेलाल गुप्ता आदि उपस्थित रहे।