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18 लोगों ने तो खुद को बचा लिया, नसीमा का परिवार अंदर रह गया, आग बुझने के बाद निकाली पति और तीनों बच्चों की लाशें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Nov 2021 01:51 AM IST
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18 people saved themselves, Naseema's family remained inside, after the fire was extinguished the dead bodies of husband and three children
बुधवार मध्यरात्रि करीब डेढ़ बजे हुए थे। सिटी सेंटर के सामने विश्वकर्मा मोहल्ले में बने कबाड़ के गोदाम की पहली मंजिल पर बने सात क्वार्टरों के छह परिवारों के कुल 22 लोग अपने-अपने कमरों में सोए हुए थे। इसी दौरान अचानक भीषण आग लगने से उठे जहरीला धुआं दरवाजों के नीचे से उनके कमरों में घुसने लगा। तभी सभी की आंख खुल गई और वे एक-दूसरे का दरवाजा खटखटा उठाने की कोशिश करने लगे।
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इन्हीं क्वार्टरों में नियामुद्दीन उर्फ राजू अपनी पत्नी नसीमा, बेटी फिजा, बेटा चांद और रिहान उर्फ छोटू के साथ सोया हुआ था। जब तक वे उठते तब तक आग की लपटें विकराल रूप ले चुकीं थी। किसी तरह से 18 लोग तो गोदाम से बाहर निकाले गए, किंतु नसीमा का परिवार वहीं फंस गया। हालांकि नसीमा ने बाहर निकलने के लिए एक बच्चे को गोद में उठाया हुआ था मगर आग से मची अफरातफरी के बीच बच्चा उसके हाथ से वहीं छूट गया। इसके बाद आग की तपिश और धुएं से दम घुटने के कारण उसके पति नियामुद्दीन, बेटी फिजा, बेटा चांद और बेटे रिहान उर्फ छोटू की मौत हो गई। आग बुझने के बाद चारों की लाशों को बाहर निकाला गया। जबकि घायल नसीमा भी खुद झुलस कर बेसुध हो गई। उसे भी बमुश्किल बाहर लाया गया। नागरिक अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बेसुध उपचाराधीन नसीमा को अभी तक भी नहीं मालूम कि उसका परिवार अग्निकांड की भेंट चढ़ चुका है।
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व्यर्थ रही अपने भाई को बचाने की जद्दोजहद
मूलरूप से बिहार के पूर्वी चंपारण विहार के गांव माडीपुर मिलिक निवासी कैमुदीन ने सिटी थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका भाई नियामुद्दीन यमुनानगर में प्लाईवुड फैक्टरी में काम करता था और कबाड़ गोदाम की पहली मंजिल पर बने क्वार्टरों में रहता था। जबकि वह दूसरी गली में अपने परिवार के साथ रहता है और रजाई बनाने का काम करता है। रात डेढ़ बजे उसे आग लगने की सूचना मिली थी। इसके बाद वह अपनी बहन निशा के साथ मौके पर पहुंचे तो देखा गोदाम से घना धुआं निकल रहा था और आग की लपटें सुलग रही थी। उन्होंने अपने भाई के परिवार को बचाने की कोशिश की गई किंतु आग ज्यादा होने के चलते वे अंदर घुस नहीं पाए। इसके बाद मौके पर पहुंचे दमकल विभाग और पुलिस कर्मियों ने क्वार्टरों के पीछे बने दूसरे घरों की छत पर जाकर क्वार्टरों की पीछे की दीवार तोड़ी और उनमें से 18 लोगों को सकुशल बाहर निकाला। लेकिन उसके भाई का परिवार अंदर ही फंस गया और आग से झुलस गया।
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दीवार में छेद कर बाहर निकाले गए शव
