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पंचकूला की शीतल ने स्ट्रीम बदलकर रचा इतिहास: नॉन मेडिकल से आर्ट्स, फिर एचसीएस में 26वीं रैंक
Tue, 13 Oct 2026 04:48 PM IST
शाहिल शर्मा
आदित्य शर्मा, पंचकूला
आदित्य शर्मा, पंचकूला
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 13 Oct 2026 04:48 PM IST
सार
पंचकूला में 12वीं नॉन मेडिकल से पास करने के बाद शीतल ने यूपीएससी का लक्ष्य तय किया। लक्ष्य भेदने के लिए संकाय बदलना पड़ा। सेक्टर-36 के प्रतिष्ठित एमसीएम डीएवी कॉलेज में आर्ट्स स्ट्रीम में दाखिला लिया। ऑनर्स सब्जेक्ट में कड़ी मेहनत कर यूनिवर्सिटी लेवल पर सेकंड टॉपर रहीं।
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अपने माता-पिता के साथ शीतल यादव
- फोटो : संवाद
विस्तार
पंचकूला जिले में तैनात शिक्षिका की बेटी ने हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी का परचम लहराया है। बरवाला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बिल्ला में हिंदी अध्यापिका सुमरत देवी और चंडीगढ़ में सामाजिक विषय के अध्यापक हरिपाल यादव की बेटी शीतल यादव ने हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में 26वीं रैंक हासिल की है।
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उनकी इस उपलब्धि से पंचकूला और पैतृक गांव कोटिया में खुशी का माहौल है। 12 अक्टूबर को घोषित परिणाम में शीतल ने अपने माता-पिता, परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। परिजनों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की। शीतल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव गढ़वा के सरकारी विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद परिवार पंचकूला सेक्टर 20 में शिफ्ट हो गया।
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उन्होंने पंचकूला और चंडीगढ़ से उच्च शिक्षा हासिल की। पढ़ाई के दौरान वह हमेशा मेधावी छात्रा रहीं। इससे पहले वह संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में साक्षात्कार तक पहुंचकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुकी हैं। सुमरत देवी ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि शीतल के दादा स्वर्गीय दयाराम यादव बच्चों की शिक्षा को विशेष महत्व देते थे। वह अपनी पोती को खूब पढ़-लिखकर बड़ी अधिकारी बनने के लिए प्रेरित करते थे। 26वीं रैंक हासिल कर शीतल ने अपने दादा के सपने को साकार किया है।
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लक्ष्य के लिए स्ट्रीम बदली, यूनिवर्सिटी में सेकंड टॉपर
पंचकूला में 12वीं नॉन मेडिकल से पास करने के बाद शीतल ने यूपीएससी का लक्ष्य तय किया। लक्ष्य भेदने के लिए संकाय बदलना पड़ा। सेक्टर-36 के प्रतिष्ठित एमसीएम डीएवी कॉलेज में आर्ट्स स्ट्रीम में दाखिला लिया। ऑनर्स सब्जेक्ट में कड़ी मेहनत कर यूनिवर्सिटी लेवल पर सेकंड टॉपर रहीं। इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरी की।
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दो बार नेट क्लीयर, असिस्टेंट कमांडेंट के इंटरव्यू से पहले एचसीएस में चयन
शीतल ने सिविल सेवा के जज्बे को कभी कम नहीं होने दिया। पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान दो बार यूजीसी-नेट क्लीयर किया। सी-सर्टिफिकेट के साथ एनसीसी करने के बाद असिस्टेंट कमांडेंट की लिखित परीक्षा पास की और इंटरव्यू तक पहुंचीं। इंटरव्यू होना बाकी था कि हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम आ गया और 26वीं रैंक के साथ चयन हो गया।
शांत स्वभाव और समाज सेवा का लक्ष्य
परिजनों के अनुसार, शीतल शुरू से ही शांत स्वभाव की हैं। सिविल सेवा में जाने का मकसद बड़ा अधिकारी बनना ही नहीं, बल्कि समाज कल्याण से जुड़ा था। उन्होंने माता-पिता और छोटी बहन के साथ समाज को नई दिशा देने का प्रण लिया था। दादा स्व. दयाराम यादव बच्चों की शिक्षा को सबसे ज्यादा महत्व देते थे, उन्हीं के सपने को शीतल ने साकार किया।
शिक्षा विभाग ने जताई खुशी, बेटियों के लिए बनीं मिसाल
पंचकूला के बरवाला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बिल्ला में हिंदी अध्यापिका मां सुमरत देवी और चंडीगढ़ में तैनात पिता हरिपाल यादव की बेटी की सफलता पर शिक्षा विभाग और स्कूल स्टाफ ने खुशी जताई है। परिवार का कहना है कि शीतल की कामयाबी क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा है कि मेहनत और लगन से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
शीतल ने सिविल सेवा के जज्बे को कभी कम नहीं होने दिया। पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान दो बार यूजीसी-नेट क्लीयर किया। सी-सर्टिफिकेट के साथ एनसीसी करने के बाद असिस्टेंट कमांडेंट की लिखित परीक्षा पास की और इंटरव्यू तक पहुंचीं। इंटरव्यू होना बाकी था कि हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम आ गया और 26वीं रैंक के साथ चयन हो गया।
शांत स्वभाव और समाज सेवा का लक्ष्य
परिजनों के अनुसार, शीतल शुरू से ही शांत स्वभाव की हैं। सिविल सेवा में जाने का मकसद बड़ा अधिकारी बनना ही नहीं, बल्कि समाज कल्याण से जुड़ा था। उन्होंने माता-पिता और छोटी बहन के साथ समाज को नई दिशा देने का प्रण लिया था। दादा स्व. दयाराम यादव बच्चों की शिक्षा को सबसे ज्यादा महत्व देते थे, उन्हीं के सपने को शीतल ने साकार किया।
शिक्षा विभाग ने जताई खुशी, बेटियों के लिए बनीं मिसाल
पंचकूला के बरवाला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बिल्ला में हिंदी अध्यापिका मां सुमरत देवी और चंडीगढ़ में तैनात पिता हरिपाल यादव की बेटी की सफलता पर शिक्षा विभाग और स्कूल स्टाफ ने खुशी जताई है। परिवार का कहना है कि शीतल की कामयाबी क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा है कि मेहनत और लगन से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।