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Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं ने मां चंद्रघंटा की पूजा कर मांगी मन्नत
Fri, 12 Apr 2024 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 12 Apr 2024 01:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की वीरवार को पूजा की गई। इस दौरान सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। भक्तों ने श्रद्धा भाव मां की पूजा व आरती कर माथा टेका। छुट्टी होने के चलते माता पिता व अन्य पारिवारिक सदस्यों के साथ बच्चे भी मंदिर पहुंचे। बच्चों ने मां की प्रतिमा के सम्मुख माथा टेका और ज्योति प्रज्ज्वलित की।
श्रद्धालुओं ने नारियल चुनरी व श्रृंगार भेंट करके सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ जगाधरी के देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन के श्रीमूर्ति देवी मंदिर, जंगला वाली माता मंदिर में देखने को मिली। सुबह शाम मंदिरों में भजन के साथ मां की आरती की गई। मंदिरों में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला दिनभर जारी रहा। जबकि शाम को ज्यादा भीड़ देखने को मिली। पंडित अतुल शास्त्री ने बताया कि तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने वाले साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। जबकि नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विधान है।
ऐसे करें मां कुष्मांडा की पूजा
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि मां कुष्मांडा को ऊर्जा की देवी कहा जाता है। मां स्वरूप बेहद ममता व करुणामयी है। उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, कलश, कमल, सुदर्शन चक्र, गदा, धनुष बाण व अक्षमाला विद्यमान है। मां का यह रूप जीवन शक्ति प्रदान करने वाला है। मां कुष्मांडा को कुम्हरा यानी के पेठा सबसे प्रिय है। इसलिए इनकी पूजा में पेठे का भोग लगाना चाहिए। मां को लाल रंग प्रिय है। इसलिए पूजा में उन्हें गुड़हल या गुलाब का फूल अर्पित किया जाता है। भोग में मां को मालपुआ का भोग लगाना भी उत्तम है। पूजन में मां को कुमकुम, मौली, अक्षत अर्पित करें।
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जगाधरी। मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की वीरवार को पूजा की गई। इस दौरान सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। भक्तों ने श्रद्धा भाव मां की पूजा व आरती कर माथा टेका। छुट्टी होने के चलते माता पिता व अन्य पारिवारिक सदस्यों के साथ बच्चे भी मंदिर पहुंचे। बच्चों ने मां की प्रतिमा के सम्मुख माथा टेका और ज्योति प्रज्ज्वलित की।
श्रद्धालुओं ने नारियल चुनरी व श्रृंगार भेंट करके सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ जगाधरी के देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन के श्रीमूर्ति देवी मंदिर, जंगला वाली माता मंदिर में देखने को मिली। सुबह शाम मंदिरों में भजन के साथ मां की आरती की गई। मंदिरों में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला दिनभर जारी रहा। जबकि शाम को ज्यादा भीड़ देखने को मिली। पंडित अतुल शास्त्री ने बताया कि तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने वाले साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। जबकि नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विधान है।
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ऐसे करें मां कुष्मांडा की पूजा
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि मां कुष्मांडा को ऊर्जा की देवी कहा जाता है। मां स्वरूप बेहद ममता व करुणामयी है। उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, कलश, कमल, सुदर्शन चक्र, गदा, धनुष बाण व अक्षमाला विद्यमान है। मां का यह रूप जीवन शक्ति प्रदान करने वाला है। मां कुष्मांडा को कुम्हरा यानी के पेठा सबसे प्रिय है। इसलिए इनकी पूजा में पेठे का भोग लगाना चाहिए। मां को लाल रंग प्रिय है। इसलिए पूजा में उन्हें गुड़हल या गुलाब का फूल अर्पित किया जाता है। भोग में मां को मालपुआ का भोग लगाना भी उत्तम है। पूजन में मां को कुमकुम, मौली, अक्षत अर्पित करें।
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