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Panchkula News: सिविल अस्पताल में स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक बंद, खिलाड़ी बाहर इलाज कराने को मजबूर
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पीजीआई से डॉक्टर नहीं आने से सुविधा ठप, प्राइवेट अस्पताल में खर्च पड़ रहा भारी
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर के सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में पिछले साल शुरू किया गया स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक बंद हो गया है। पीजीआई चंडीगढ़ से आने वाले डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण अब खिलाड़ी चोट लगने पर या तो बाहर के प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे हैं या सरकारी अस्पताल में सीमित सुविधा का सहारा ले रहे हैं।
मार्च 2025 में शुरू किए गए इस क्लीनिक में पीजीआई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हिमांशु भायना खिलाड़ी मरीजों का इलाज करते थे। क्लीनिक में घुटने, एड़ी, कोहनी और हाथ की चोट के ऑपरेशन के साथ फिजियोथेरेपी की सुविधा मिलती थी। यह क्लीनिक हर मंगलवार चलता था। जुलाई 2025 तक 300 मरीजों का इलाज किया गया और 5 ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
हालांकि अब डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण क्लीनिक बंद हो गया है जिससे खिलाड़ियों को गंभीर चोट होने पर पीजीआई या प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ता है और उनका खर्च 50 हजार से 1 लाख रुपये तक बढ़ जाता है। सरकारी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारक खिलाड़ी इलाज या ऑपरेशन के लिए मुफ्त या 30 हजार रुपये तक खर्च करते हैं जबकि प्राइवेट में यही इलाज 1 से 1.5 लाख रुपये में होता है।कोट
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अस्पताल में स्पोर्ट्स इंजरी का क्लीनिक शुरू किया गया था। इसे डॉक्टर नहीं होने के कारण बंद किया गया है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन के पास हड्डी के डॉक्टर हैं। ऑपरेशन के लिए आने वाले खिलाड़ी को वापस नहीं भेजा गया है।
-आरएस चौहान, पीएमओ, सिविल अस्पताल सेक्टर-6
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर के सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में पिछले साल शुरू किया गया स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक बंद हो गया है। पीजीआई चंडीगढ़ से आने वाले डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण अब खिलाड़ी चोट लगने पर या तो बाहर के प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे हैं या सरकारी अस्पताल में सीमित सुविधा का सहारा ले रहे हैं।
मार्च 2025 में शुरू किए गए इस क्लीनिक में पीजीआई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हिमांशु भायना खिलाड़ी मरीजों का इलाज करते थे। क्लीनिक में घुटने, एड़ी, कोहनी और हाथ की चोट के ऑपरेशन के साथ फिजियोथेरेपी की सुविधा मिलती थी। यह क्लीनिक हर मंगलवार चलता था। जुलाई 2025 तक 300 मरीजों का इलाज किया गया और 5 ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
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हालांकि अब डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण क्लीनिक बंद हो गया है जिससे खिलाड़ियों को गंभीर चोट होने पर पीजीआई या प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ता है और उनका खर्च 50 हजार से 1 लाख रुपये तक बढ़ जाता है। सरकारी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारक खिलाड़ी इलाज या ऑपरेशन के लिए मुफ्त या 30 हजार रुपये तक खर्च करते हैं जबकि प्राइवेट में यही इलाज 1 से 1.5 लाख रुपये में होता है।कोट
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अस्पताल में स्पोर्ट्स इंजरी का क्लीनिक शुरू किया गया था। इसे डॉक्टर नहीं होने के कारण बंद किया गया है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन के पास हड्डी के डॉक्टर हैं। ऑपरेशन के लिए आने वाले खिलाड़ी को वापस नहीं भेजा गया है।
-आरएस चौहान, पीएमओ, सिविल अस्पताल सेक्टर-6