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सांपला में रैली से आंदोलन की शुरुआत के बाद अब मृतकों को श्रद्धांजलि देने खापों ने जुटाई भीड़
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 07 Mar 2016 01:47 AM IST
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जाट आरक्षण उपद्रव
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार के दिन ही 3 सप्ताह पहले सांपला में भीड़ जुटाने के बाद खापों ने एक बार फिर ताकत दिखाई। 14 फरवरी को सांपला में आंदोलन को लेकर मंथन को रैली बुलाई गई तो रविवार को आंदोलन में मारे गए युवाओं को श्रद्धांजलि देने के लिए भीड़ जुटी। बोहर गांव के नांदल भवन में जाट आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के बाद एक बार फिर कमान खाप चौधरियों के हाथों से निकल युवाओं के हाथ में आती दिखी।
हवन के बाद युवाओं ने खापों को पीछे कर एकसुर में कहा कि निर्दोष युवाओं को फंसाया जा रहा है। जाटों को आज ही हाथोंहाथ कोई ठोस फैसला लेना होगा। युवाओं की भीड़ ने शहर के जाट भवन की ओर कूच की बात कही तो हालात बिगड़ते देख खाप चौधरी एक बार फिर सामने आए। किसी तरह युवाओं को समझाकर उन्हें शांत किया गया। सभा में सांसद दीपेंद्र हुड्डा चंद मिनटों में ही लौट गए तो विधायक मनीष ग्रोवर को बिना श्रद्धांजलि दिए ही वापस लौटना पड़ा। सभा के दौरान दिन भर नांदल भवन की तरफ पहुंचने वाले मार्गों पर पुलिस के साथ-साथ फोर्स ने भी मोर्चा संभाले रखें।
इससे पहले, जाट आंदोलन के मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार को नांदल भवन में श्रद्धांजलि सभा रखी गई। खापों के नेतृत्व में सुबह 9 बजे हवन शुरू हुआ। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती चली गई। हरियाणा, दिल्ली और यूपी समेत कई राज्यों से खाप और जाट नेता सभा में पहुंचे। महिलाओं ने भी आहुति डाली। श्रद्धांजलि देने के बाद खाप चौधरी कार्यक्रम खत्म करना चाहते थे, लेकिन कुछ युवाओं ने विरोध किया। सांपला के बाद यहां पर भी युवाओं ने खापों को पीछे कर दिया। सभा के बाद नांदल भवन परिसर में हजारों की तादात में पहुंची भीड़ युवाओं को सुनने लगी। युवाओं ने कहा कि पुलिस-प्रशासन निर्दोष लोगों को फंसा रहा है।
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इस मामले में आज ही कोई ठोस फैसला लेना होगा। पुलिस-प्रशासन के खिलाफ उग्र हुए कुछ युवाओं ने आह्वान किया कि सभी शहर में जाट भवन में चलो। वहीं पर कोई फैसला लिया जाएगा। इस पर खाप प्रतिनिधियों के हाथ-पैर फूल गए। कुछ समय के लिए एक बार फिर से सांपला आंदोलन वाली स्थिति पैदा हो गई। युवाओं का नेतृत्व करने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा था। हालांकि बाद में खापों को ही आगे आना पड़ा और युवाओं को शांत किया।
हाथ जोड़कर शांति की अपील की गई। इसके बाद खाप चौधरियों ने मिलकर एक कमेटी का गठन किया, जो आगे की कार्रवाई पर कोई फैसला लेगी। पुलिस-प्रशासन भी मुस्तैद रहा। कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने वाले सभी मार्गों पर भारी पुलिस बल के साथ आरएएफ ने भी मोर्चा संभाले रखा।
विधायक नहीं दे सके श्रद्धांजलि
