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कमियां: ढाई साल में बनाना था वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन, सुधार तो किया नहीं, पार्किंग दरें दस गुना बढ़ा दी
Thu, 16 Sep 2021 01:17 PM IST
निवेदिता वर्मा
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 16 Sep 2021 01:17 PM IST
सार
जिन कमियों को यात्री सुविधा समिति (पीएसी) ने एक सितंबर 2021 को चिन्हित कर सुधार के निर्देश दिए थे, पंद्रह दिन बाद भी स्टेशन की कमियों को अधिकारी दूर नहीं कर पाए हैं। इसका खुलासा अमर उजाला की पड़ताल में हुआ है।
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चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर बंद पड़े एटीएम।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ के रेलवे स्टेशन को छोटी-छोटी कमियों ने थर्ड क्लास बना दिया है। पिछले ढाई सालों में इसमें न तो कोई बदलाव हुआ और न ही यहां की कमियों में सुधार। हां आईआरएसडीसी ने इन दिनों पार्किंग की दरों में दस गुना से ज्यादा इजाफा कर यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ जरूर डाल दिया है।
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रेलवे ने स्टेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए मार्च 2019 में आईआरएसडीसी को जैसा रेलवे स्टेशन सौंपा था, आज भी ये वैसा ही है। जब इस बारे में आईआरएसडीसी के अधिकारियों से पीएसी के सदस्यों ने पूछा था, तो कोविड का हवाला देकर बात को टाल गए थे। जिन कमियों को यात्री सुविधा समिति (पीएसी) ने एक सितंबर 2021 को चिन्हित कर सुधार के निर्देश दिए थे, पंद्रह दिन बाद भी स्टेशन की कमियों को अधिकारी दूर नहीं कर पाए हैं। इसका खुलासा अमर उजाला की पड़ताल में हुआ है।
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खामी नंबर एक
स्टॉल के बाहर नहीं लगी है रेट लिस्ट
प्लेटफार्म नंबर एक पर रेट लिस्ट को लेकर पीएसी ने सवाल उठाए थे कि स्टॉल में बिकने वाले सामानों की रेट लिस्ट कहां है, लेकिन पंद्रह दिन बाद भी स्टॉल के बाहर रेट लिस्ट चस्पा नहीं किया गया। यह सीधा यात्रियों की जेब से जुड़ा मामला है।
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खामी नंबर दो
एटीएम तीन साल से पड़े हैं बंद
रेलवे स्टेशन पर जाएं, तो एटीएम कार्ड के भरोसे न रहें। क्योंकि पंचकूला और चंडीगढ़ साइड एटीएम से रुपये निकालने की मंशा पूरी नहीं हो सकती। यात्री सेवाओं के नाम पर चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर चार बैंकों ने अपने-अपने एटीएम बूथ स्थापित किए थे, लेकिन ये तीन साल से बंद पड़े हैं। अगर किसी यात्री को पैसे की जरूरत पड़ जाए तो उसे एक किमी पैदल जाना पड़ेगा या रिक्शा वाले एटीएम तक आने और जाने का तीस रुपये चार्ज करेंगे।
खामी नंबर तीन
60 में से 35 सीसीटीवी कैमरे ही चल रहे
रेलवे स्टेशन पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे 60 हैं, लेकिन महज 35 चल रहे हैं। रात के समय तो इन कैमरों से कुछ दिखता ही नहीं। यहां की यात्रियों से जुड़ी सुरक्षा भी जीरो है। इस प्रोजेक्ट को मुकम्मल करने के लिए प्रयास शुरू नहीं किया गया।
खामी नंबर चार
शिशु देखभाल कक्ष की सीटें फटीं
अपर क्लास प्रतीक्षालय में बच्चों के लिए शिशु देखभाल कक्ष बनाया गया है, लेकिन इसकी सीट बुरी तरह से फटी हुई है। इस कारण महिला यात्रियों को परेशानी होती है। वहीं, यहां एसी की सुविधा नहीं है, जिसे लगाने का निर्देश पीएसी के सदस्यों ने रेलवे को दिया है, लेकिन आज भी यहां की सीट फटी हुई हैं।
खामी नंबर पांच
हिंदी, पंजाबी व अंग्रेजी में लिखा डिस्प्ले बोर्ड नहीं लगा
टिकट बुकिंग काउंटर पर पीएसी ने हिंदी, पंजाबी व अंग्रेजी में लिखा डिस्प्ले बोर्ड लगाने का निर्देश दिया था, ताकि रेल यात्रियों को पता चल सके कि यह काउंटर किस लिए बनाया गया है। इस पर भी अब तक अमल नहीं किया गया।
खामी नंबर छह
पंखा लगाने के निर्देश पर नहीं हुआ अमल
प्लेटफार्म नंबर एक पर कई जगह पंखा लगाने का निर्देश दिया गया था। पीएसी ने साफ कहा था कि यहां शताब्दी जैसी ट्रेनें रुकती हैं। एक तो गर्मियों के दिन और यहां पंखा का नहीं होना बहुत बड़ी लापरवाही है। इसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ।
खामी नंबर सात
फर्स्ट क्लास विश्राम गृह का नहीं हो पाया रेनोवेशन
फर्स्ट क्लास विश्राम गृह को यात्रियों के लिए खुला रखने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अब तक इसका रेनोवेशन ही पूरा नहीं हो पाया है।