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जिसे देखकर सीखे गुर, उसी को हरा पकड़ी ओलंपिक की राह
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 08 Mar 2016 02:08 AM IST
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साक्षी मलिक
- फोटो : अमर उजाला
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देश के सिरमौर पहलवान को जब लगातार बड़ी कुश्ती में एक ही पहलवान से पटखनी मिलती है तो उसकी चिंता बढ़ना लाजमी है। यह चिंता तब ज्यादा बढ़ जाती है जब खुद से पांच साल जूनियर पहलवान ओलंपिक की राह में रोड़ा बन जाए। ऐसी ही स्थिति आजकल देश की दिग्गज पहलवान गीता फौगाट के सामने है।
गीता को हराने वाली साक्षी मलिक ने कभी उसे ही देखकर कुश्ती के गुर सीखे। आज वही उसकी ओलंपिक की राह में रोड़ा बनकर खड़ी है। साक्षी ने जिस तरह का खेल दिखाते हुए एशियन ओलंपिक गेम्स क्वालीफाई में जगह बनाई है। उससे साक्षी और उनके कोच दोनों ही ओलंपिक टिकट पक्का मान रहे हैं।
रोहतक के छोटे से गांव मोखरा की रहने वाली साक्षी मलिक ने पांच साल पहले कुश्ती के गुर सीखने शुरू किए थे। उस समय पड़ोसी जिले भिवानी की गीता फौगाट कुश्ती में काफी नाम कमा चुकी थी। साक्षी ने भी कई बार गीता को खेलते हुए देखा, उससे कुश्ती के गुर सीखे। जब भी किसी कैंप में गीता से साक्षी की मुलाकात होती वह गीता से कुश्ती के टिप्स लिया करती। लेकिन उस समय गीता ने सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उनको इसी साक्षी के सामने अखाड़े में उतरना पड़ेगा।
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वह भी बड़े मुकाबले में और उनमें उलटफेर भी बड़ा ही होगा। पहला उलटफेर 10 दिसंबर 2015 को हुआ, जब प्रो-रेसलिंग के पहले ही मैच में साक्षी ने गीता को पटखनी दी। जबकि दूसरा उलटफेर 5 मार्च 2016 को हुआ, जब ओलंपिक गेम्स क्वालीफाई के लिए हुए ट्रायल में साक्षी ने गीता को चित कर दिया। इस तरह गीता फौगाट की ओलंपिक की राह में साक्षी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी बनकर खड़ी हो गई है, क्योंकि दोनों ही 58 किलो भारवर्ग में खेलती हैं।
प्रशिक्षकों की मानें तो साक्षी एक कदम आगे बढ़ चुकी है। गीता फौगाट के लिए पहले कोई चुनौती नहीं थी क्योंकि साक्षी मलिक ने 2015 में दोहा में हुई सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में 60 किलो में खेलते हुए कांस्य पदक जीता था। इसके बाद साक्षी ने अपने पुराने 58 किलो भार वर्ग में खेलने का फैसला लिया। इसके लिए उसने अपना वजन भी कम किया और गीता के भार वर्ग में खेलने लगी।
साक्षी का यह फैसला गीता के लिए बड़ी परेशानी बन रहा है, क्योंकि साक्षी मलिक को पूरा विश्वास है कि वह पहली बार में ओलंपिक क्वालीफाई कर जाएगी। इसके लिए वह पूरा दिन पसीना बहा रही है, जिससे उसका ओलंपिक खेलकर देश को मेडल दिलाने का सपना पूरा हो सके। कोच ईश्वर दहिया भी साक्षी पर पूरा विश्वास जता रहे हैं। वे कहते हैं कि साक्षी ओलंपिक क्वालीफाई कर जाएगी, क्योंकि इस समय वह बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
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गीता को हराने वाली साक्षी मलिक ने कभी उसे ही देखकर कुश्ती के गुर सीखे। आज वही उसकी ओलंपिक की राह में रोड़ा बनकर खड़ी है। साक्षी ने जिस तरह का खेल दिखाते हुए एशियन ओलंपिक गेम्स क्वालीफाई में जगह बनाई है। उससे साक्षी और उनके कोच दोनों ही ओलंपिक टिकट पक्का मान रहे हैं।
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रोहतक के छोटे से गांव मोखरा की रहने वाली साक्षी मलिक ने पांच साल पहले कुश्ती के गुर सीखने शुरू किए थे। उस समय पड़ोसी जिले भिवानी की गीता फौगाट कुश्ती में काफी नाम कमा चुकी थी। साक्षी ने भी कई बार गीता को खेलते हुए देखा, उससे कुश्ती के गुर सीखे। जब भी किसी कैंप में गीता से साक्षी की मुलाकात होती वह गीता से कुश्ती के टिप्स लिया करती। लेकिन उस समय गीता ने सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उनको इसी साक्षी के सामने अखाड़े में उतरना पड़ेगा।
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वह भी बड़े मुकाबले में और उनमें उलटफेर भी बड़ा ही होगा। पहला उलटफेर 10 दिसंबर 2015 को हुआ, जब प्रो-रेसलिंग के पहले ही मैच में साक्षी ने गीता को पटखनी दी। जबकि दूसरा उलटफेर 5 मार्च 2016 को हुआ, जब ओलंपिक गेम्स क्वालीफाई के लिए हुए ट्रायल में साक्षी ने गीता को चित कर दिया। इस तरह गीता फौगाट की ओलंपिक की राह में साक्षी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी बनकर खड़ी हो गई है, क्योंकि दोनों ही 58 किलो भारवर्ग में खेलती हैं।
प्रशिक्षकों की मानें तो साक्षी एक कदम आगे बढ़ चुकी है। गीता फौगाट के लिए पहले कोई चुनौती नहीं थी क्योंकि साक्षी मलिक ने 2015 में दोहा में हुई सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में 60 किलो में खेलते हुए कांस्य पदक जीता था। इसके बाद साक्षी ने अपने पुराने 58 किलो भार वर्ग में खेलने का फैसला लिया। इसके लिए उसने अपना वजन भी कम किया और गीता के भार वर्ग में खेलने लगी।
साक्षी का यह फैसला गीता के लिए बड़ी परेशानी बन रहा है, क्योंकि साक्षी मलिक को पूरा विश्वास है कि वह पहली बार में ओलंपिक क्वालीफाई कर जाएगी। इसके लिए वह पूरा दिन पसीना बहा रही है, जिससे उसका ओलंपिक खेलकर देश को मेडल दिलाने का सपना पूरा हो सके। कोच ईश्वर दहिया भी साक्षी पर पूरा विश्वास जता रहे हैं। वे कहते हैं कि साक्षी ओलंपिक क्वालीफाई कर जाएगी, क्योंकि इस समय वह बेहतर प्रदर्शन कर रही है।