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रिश्तों को मजबूत करने के लिए मकर संक्रांति पर बड़े-बुजुर्गो का सम्मान करती हैं महिलाएं
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रेवाड़ी। ज्योतिष के अनुसार सौरमंडल के सर्वोच्च ग्रह सूर्य मकर संक्रांति के दिन राशि परिवर्तन करते हैं, जिसका बुरा और अच्छा प्रभाव सभी राशियों के मनुष्यों पर पड़ता है। उस दिन दक्षिण हरियाणा में एक पर्व भी खास तौर पर मनाया जाता है और लोक परम्पराओं का निर्वहन किया जाता है। चूंकि इस दिन दान देने और श्रीगंगा स्नान का अपना महत्व होता है और इसके साथ अपनी सामर्थ्य अनुसार दान देने की परम्परा भी कई दशकों से चली आ रही है और इसी को दक्षिण हरियाणा के लोग निभाते आ रहे हैं। इस दिन रिश्तों को मजबूत करने के लिए मकर संक्रांति पर बड़े-बुजुर्गो का सम्मान करती हैं महिलाएं और सम्मान स्वरूप गर्म चादर, मिष्ठान महिला बुजुर्ग को सूट, साड़ी या गर्म शॉल ओढ़ाकर आशीर्वाद लेती हैं।
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अहम बात यह है कि इस पर्व पर ग्रामीण महिलाएं अपने उन वरिष्ठ बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के साथ ही उनके साथ अपने पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने की कड़ी में उनका सम्मान करती हैं। इस सम्मान में बुजुर्ग पुरुष को सम्मान स्वरूप गर्म चादर और मिष्ठान भेंट करती हैं जबकि महिला बुजुर्ग को सूट, साड़ी या गर्म शॉल ओढ़ाकर उनका पांव छूकर आशीर्वाद लेती हैं। ऐसा उन लोक मान्यताओं का पालन करते हुए बीते कई दशकों से किया जा रहा है, जिनके अनुसार मकर संक्रांति के दिन दान देने और चलते पानी में स्नान करने का भारी पुण्य मिलने और ऐसा करने वाले को धन-धान्य और पारिवारिक समृद्घि की प्राप्ति होती है।
सामान्य तौर पर ऐसी लोक मान्यताओं का आधार किदवंतियां होती हैं, लेकिन ग्रामीणों से बातचीत के बाद इस लोक पर्व के पीछे कोई किदवंती की बात सामने नहीं लेकिन यह सभी ने माना कि यह पर्व लोक परम्पराओं को आगे बढ़ाने के साथ ही समाज में आपसी मानवीय रिश्तों को मजबूत करने में अहम कड़ी की भूमिका निभा रहा है। वस्तुतः सूर्यदेव के राशि परिवर्तन से सभी राशियों के नाम वाले मनुष्यों के भाग्य पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।
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छोटी बहू अपने सास-ससुर को, रिश्तेदारी में कोई बहन अपनी बहन-बहनाई, भांजे की बहू अपने पति के मामा को बड़ा बुजुर्ग मानकर इस लोक पर्व का निर्वहन करती आ रही है। अहम बात यह है कि केवल महिलाओं की ओर से ही इस पर्व को मानने की परम्परा है, पुरूष समाज की ओर से इस पर्व के आयोजन में अपनी किसी महिला परिजन माता, पत्नी, बहन को पूर्ण व सकारात्मक सहयोग दिया जाता है। इस पर्व पर महिला अपने बुजुर्ग रिश्तेदार के घर पर जाकर उनको जगाने का काम करती है, जिसके दौरान रात को वह उस घर में ठहरती और उसके साथ आए परिजन भी उस दिन उसी जगह ठहरते हैं। दूसरे दिन सुबह नहा धोकर खाना खिलाकर सभी लोगों को यथा सामर्थ्य उपहार, जिनमें कपड़े, खाद्य सामग्री आदि देकर विदा किया जाता है।
इसके साथ ही सम्पूर्ण हरियाणा में मायके की ओर से मकर संक्रांति पर्व पर विशेष रूप से सकरात भेजने का रिवाज चला आ रहा है, जिसमें देशी घी, गोंद के लडडू, फल, मूंगफली, गज्जक, रेवड़ी, तिल, चावल, गुड़ आदि भेंट स्वरूप दिया जाता है। इसके एवज में बहन की ओर से भाई या मायके को अपनी ओर से कुछ भेंट देने का रिवाज चला आ रहा है। खास यह है कि इस पर्व में बहन का सगा भाई, चचेरा भाई, सकरांत देने के लिए आता है मगर उस पर रात्रि ठहराव की बाध्यता नहीं होती जबकि जागो या जाग पर्व में अपनी रिश्तेदारी या दूर के रिश्तेदार को जगाने आए लोग उस दिन शाम होने के बाद रात को उसी घर में रात्रि प्रवास करते हैं।
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