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सिरसा में 27 दिनों से धरनारत किसानों की भूख हड़ताल शुरू

Wed, 09 Mar 2016 01:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा Updated Wed, 09 Mar 2016 01:40 AM IST
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लघु सचिवाल पर धरना देते किसान - फोटो : Bureau

मौसम की मार से खराब हुई फसलों के मुआवजे की मांग को लेकर 27 दिनों से लघु सचिवालय में धरने पर बैठे किसानों ने  भूख हड़ताल शुरू कर दी है। मंगलवार को धरनारत किसानों में से 11 किसान भूख हड़ताल पर बैठ गए। विभिन्न संगठनों से मिल रहे  समर्थन से आंदोलन चला रहे किसानों का उत्साह बढ़ा हुआ है। मंगलवार को काफी ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों किसान लघु सचिवालय  पहुंचे और आंदोलनकारी किसानों के हर कदम पर कंधा से कंधा मिलाकर चलने की बात कही।

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किसानों को संबोधित करते हुए हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि प्रशासन किसान आंदोलन को कुचलने पर आमादा हो चुका है। किसानों पर मुकदमे दर्ज करने की शुरुआत प्रशासन ने कर दी है। उन्होंने कहा कि किसान सरकार से अपना हक मांग रहा है न कि भीख।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल किसान हितैषी होने का दावा करते हैं अगर ऐसा होता तो अब तक किसानों को उनकी खराब फसलों का मुआवजा सरकार दे देती। किसानों को मुआवजा देने की बजाए प्रशासन उन्हें नोटिस जारी कर डरा रहा है कि उनके खिलाफ केस दर्ज होगा। भारूखेड़ा ने कहा कि प्रशासन के डराने-धमकाने से किसान विचलित होने वाले नहीं। ये आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार पीड़ित किसानों को खराब हुई फसलों का मुआवजा देने का ठोस आश्वासन नहीं देती।
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किसानों की जिद ठीक नहीं : उपायुक्त
उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ का कहना है कि किसानों की जिद ठीक नहीं, उन्हें आंदोलन को समाप्त कर देना चाहिए। ये तो सरकार अच्छी है जो मुआवजे की बात कर रही है नहीं तो मुआवजे का हक कहां बनता है। सरकार की तरफ से चिट्ठी आई है जिसमें वह मुआवजा देने की बात पर राजी है। उपायुक्त का कहना है कि वे लिखित में आश्वासन तो नहीं दे सकती लेकिन किसान आंदोलन वापस लें तो सरकार की चिट्ठी उन्हेें दिखाई जा सकती है।

चिट्ठी पर स्थिति स्पष्ट करें उपायुक्त : भारूखेड़ा
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा का कहना है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल या कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ चंडीगढ़ में बैठे हुए ही प्रेस विज्ञप्ति जारी करके ये कह दें कि किसानों को उनकी खराब हुई कपास ,ग्वार व गेहूं की फसल का मुआवजा दिया जाएगा तो किसान अपना आंदोलन समाप्त कर देंगे।

या फिर उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ये आश्वासन लिखित में दें, तो भी किसान विश्वास करके आंदोलन वापस ले लेंगे। उपायुक्त सरकार की चिट्ठी दिखाने की बात कर रही हैं तो सारी स्थिति स्पष्ट की जाए। सरकार कौन-कौन सी फसल का कितना-कितना मुआवजा देने की बात कर रही है। प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा या नहीं। चिट्ठी में उक्त बातें स्पष्ट लिखी है तो ठीक, नहीं तो गुमराह करने का प्रयास व्यर्थ है।

नहीं दी सिर छिपाने की जगह
भूख हड़ताल पर बैठे किसानों का कहना है कि प्रशासन आंदोलन को किसी भी सूरत में दबाने के लिए ओछी हरकतों पर उतर आया है। तीन दिन पहले रात को आई ओलावृष्टि के साथ आई तेज बरसात आई थी। धरनारत किसान ओलावृष्टि से सिर छुपाने के लिए उपायुक्त कार्यालय की तरफ जाने लगे तो पुलिस फोर्स ने उन्हें रोक दिया।


भूख हड़ताल पर बैठे किसान गांधी राम ने बताया कि प्रशासन के ओछेपन को देखने के बाद सभी धरनारत किसान दृढ़ इरादे के साथ बरसात का सामना करते हुए धरना स्थल पर ही बैठे रहे। भूख हड़ताल में शामिल किसान मोहन लाल, जग्गा सिंह, जगदीश सोलंकी, बंत सिंह, जगदीश कुमार, प्रकाश चंद्र, छबील दास, धनराम, साहब राम व जगदीश का कहना है कि जब तक सरकार मुआवजे का ऐलान नहीं करती वे भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे।

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