सभा के शुरू होते ही सांसद दीपेंद्र हुड्डा पहुंच गए। उस समय भीड़ कम थी। सांसद ने श्रद्धांजलि दी और चंद मिनट में लौट गए। दोपहर बाद भाजपा विधायक मनीष ग्रोवर भी पहुंचे, लेकिन उस समय भवन में कमेटी की बैठक चल रही थी। कुछ युवाओं ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। कुछ देर रुकने के बाद विधायक को बिना श्रद्धांजलि दिए ही लौटना पड़ा।
माइक का भी नहीं था बंदोबस्त
खाप चौधरियों को भी पता था कि यदि यहां पर कोई भाषण दिया गया तो माहौल खराब हो सकता है। इसलिए माइक का बंदोबस्त ही नहीं किया गया था। लेकिन युवाओं में गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने बिना माइक के ही अपने तर्क रखे। हालांकि शोक सभा के बाद हुई पंचायत को लंबा खींचता देख युवाओं ने खुद ही माइक का बंदोबस्त कर लिया। कुछ देर बाद ही खापों ने उन्हें शांत कर दिया।
सांपला में खाप के हाथ से निकल गई थी बात
जाट आरक्षण आंदोलन की चिंगारी भी रोहतक के सांपला से ही शुरू हुई थी। दरअसल 14 फरवरी को रोहतक, सोनीपत और झज्जर जिलों की खापों ने महापंचायत रखी थी। खापों ने आरक्षण आंदोलन के लिए मार्च के आखिर तक रुकने का ऐलान कर दिया, लेकिन युवाओं ने रैली को हाईजैक कर लिया। युवा बिना नेतृत्व के ही हाइवे पर आ गए थे और यहीं से प्रदेशभर में आंदोलन की चिंगारी फैली।
अगली पंचायत सहमति नहीं
सभा के बाद जब युवा भीड़ को संबोधित कर रहे थे तो उस समय यह बात सामने आई कि जल्दी ही अगली पंचायत रखी जाए। इस पर किसी ने 9 तो किसी ने 10 मार्च की बात रखी। दिनभर मंथन होता रहा कि अगली पंचायत होगी भी या नहीं। हालांकि खाप प्रतिनिधियों ने फिलहाल अगली पंचायत से साफ इंकार कर दिया है। जब भी अगली पंचायत का फैसला होगा, उसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। उधर, सर्वखाप पंचायत हरियाणा के प्रवक्ता जसबीर सिंह मलिक ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि 13 मार्च को सर्वखाप पंचायत की कोर कमेटी की बैठक रखी गई है। हालांकि इसके लिए अभी कोई स्थान निर्धारित नहीं किया गया है।
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हवन के बाद युवाओं ने खापों को पीछे कर एकसुर में कहा कि निर्दोष युवाओं को फंसाया जा रहा है। जाटों को आज ही हाथोंहाथ कोई ठोस फैसला लेना होगा। युवाओं की भीड़ ने शहर के जाट भवन की ओर कूच की बात कही तो हालात बिगड़ते देख खाप चौधरी एक बार फिर सामने आए। किसी तरह युवाओं को समझाकर उन्हें शांत किया गया। सभा में सांसद दीपेंद्र हुड्डा चंद मिनटों में ही लौट गए तो विधायक मनीष ग्रोवर को बिना श्रद्धांजलि दिए ही वापस लौटना पड़ा। सभा के दौरान दिन भर नांदल भवन की तरफ पहुंचने वाले मार्गों पर पुलिस के साथ-साथ फोर्स ने भी मोर्चा संभाले रखें।
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इससे पहले, जाट आंदोलन के मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार को नांदल भवन में श्रद्धांजलि सभा रखी गई। खापों के नेतृत्व में सुबह 9 बजे हवन शुरू हुआ। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती चली गई। हरियाणा, दिल्ली और यूपी समेत कई राज्यों से खाप और जाट नेता सभा में पहुंचे। महिलाओं ने भी आहुति डाली। श्रद्धांजलि देने के बाद खाप चौधरी कार्यक्रम खत्म करना चाहते थे, लेकिन कुछ युवाओं ने विरोध किया। सांपला के बाद यहां पर भी युवाओं ने खापों को पीछे कर दिया। सभा के बाद नांदल भवन परिसर में हजारों की तादात में पहुंची भीड़ युवाओं को सुनने लगी। युवाओं ने कहा कि पुलिस-प्रशासन निर्दोष लोगों को फंसा रहा है।
