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यमुना में बने हैं मौत के कुंड, हर साल जा रही युवाओं की जान
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हरियाणा और दिल्ली के लोगों की प्यास बुझाने वाली जीवनदायिनी यमुना में बने गहरे कुंड लोगों की जान ले रहे हैं। जिले में करीब 75 किमी एरिया में बहने वाली यमुना नदी में सैकड़ों कुंड हैं। इनमें से अधिकतर की गहराई 40 से 50 फीट तक है। कई जगह यमुना केवल चार फीट गहरी नहर आती है, जब कोई इसमें जाता है तो विशाल कुंड में धंस जाता है। बड़े से बड़ा तैराक भी इसे पार नहीं कर पाता और मौत के आगोश में चला जाता है। हथनीकुंड बैराज से लेकर गुमथला तक यमुना नदी के किनारे 123 गांव हैं। विशेष अवसरों पर पूजा अर्चना के लिए पहुंचे श्रद्धालु स्नान करने के लिए यमुना घाट पर पहुंचते हैं, जो कुंड में धंसने से हादसे का शिकार हो जाते हैं। जिले में पिछले पांच साल में 100 से ज्यादा लोगों की जान इन कुंड की वजह से जा चुकी है।
एंटी करप्शन सोसायटी के संस्थापक एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि पहले प्राकृतिक रूप से कुछ स्थानों पर पानी खुद ब खुद कुंड बनाता था, जिनकी गहराई ज्यादा नहीं होती थी। अब अवैध खनन के कारण यमुना नदी में गहरे कुंड बन गए हैं। जो मौत का कारण बन रहे हैं। यमुना नदी क्षेत्र से अंधाधुंध रेत निकालने से बड़े गड्ढे बन गए हैं। ऐसे स्थानों पर यमुना का पानी भंवर की तरह घूम-घूमकर चलता है। प्रशासन का ध्यान बाढ़ राहत प्रशिक्षण शिविर पर होता है। हथनीकुंड बैराज से लेकर गुमथला तक विभिन्न घाटों पर इन कुंडों के कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं। वहीं पश्चिमी यमुना नहर, आवर्धन नहर सहित यमुना नदी में भी डूबने के मामले सामने आते रहते हैं। अवैध खनन के खिलाफ साल 2017 में हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी डाली गई है।
गर्मियों में होती हैं घटनाएं
गर्मियों का सीजन शुरू होते ही नहाने का खेल शुरू हो जाता है। हथिनी कुंड बैराज से यमुना नदी, पश्चिमी यमुना नहर निकलती है। हमीदा हेड से आवर्धन नहर पश्चिमी यमुना नहर से करनाल होते हुए दिल्ली जा रही है। हथनीकुंड से 75 किलोमीटर लंबी नदी का क्षेत्र यमुनानगर में आता है, क्योंकि यमुना नदी में पानी कम होता है। इसलिए पश्चिमी नहर और आवर्धन नहर में सबसे ज्यादा लोग डूबते हैं। इस साल अब तक 15 युवाओं की मौत डूबने से हो चुकी है।
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एंटी करप्शन सोसायटी के संस्थापक एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि पहले प्राकृतिक रूप से कुछ स्थानों पर पानी खुद ब खुद कुंड बनाता था, जिनकी गहराई ज्यादा नहीं होती थी। अब अवैध खनन के कारण यमुना नदी में गहरे कुंड बन गए हैं। जो मौत का कारण बन रहे हैं। यमुना नदी क्षेत्र से अंधाधुंध रेत निकालने से बड़े गड्ढे बन गए हैं। ऐसे स्थानों पर यमुना का पानी भंवर की तरह घूम-घूमकर चलता है। प्रशासन का ध्यान बाढ़ राहत प्रशिक्षण शिविर पर होता है। हथनीकुंड बैराज से लेकर गुमथला तक विभिन्न घाटों पर इन कुंडों के कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं। वहीं पश्चिमी यमुना नहर, आवर्धन नहर सहित यमुना नदी में भी डूबने के मामले सामने आते रहते हैं। अवैध खनन के खिलाफ साल 2017 में हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी डाली गई है।
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गर्मियों में होती हैं घटनाएं
गर्मियों का सीजन शुरू होते ही नहाने का खेल शुरू हो जाता है। हथिनी कुंड बैराज से यमुना नदी, पश्चिमी यमुना नहर निकलती है। हमीदा हेड से आवर्धन नहर पश्चिमी यमुना नहर से करनाल होते हुए दिल्ली जा रही है। हथनीकुंड से 75 किलोमीटर लंबी नदी का क्षेत्र यमुनानगर में आता है, क्योंकि यमुना नदी में पानी कम होता है। इसलिए पश्चिमी नहर और आवर्धन नहर में सबसे ज्यादा लोग डूबते हैं। इस साल अब तक 15 युवाओं की मौत डूबने से हो चुकी है।
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