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Yamuna Nagar News: सिविल अस्पताल अस्पताल के भवन सेंट्रल एसी बंद, बिना पंखे के मरीज बेहाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Apr 2023 01:37 AM IST
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Civil hospital hospital building central ac closed, patient suffering without fan
मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल यमुनानगर का पांच मंजिला भवन 120 करोड़ की लागत से बना है। 200 बैड का यह भवन आलीशान है। इसके छत में सीलिंग है और नीचे ग्रेनाइट पत्थर लगा है। लेकिन इस भवन में मरीजों के लिए पंखे नहीं हैं। अस्पताल में सेंट्रल एसी लगा है लेकिन यह शोपीस बना हुआ है। इन दिनों जिले का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में मरीज गर्मी से बेहाल हैं।
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मरीजों व उनके तीमारदारों की हालत पर किसी को रहम नहीं आ रहा है। सेंट्रल एसी चलता भी है या नहीं अभी तो इसके बारे में खुद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी नहीं पता। सेंटल एसी कब चलेगा इसकी कोई समय सीमा तय नहीं है। इतना जरूर है कि मरीजों व तीमारदारों को अभी कई दिन तक गर्मी से ऐसे ही जूझना पड़ेगा। जिला सिविल अस्पताल का नया भवन पुराने भवन तोड़ कर नया बनाया गया है। नए भवन में ए, बी व सी तीन ब्लॉक हैं। इनमें एक ब्लाक सिविल सर्जन व डॉक्टरों के लिए तथा दो ब्लॉक मरीजों के लिए हैं। तीनों ब्लॉक को बनाने पर करीब 120 करोड़ रुपये का खर्च आया है। तीनों ही ब्लॉक में सेंट्रल एसी लगाया गया गया है। सेंट्रल एसी के चलते गर्मी के दिनों में इसका तापमान नियंत्रण में रहेगा और मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों व डॉक्टरों को भी गर्मी से जूझना नहीं पड़ेगा।
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नया भवन अभी स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है। भवन तैयार होने पर स्वास्थ्य विभाग ने इसमें ओपीडी रजिस्ट्रेशन, ओपीडी, लेबर रूम, निकु वार्ड, ईएनटी समेत सभी सुविधाओं को इसमें शुरू कर दिया है। जब नए भवन में शिफ्ट किया गया तो कहा गया था कि जो काम रह गया है उसे जल्द ही पूरा कर दिया जाएगा। परंतु अब तक इसमें काफी काम अधूरा है। सेंट्रल एसी का नहीं चलना इसका उदाहरण है। अब आने वाले दिनों में गर्मी और सताएगी। ओपीडी की पर्ची बनवाने के लिए सुबह से ही 800 से 1000 लोग लंबी लाइन में लग जाते हैं। भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि कई बार धक्का-मुक्की की नौबत आ जाती है। यहां तक की डॉक्टरों के केबिन के बाहर जहां मरीज इंतजार करते हैं वहां भी पंखे की व्यवस्था नहीं है। जैसे ही तापमान 40 पर पहुंचा तो पसीने छूटने शुरू हो जाएंगे।
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अस्पताल के नए भवन में कमरों, बरामदे व हॉल में फाल सीलिंग लगाई गई है। फाल सीलिंग इतनी नीची है कि इसमें पंखे भी नहीं लग सकते। यह इतनी नीची है कि इसमें फर्श पर खड़े होकर कोई भी हाथ लगा सकता है। यदि पंखे लगा दिए तो उनसे मरीजों के चपेट में आने का खतरा रहेगा। इसलिए अस्पताल में न सेंट्रल एसी चल रहा है और न ही पंखे लग सकते हैं। इन सबके बीच मरीज पिस गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की पीएमओ डॉ. पूनम चौधरी ने बताया कि सेंट्रल एसी चलने में 15 से 20 दिन लग सकते हैं। डॉक्टरों के केबिन में जहां मरीजों का चेकअप होता है वहां सीलिंग फैन लगवा दिए हैं। बाहर सेंट्रल ऐसी चलने तक वाल फैन लगवा देंगे।


पीडब्ल्यूडी (इलेक्ट्रिक विंग) के एसडीओ सुखदेव ने बताया कि अस्पताल के सेंट्रल एसी की ट्रायल टेस्टिंग चल रही है। ट्रायल के लिए एक से तीन माह का समय होता है। एक माह तक एसी को चला देंगे। वहीं जहां पंखों की जरूरत थी वहां लगा रहे हैं।
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