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डीपी वत्स बोले- वोट बैंक की राजनीति छोड़कर पंजाब-हरियाणा के राजनीतिक दल देशहित में सोचें
Wed, 21 Aug 2019 01:35 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Aug 2019 01:35 PM IST
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राज्यसभा सांसद जनरल डीपी वत्स
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उत्तर भारत में आई बाढ़ पर राज्यसभा सांसद व पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स ने बड़ा बयान दिया है। एसवाईएल के मामले में उन्होंने कहा कि हरियाणा हमेशा पंजाब का छोटा भाई रहा है। ऐसे में उनकी समस्या और हमारी समस्या को यदि बैठकर व आपसी परस्पर समझ के साथ सुलझाया जाए तो हल निकल सकता सतलुज यमुना लिंक नहर का मुद्दा इतने सालों से कोर्ट में लटका हुआ है। बेहतर होता यदि इस मामले में दोनों राज्य फ्लड चैनल्स का निर्माण करते। वह मंगलवार को निजी कार्य के लिए शहर में पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि इन फ्लड चैनल्स की सहायता से राष्ट्रीय आपदा के दौरान सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का अतिरिक्त पानी भेजा जा सकता है। ऐसे में वर्तमान में आई आपदा से छुटकारा पाया जा सकता है।खाप पंचायतों की मदद से यह मामले आपसी भाईचारे से ही सुलझाए जा सकते हैं। कोर्ट का फैसला जरूर आ जाता है, लेकिन कोर्ट के फैसले को अमल में लाने के लिए आपसी भाईचारे से ही काम करना पड़ता है। एसवाईएल मामले में वोट बैंक की राजनीति छोड़कर सभी राजनैतिक दलों को राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में सोचना चाहिए। 15 अगस्त को ही दिल्ली के लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाटर मैनेजमेंट को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही है।
80 फीसदी नदियों के जरिए समुद्र में बह जाता है पानी
राज्यसभा सांसद ने कहा कि देश में बार-बार इलेक्शन की बजाय काम्प्रिहेंसिव वाटर मैनेजमेंट की ज्यादा जरूरत है। इसके तहत नदियों को इंटर लिंक किया जाना चाहिए। क्योंकि यह देश बहुत बड़ा है और इसमें कहीं सूखा, कहीं बाढ़ जैसी परिस्थिति बनती ही रहती है। इसी तरह देश में ग्राउंड वाटर रिचार्ज की भी बहुत जरूरत है। क्योंकि बारिश का 80 फीसदी पानी तो नदियों के रास्ते समुद्र में ही बह जाता है। जबकि केवल 20 फीसदी पानी ही इस्तेमाल में होता है। इस पर भी राज्य आपस में लड़ते रहते हैं।
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लिंक नहर बन जाती तो पंजाब में नहीं आती बाढ़
उदाहरण देते हुए जनरल डीपी वत्स ने कहा कि सतलुज-यमुना लिंक नहर अगर बन जाती तो पंजाब को बाढ़ की परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ता। वहीं, दक्षिण हरियाणा में भी सूखे की मार नहीं पड़ती। साथ ही साथ ग्राउंड वाटर भी रिचार्ज हो जाता। जिस तरह से हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों में बारिश हो रही है उसका सारा पानी बांधों में आकर भर गया है। उस पानी को अब बांधों से नहरों और नदियों में छोड़ा जा रहा है, जिसके चलते यह बाढ़ की परिस्थिति उत्पन्न हुई है और इतने पानी को संभालने की क्षमता न पंजाब में है और न ही पाकिस्तान में। ऐसे में बारिश का यह सारा पानी बहकर अरब सागर में चला जाएगा। एसवाईएल के निर्माण के साथ ही दक्षिणी हरियाणा के कई जिलों की सूखे की समस्या को सुधारा जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि इन फ्लड चैनल्स की सहायता से राष्ट्रीय आपदा के दौरान सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का अतिरिक्त पानी भेजा जा सकता है। ऐसे में वर्तमान में आई आपदा से छुटकारा पाया जा सकता है।खाप पंचायतों की मदद से यह मामले आपसी भाईचारे से ही सुलझाए जा सकते हैं। कोर्ट का फैसला जरूर आ जाता है, लेकिन कोर्ट के फैसले को अमल में लाने के लिए आपसी भाईचारे से ही काम करना पड़ता है। एसवाईएल मामले में वोट बैंक की राजनीति छोड़कर सभी राजनैतिक दलों को राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में सोचना चाहिए। 15 अगस्त को ही दिल्ली के लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाटर मैनेजमेंट को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही है।
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80 फीसदी नदियों के जरिए समुद्र में बह जाता है पानी
राज्यसभा सांसद ने कहा कि देश में बार-बार इलेक्शन की बजाय काम्प्रिहेंसिव वाटर मैनेजमेंट की ज्यादा जरूरत है। इसके तहत नदियों को इंटर लिंक किया जाना चाहिए। क्योंकि यह देश बहुत बड़ा है और इसमें कहीं सूखा, कहीं बाढ़ जैसी परिस्थिति बनती ही रहती है। इसी तरह देश में ग्राउंड वाटर रिचार्ज की भी बहुत जरूरत है। क्योंकि बारिश का 80 फीसदी पानी तो नदियों के रास्ते समुद्र में ही बह जाता है। जबकि केवल 20 फीसदी पानी ही इस्तेमाल में होता है। इस पर भी राज्य आपस में लड़ते रहते हैं।
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लिंक नहर बन जाती तो पंजाब में नहीं आती बाढ़
उदाहरण देते हुए जनरल डीपी वत्स ने कहा कि सतलुज-यमुना लिंक नहर अगर बन जाती तो पंजाब को बाढ़ की परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ता। वहीं, दक्षिण हरियाणा में भी सूखे की मार नहीं पड़ती। साथ ही साथ ग्राउंड वाटर भी रिचार्ज हो जाता। जिस तरह से हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों में बारिश हो रही है उसका सारा पानी बांधों में आकर भर गया है। उस पानी को अब बांधों से नहरों और नदियों में छोड़ा जा रहा है, जिसके चलते यह बाढ़ की परिस्थिति उत्पन्न हुई है और इतने पानी को संभालने की क्षमता न पंजाब में है और न ही पाकिस्तान में। ऐसे में बारिश का यह सारा पानी बहकर अरब सागर में चला जाएगा। एसवाईएल के निर्माण के साथ ही दक्षिणी हरियाणा के कई जिलों की सूखे की समस्या को सुधारा जा सकता है।