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कुंआ खोदा तो निकले पत्थर, हजारों लोग पानी को तरसे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 May 2016 01:03 AM IST
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प्यास बुझाने के लिए पानी लेकर आती युवती।
- फोटो : अमर उजाला
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पंचकूला के गांव खड़क मंगोली में चारों ओर गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं। पानी की तलाश में खोदे जाने वाले इन गड्ढों से पानी तो निकला नहीं, लेकिन पानी की जगह पत्थर जरूर मिलते हैं। कोई घर ऐसा नहीं है जिसके सामने कुआं और पत्थरों का ढेर नजर न आए।
20 से 40 फुट का गड्ढा खोदने के बाद भी लोगों की प्यास नहीं बुझ पा रही है। गांव में पानी की तलाश में ग्रामीणों ने सौ से ज्यादा गड्ढे खोद डाले, लेकिन पानी नहीं मिला। गांव वालों ने डीसी गरिमा मित्तल से सवाल किया है कि वह खुद ही बताएं कि उनकी प्यास कैसे बुझेगी। इस समस्या के लिए प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं। क्या वह प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकते रहेंगे।
प्रशासनिक भवन से चंद कदमों की दूरी पर है गांव
यह गांव ठीक उस जगह है, जिससे चंद कदमों की दूरी पर जिला प्रशासन के आला अफसर बैठते हैं। लेकिन अब तक इस ओर जिला प्रशासन के किसी अधिकारी की नजर नहीं पड़ी। अमर उजाला टीम जब इस गांव में पहुंची तो गांव वाले इकट्ठे हो गए। वह टीम के पीछे-पीछे चल पड़े। उनकी आंखों में उम्मीद की रोशनी थी। उन्हें लगा शायद अधिकारियों की टीम पानी के लिए कुछ करने आई है। हर ओर से यही आवाज आ रही थी कि पानी की सप्लाई बहाल करवाएं। गांव वालों का कहना है कि यहां नेता जी लोग भी आए और अधिकारी भी, लेकिन पानी की समस्या हल किसी ने नहीं करवाई। गौरतलब है कि इस गांव में पांच हजार परिवार रहते हैं। जिनको रोजाना रेहड़ी पर लादकर पानी लाना होता है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि उनको स्नान करने और कपड़े धोने के लिए घग्गर तक जाना होता है।
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हमको या तो पानी दे दो या जहर। हमें समझ नहीं आता है कि सिर्फ चंद कदमों की दूरी पर जिला सचिवालय है, फिर भी हमारी आवाज उन तक नहीं पहुंचती है।
- सुनील मित्तल, निवासी
हम जिस पर विश्वास करते हैं वही धोखा दे जाता है। पांच साल से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। सब आते हैं और ज्ञान बांट कर चलते बनते हैं। करना-धरना किसी के बस की बात नहीं। हमने यह समस्या हरेक के सामने रखी लेकिन पानी गांव में नहीं आया।
- अनिल मित्तल, निवासी
मैं बीस साल से यहां रहती हूं। पिछले पांच साल से हालात बिगड़ चुके हैं। गांव में पानी की सप्लाई तक ठीक नहीं है। घरवाले सुबह चले जाते हैं और मैं बच्चों के साथ रह जाती हूं, पानी के लिए हमको दूर दूर तक जाना होता है। प्रशासन हमको पानी तो उपलब्ध करवाए।
- नजमा, निवासी
घर में कई बार पानी न होने के कारण खाना तक नहीं बन पाता है। हमारे घर कोई आने के लिए कहता है तो भी हम उसको मना कर देते हैं। क्या करें, पिलाने के लिए साफ पानी नहीं होता है।
- कलावती, निवासी
मैं भी गांव में बीस साल से रहती हूं। सुबह जब बच्चे रेहड़ी पर पानी लेकर आते हैं तब जाकर खाना बनता है। रोजाना का यही हाल है। हमको लगता है जैसे कि हम रेगिस्तान में रहते हैं।
- हेमलता, निवासी
मैंने पानी के लिए कुआं खुदवाया, लेकिन पानी नहीं आया, घर का धन भी कुआं खुदवाने में लग गया। प्रशासन जल्द से जल्द हमारी समस्या का निदान करवाए।
