{"_id":"6ade62c670299a53980ffa57","slug":"cbg-plant-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-165183-2026-10-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: विरोध से 100 करोड़ रुपये का सीबीजी प्लांट लटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: विरोध से 100 करोड़ रुपये का सीबीजी प्लांट लटका
Mon, 26 Oct 2026 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 26 Oct 2026 01:42 AM IST
विज्ञापन
नगर निगम कार्यालय। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्रदेश के पहले कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट का निर्माण ग्रामीणों के विरोध के चलते अटका हुआ है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से मुकारबपुर गांव में बनने वाले इस प्लांट का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2025 को कैल में आयोजित रैली के दौरान किया था। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब इस योजना की रूपरेखा बनाई गई थी तो आसपास के लोगों को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया। प्रधानमंत्री से शिलान्यास कराने के बाद भी प्रशासन अभी तक इसमें एक ईंट नहीं लगवा पाया। देरी के चलते निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करना चुनौती से कम नहीं है।
नगर निगम ने करीब 10 एकड़ भूमि पर प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई थी। इसका उद्देश्य गोबर और कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन कर संसाधनों का उपयोग करना है। परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन विरोध के चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। रोजाना 225 टन गोबर और कचरे के प्रबंधन की योजना नगर निगम ने बनाई थी। प्रस्तावित प्लांट में प्रतिदिन 100 टन गोबर और 125 टन कचरे के प्रबंधन की योजना है। परियोजना के तहत सालाना 45 हजार मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक निपटान और 36 हजार मीट्रिक टन गोबर का उपयोग प्रस्तावित है। इस परियोजना का उद्देश्य कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ उससे उपयोगी ऊर्जा तैयार करना है।
विज्ञापन
गोबर से खराब होगा गांवों का वातावरण : ग्रामीण
पूर्व सरपंच बलदेव सिंह, जसप्रीत सिंह, रमेश, जयपाल और रामकर्ण का कहना है कि प्लांट स्थापित होने से आसपास के गांवों में वायु और जल प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। कचरे के प्रबंधन के दौरान मक्खी-मच्छर और अन्य कीटों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा है। ग्रामीणों ने भूजल दूषित होने की आशंका भी जताई। उनका दावा है कि चार गांव प्रस्तावित प्लांट के 500 मीटर के दायरे में आते हैं, जबकि दो गांवों की दूरी महज 250 से 300 मीटर है। इसके अलावा दो श्मशान घाट भी प्लांट के नजदीक स्थित हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से लोगों की चिंताओं का समाधान करने के बाद ही परियोजना पर आगे बढ़ने की मांग की।
किसी गांव को नुकसान नहीं होगा : मेयर
मेयर सुमन बहमनी ने कहा कि सीबीजी प्लांट से किसी भी गांव को नुकसान नहीं होगा। ग्रामीणों को परियोजना के बारे में डेमो भी दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्लांट के संचालन से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं का ध्यान रखा जा रहा है।
विज्ञापन
यमुनानगर। प्रदेश के पहले कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट का निर्माण ग्रामीणों के विरोध के चलते अटका हुआ है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से मुकारबपुर गांव में बनने वाले इस प्लांट का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2025 को कैल में आयोजित रैली के दौरान किया था। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब इस योजना की रूपरेखा बनाई गई थी तो आसपास के लोगों को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया। प्रधानमंत्री से शिलान्यास कराने के बाद भी प्रशासन अभी तक इसमें एक ईंट नहीं लगवा पाया। देरी के चलते निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करना चुनौती से कम नहीं है।
विज्ञापन
नगर निगम ने करीब 10 एकड़ भूमि पर प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई थी। इसका उद्देश्य गोबर और कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन कर संसाधनों का उपयोग करना है। परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन विरोध के चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। रोजाना 225 टन गोबर और कचरे के प्रबंधन की योजना नगर निगम ने बनाई थी। प्रस्तावित प्लांट में प्रतिदिन 100 टन गोबर और 125 टन कचरे के प्रबंधन की योजना है। परियोजना के तहत सालाना 45 हजार मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक निपटान और 36 हजार मीट्रिक टन गोबर का उपयोग प्रस्तावित है। इस परियोजना का उद्देश्य कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ उससे उपयोगी ऊर्जा तैयार करना है।
विज्ञापन
गोबर से खराब होगा गांवों का वातावरण : ग्रामीण
पूर्व सरपंच बलदेव सिंह, जसप्रीत सिंह, रमेश, जयपाल और रामकर्ण का कहना है कि प्लांट स्थापित होने से आसपास के गांवों में वायु और जल प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। कचरे के प्रबंधन के दौरान मक्खी-मच्छर और अन्य कीटों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा है। ग्रामीणों ने भूजल दूषित होने की आशंका भी जताई। उनका दावा है कि चार गांव प्रस्तावित प्लांट के 500 मीटर के दायरे में आते हैं, जबकि दो गांवों की दूरी महज 250 से 300 मीटर है। इसके अलावा दो श्मशान घाट भी प्लांट के नजदीक स्थित हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से लोगों की चिंताओं का समाधान करने के बाद ही परियोजना पर आगे बढ़ने की मांग की।
किसी गांव को नुकसान नहीं होगा : मेयर
मेयर सुमन बहमनी ने कहा कि सीबीजी प्लांट से किसी भी गांव को नुकसान नहीं होगा। ग्रामीणों को परियोजना के बारे में डेमो भी दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्लांट के संचालन से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं का ध्यान रखा जा रहा है।