हादसे की सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग और पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। पूरी तेजी के साथ कर्मचारी आग पर काबू पाने में जुटे थे। लेकिन अंदर जाकर लोगों को बाहर निकालने का रास्ता नहीं था। ऐसे में कर्मचारी क्वार्टरों के पीछे बने अन्य घरों की छत से जाकर क्वार्टरों की दीवार में छेद किए तब जाकर मृतकों के शवों को बाहर निकाला गया। लेकिन इस आगजनी में बच कर निकले लोग भी घायल हो गये थे।
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आखिरी कमरे में रहता था परिवार, इसलिए फंस गया
वैसे तो इस कबाड़ गोदाम में हर प्रकार की स्क्रैप पड़ी है, लेकिन मालिक ने मोटा मुनाफा कमाने के लिए प्रवासियों के रहने के लिए गोदाम की पहली मंजिल पर कमरे बनाए हैं, लेकिन नीचे आने का रास्ता एक ही रखा हुआ है। इस हादसे में जिनकी मौत हुई वह सीढ़ियों से अंतिम वाले कमरे में रहता था। इसलिए उसे भागने का मौका तक नहीं मिला और मौत हो गई। उधर, भीषण आग लगने से आसपास के घरों की दीवारें भी काफी गर्म हो गई थी। ऐसे में लोगों को अपने घरों से बाहर आना पड़ा। जबकि कमरों में रहने वाले सचिन, श्याम, रतनेश, सतीश, अंकित, शिवम, पन्ना लाल, सविता, सूरज, मनोज, रिया, सुरेंद्र, इंदू, सपना, विशाल, चंदन, खुशबू व एक अन्य ने भागकर अपनी जान बचाई।
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नियामुद्दीन ने खुद बहन को दी आग की सूचना
आग लगने का पता लगते ही नियामुद्दीन ने उन्हें बचाने के लिए बहन निशा को तुरंत फोन किया। इसके वह भाई कैमुदीन को लेकर मौके पर पहुंची। लेकिन गोदाम से सुलग रही आग की लपटों को देखकर आगे नहीं बढ़ गई। हालांकि उनसे पहले वहां काफी संख्या में लोग मौजूद थे। सभी ने उन्हें आगे जाने से रोक लिया।
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गोदाम में नहीं लगे हैं अग्निशमन यंत्र
कबाड़ गोदाम मालिक नवीन करीब 20 साल से अधिक इस कारोबार को कर रहा है। लेकिन यहां ठूस-ठूस कर भरे कबाड़ को किसी अनहोनी से बचाने के लिए कोई अग्निशमन यंत्र मौजूद नहीं हैं। जानकारी के अनुसार गोदाम भी बिना लाइसेंस के चल रहा था।
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घटना के बाद आई सर्वे की याद
घटना के बाद मौके पर पहुंचे डीसी पार्थ गुप्ता और एसपी कमलदीप गोयल ने घटनास्थल का जायजा लिया। बाकायदा जिस जगह से लोगों को बाहर निकाला गया, वह साइट भी देखी गई। इस दौरान डीसी ने कहा कि कबाड़ी की दुकान के भवन की लोक निर्माण विभाग (भवन एवं मार्ग) से चेकिंग करवाई जाएगी, ताकि ये मालूम किया जा सके कि आग लगने के बाद जला हुआ गोदाम आसपास के मकानों को खतरा तो नहीं। इसी तरह नगर निगम व श्रम विभाग से जिला के शहरी क्षेत्रों के सभी रिहायशी इलाकों के पास मौजूद गोदामों व कबाड़ी की दुकानों का सर्वे करवाया जाएगा। इस दौरान इन इकाइयों के कागजात चेक करते हुए ये देखा जाएगा कि ये गोदाम

फायर सेफ्टी के नियम पूरे कर रहे हैं या नहीं।
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वर्जन
इस हादसे में तीन बच्चे और एक व्यक्ति की मौत हो गई है। इस घटना से काफी दुख है। इस मामले में कबाड़ गोदाम मालिक की लापरवाही सामने आई है। मृतक के भाई की शिकायत पर आरोपी गोदाम मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
- कमलदीप गोयल, एसपी, यमुनानगर।
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