पवन कौर निवासी
कोट्स
हमने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को भी ज्ञापन सौंपा है लेकिन उसका नतीजा कुछ नहीं निकला। अब हम प्रदर्शन करेंगे तब शायद कुछ हल निकल सके।
दीपक, प्रधान खड़क मंगोली
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20 से 40 फुट का गड्ढा खोदने के बाद भी लोगों की प्यास नहीं बुझ पा रही है। गांव में पानी की तलाश में ग्रामीणों ने सौ से ज्यादा गड्ढे खोद डाले, लेकिन पानी नहीं मिला। गांव वालों ने डीसी गरिमा मित्तल से सवाल किया है कि वह खुद ही बताएं कि उनकी प्यास कैसे बुझेगी। इस समस्या के लिए प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं। क्या वह प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकते रहेंगे।
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प्रशासनिक भवन से चंद कदमों की दूरी पर है गांव
यह गांव ठीक उस जगह है, जिससे चंद कदमों की दूरी पर जिला प्रशासन के आला अफसर बैठते हैं। लेकिन अब तक इस ओर जिला प्रशासन के किसी अधिकारी की नजर नहीं पड़ी। अमर उजाला टीम जब इस गांव में पहुंची तो गांव वाले इकट्ठे हो गए। वह टीम के पीछे-पीछे चल पड़े। उनकी आंखों में उम्मीद की रोशनी थी। उन्हें लगा शायद अधिकारियों की टीम पानी के लिए कुछ करने आई है। हर ओर से यही आवाज आ रही थी कि पानी की सप्लाई बहाल करवाएं। गांव वालों का कहना है कि यहां नेता जी लोग भी आए और अधिकारी भी, लेकिन पानी की समस्या हल किसी ने नहीं करवाई। गौरतलब है कि इस गांव में पांच हजार परिवार रहते हैं। जिनको रोजाना रेहड़ी पर लादकर पानी लाना होता है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि उनको स्नान करने और कपड़े धोने के लिए घग्गर तक जाना होता है।
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हमको या तो पानी दे दो या जहर। हमें समझ नहीं आता है कि सिर्फ चंद कदमों की दूरी पर जिला सचिवालय है, फिर भी हमारी आवाज उन तक नहीं पहुंचती है।
- सुनील मित्तल, निवासी
हम जिस पर विश्वास करते हैं वही धोखा दे जाता है। पांच साल से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। सब आते हैं और ज्ञान बांट कर चलते बनते हैं। करना-धरना किसी के बस की बात नहीं। हमने यह समस्या हरेक के सामने रखी लेकिन पानी गांव में नहीं आया।
- अनिल मित्तल, निवासी
मैं बीस साल से यहां रहती हूं। पिछले पांच साल से हालात बिगड़ चुके हैं। गांव में पानी की सप्लाई तक ठीक नहीं है। घरवाले सुबह चले जाते हैं और मैं बच्चों के साथ रह जाती हूं, पानी के लिए हमको दूर दूर तक जाना होता है। प्रशासन हमको पानी तो उपलब्ध करवाए।
- नजमा, निवासी
घर में कई बार पानी न होने के कारण खाना तक नहीं बन पाता है। हमारे घर कोई आने के लिए कहता है तो भी हम उसको मना कर देते हैं। क्या करें, पिलाने के लिए साफ पानी नहीं होता है।
- कलावती, निवासी
मैं भी गांव में बीस साल से रहती हूं। सुबह जब बच्चे रेहड़ी पर पानी लेकर आते हैं तब जाकर खाना बनता है। रोजाना का यही हाल है। हमको लगता है जैसे कि हम रेगिस्तान में रहते हैं।
- हेमलता, निवासी
मैंने पानी के लिए कुआं खुदवाया, लेकिन पानी नहीं आया, घर का धन भी कुआं खुदवाने में लग गया। प्रशासन जल्द से जल्द हमारी समस्या का निदान करवाए।
पवन कौर निवासी
कोट्स
हमने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को भी ज्ञापन सौंपा है लेकिन उसका नतीजा कुछ नहीं निकला। अब हम प्रदर्शन करेंगे तब शायद कुछ हल निकल सके।
दीपक, प्रधान खड़क मंगोली