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इस मामले में आज ही कोई ठोस फैसला लेना होगा। पुलिस-प्रशासन के खिलाफ उग्र हुए कुछ युवाओं ने आह्वान किया कि सभी शहर में जाट भवन में चलो। वहीं पर कोई फैसला लिया जाएगा। इस पर खाप प्रतिनिधियों के हाथ-पैर फूल गए। कुछ समय के लिए एक बार फिर से सांपला आंदोलन वाली स्थिति पैदा हो गई। युवाओं का नेतृत्व करने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा था। हालांकि बाद में खापों को ही आगे आना पड़ा और युवाओं को शांत किया।
हाथ जोड़कर शांति की अपील की गई। इसके बाद खाप चौधरियों ने मिलकर एक कमेटी का गठन किया, जो आगे की कार्रवाई पर कोई फैसला लेगी। पुलिस-प्रशासन भी मुस्तैद रहा। कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने वाले सभी मार्गों पर भारी पुलिस बल के साथ आरएएफ ने भी मोर्चा संभाले रखा।
विधायक नहीं दे सके श्रद्धांजलि
सभा के शुरू होते ही सांसद दीपेंद्र हुड्डा पहुंच गए। उस समय भीड़ कम थी। सांसद ने श्रद्धांजलि दी और चंद मिनट में लौट गए। दोपहर बाद भाजपा विधायक मनीष ग्रोवर भी पहुंचे, लेकिन उस समय भवन में कमेटी की बैठक चल रही थी। कुछ युवाओं ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। कुछ देर रुकने के बाद विधायक को बिना श्रद्धांजलि दिए ही लौटना पड़ा।
माइक का भी नहीं था बंदोबस्त
खाप चौधरियों को भी पता था कि यदि यहां पर कोई भाषण दिया गया तो माहौल खराब हो सकता है। इसलिए माइक का बंदोबस्त ही नहीं किया गया था। लेकिन युवाओं में गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने बिना माइक के ही अपने तर्क रखे। हालांकि शोक सभा के बाद हुई पंचायत को लंबा खींचता देख युवाओं ने खुद ही माइक का बंदोबस्त कर लिया। कुछ देर बाद ही खापों ने उन्हें शांत कर दिया।
सांपला में खाप के हाथ से निकल गई थी बात
जाट आरक्षण आंदोलन की चिंगारी भी रोहतक के सांपला से ही शुरू हुई थी। दरअसल 14 फरवरी को रोहतक, सोनीपत और झज्जर जिलों की खापों ने महापंचायत रखी थी। खापों ने आरक्षण आंदोलन के लिए मार्च के आखिर तक रुकने का ऐलान कर दिया, लेकिन युवाओं ने रैली को हाईजैक कर लिया। युवा बिना नेतृत्व के ही हाइवे पर आ गए थे और यहीं से प्रदेशभर में आंदोलन की चिंगारी फैली।
अगली पंचायत सहमति नहीं
सभा के बाद जब युवा भीड़ को संबोधित कर रहे थे तो उस समय यह बात सामने आई कि जल्दी ही अगली पंचायत रखी जाए। इस पर किसी ने 9 तो किसी ने 10 मार्च की बात रखी। दिनभर मंथन होता रहा कि अगली पंचायत होगी भी या नहीं। हालांकि खाप प्रतिनिधियों ने फिलहाल अगली पंचायत से साफ इंकार कर दिया है। जब भी अगली पंचायत का फैसला होगा, उसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। उधर, सर्वखाप पंचायत हरियाणा के प्रवक्ता जसबीर सिंह मलिक ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि 13 मार्च को सर्वखाप पंचायत की कोर कमेटी की बैठक रखी गई है। हालांकि इसके लिए अभी कोई स्थान निर्धारित नहीं किया गया है।