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बागवानी से मोहनपुरा के सतपाल कर रहे लाखों की कमाई
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बागवानी से किसान कमा रहे हैं लाखों
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रेवाड़ी। बुलंद हौसले और कड़ी मेहनत के दम पर जिले के गांव मोहनपुरा निवासी सतपाल अच्छी कमाई कर रहे हैं। इन दिनों वह क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन कर उभरे हैं। सतपाल की मेहनत का ही परिणाम है कि वह अपने पैतृक गांव में बेर, अमरूद व नींबू का उत्पादन कर लाखों रुपये कमा रहे हैं।
किसान सतपाल ने बताया कि पारंपरिक खेती में पूरा परिवार मेहनत करके भी खेत से साल भर में 40 हजार रुपये भी प्रति एकड़ नहीं बचा पाता था। जो बचत होती, वो साथ-साथ अगली फसल की बिजाई में खर्च हो जाती। जोखिम भी ज्यादा रहता। कभी बारिश कम हुई, तो कभी ज्यादा जिससे फसल के उत्पादन पर प्रभाव पड़ता। पारंपरिक खेती की तुलना में बाग में मेहनत कम है और बचत ढ़ाई गुना ज्यादा। एक एकड़ में लगभग सालाना एक लाख कमाई हो रही है। उन्होंने चार एकड़ में नींबू के पेड़ लगा रखे हैं। इन पेड़ों को पनपाने पर शुरूआत में लागत करीब दो लाख रुपए आई। इसके बाद साल भर में और थोड़ा बहुत खर्च हो जाता है, लेकिन कुल मिलाकर यह बागवानी मुनाफे का सौदा बनी हुई है। बागवानी में उन्होंने न तो सरकार और न ही किसी अन्य व्यक्ति या संगठन से आर्थिक मदद ली है।
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20 साल से लगा रखी बागवानी
सतपाल ने बताया कि वे पिछले 20 साल से नींबू के पेड़ लगा रखे हैं। नींबू से वह सालाना एक लाख से अधिक कमा रहे हैं। बागवानी की खेती में मुनाफा होने के बाद उन्होंने बागवानी खेती का विस्तार किया। उन्होंने 8 एकड़ में नींबू के अलावा व अमरूद व बेर के भी पेड़ लगा दिए। अमरूद व बेर के पौधे लगाए हुए चार साल से अधिक समय हो गये हैं। इस बार अमरूद व बेर लगने शुरू हो गए हैं। किसान सतपाल बागवानी के साथ अन्य फसलों की खेेती भी कर रहे हैं।
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खुद तैयार करते है पौध
बकौल सतपाल, वह नींबू, अमरूद व बेर की खुद पौध तैयार करके अपने बाग में लगाते हैं। किसी अन्य किसान की डिमांड मिलने पर उन्हें पौध भी उपलब्ध कराते हैं। पूरी तरह से जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं। अपने खेत में केचुआ प्लांट भी लगाया हुआ है। समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेते हैं। कृषि वैज्ञानिक द्वारा समय-समय किसानों की मिट्टी की जांच भी कराई जाती है।
करीब 4 वर्ष में तैयार हो रहा बगीचा
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनिल ने बताया कि बागवानी में एक बार मेहनत करने के बाद उससे स्थायी रूप से लाभ प्राप्त हो रहा है। इसमें खेती के साथ-साथ पशुपालन भी किया जा सकता है। कृषि विभाग की मानें तो बागवानी में लाभ देख इस बार किसानों की रूचि काफी बढ़ी है। फलों के पौधे लगाने के साथ ही अन्तराशस्य पद्धति से पौधे के बीच में रही जगह में छोटी फसल व सब्जियों की भी खेती कर सकते हैं जिससे एक पंथ दो काज और कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त होता है।
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