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Yamuna Nagar News: स्वाइन फ्लू की चपेट में आया दो साल का बच्चा
Fri, 07 Feb 2025 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 07 Feb 2025 12:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नाहरपुर गांव में दो वर्षीय बच्चा स्वाइन फ्लू की चपेट में आया है। बच्चे को उपचार के लिए अस्पताल में लाया गया था वहां से उसे पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बच्चा फिलहाल पीजीआई में वेंटीलेटर पर है। पीजीआई से इस संबंध में सिविल सर्जन कार्यालय में सूचना भेजी है।
गत एक माह में बच्चों के स्वाइन फ्लू की चपेट में आने का यह दूसरा मामला है। गत वर्ष भी जिले में स्वाइन फ्लू के पांच मरीज मिले थे जिला निगरानी अधिकारी डाॅ. वागीश गुटेन ने बताया कि दो साल का जो बच्चा स्वाइन फ्लू की चपेट में आया है उसे बुखार, खांसी हुई थी। जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
हालत ज्यादा खराब होने पर उसे पीजीआइ रेफर कर दिया गया था। पीजीआई में बच्चे में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। वहीं पर उसका इलाज चल रहा है। इससे पहले जनवरी माह में नौ वर्षीय बच्ची भी स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गई थी। उसे भी पीजीआई में दाखिल कराना पड़ा था। 20 दिन तक उसका इलाज चला। इसके बाद वह पूरी तरह से ठीक हुई।
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आमतौर पर अधिक सर्दी में एचवन एनवन संक्रमण के मामलों में वृद्धि होती है। इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है। यह इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक सब-टाइप है जो अत्यधिक संक्रामक होता है और ह्यूमन रेस्पिरेटरी वायरस की वजह बनता है। स्वाइन फ्लू के लक्षण में बुखार, खांसी, गले में खराश, बहती या बंद नाक, शरीर में दर्द, सिरदर्द, थकान और कभी-कभी उल्टी या दस्त हैं। इससे निमोनिया और रेस्पिरेटरी फेलियर होने की संभावना रहती है।
स्वाइन फ्लू से ऐसे करें बचाव
बीमार व्यक्तियों के निकट संपर्क से बचें और अस्वस्थ महसूस होने पर घर पर रहें। बार-बार छुई जाने वाली सतहों और वस्तुओं जैसे दरवाजे के हैंडल और इलेक्ट्रानिक डिवाइस को नियमित रूप से सैनिटाइज करें। गंदे हाथों से बार-बार अपनी आंखों, नाक और त्वचा को छूने से बचें। स्वच्छता का पालन करना बेहद जरूरी है। साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोने चाहिए। खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को टिशू या अपनी कोहनी से जरूर ढकें।
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यमुनानगर। नाहरपुर गांव में दो वर्षीय बच्चा स्वाइन फ्लू की चपेट में आया है। बच्चे को उपचार के लिए अस्पताल में लाया गया था वहां से उसे पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बच्चा फिलहाल पीजीआई में वेंटीलेटर पर है। पीजीआई से इस संबंध में सिविल सर्जन कार्यालय में सूचना भेजी है।
गत एक माह में बच्चों के स्वाइन फ्लू की चपेट में आने का यह दूसरा मामला है। गत वर्ष भी जिले में स्वाइन फ्लू के पांच मरीज मिले थे जिला निगरानी अधिकारी डाॅ. वागीश गुटेन ने बताया कि दो साल का जो बच्चा स्वाइन फ्लू की चपेट में आया है उसे बुखार, खांसी हुई थी। जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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हालत ज्यादा खराब होने पर उसे पीजीआइ रेफर कर दिया गया था। पीजीआई में बच्चे में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। वहीं पर उसका इलाज चल रहा है। इससे पहले जनवरी माह में नौ वर्षीय बच्ची भी स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गई थी। उसे भी पीजीआई में दाखिल कराना पड़ा था। 20 दिन तक उसका इलाज चला। इसके बाद वह पूरी तरह से ठीक हुई।
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आमतौर पर अधिक सर्दी में एचवन एनवन संक्रमण के मामलों में वृद्धि होती है। इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है। यह इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक सब-टाइप है जो अत्यधिक संक्रामक होता है और ह्यूमन रेस्पिरेटरी वायरस की वजह बनता है। स्वाइन फ्लू के लक्षण में बुखार, खांसी, गले में खराश, बहती या बंद नाक, शरीर में दर्द, सिरदर्द, थकान और कभी-कभी उल्टी या दस्त हैं। इससे निमोनिया और रेस्पिरेटरी फेलियर होने की संभावना रहती है।
स्वाइन फ्लू से ऐसे करें बचाव
बीमार व्यक्तियों के निकट संपर्क से बचें और अस्वस्थ महसूस होने पर घर पर रहें। बार-बार छुई जाने वाली सतहों और वस्तुओं जैसे दरवाजे के हैंडल और इलेक्ट्रानिक डिवाइस को नियमित रूप से सैनिटाइज करें। गंदे हाथों से बार-बार अपनी आंखों, नाक और त्वचा को छूने से बचें। स्वच्छता का पालन करना बेहद जरूरी है। साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोने चाहिए। खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को टिशू या अपनी कोहनी से जरूर ढकें।