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Panchkula News: खराब किडनी को भी ट्रांसप्लांट के लायक बनाने में जुटे पीजीआई के डॉक्टर
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डॉ. देवप्रकाश चौधरी को आईएसओटी सम्मेलन में टैंकर यंग इन्वेस्टिगेटर अवॉर्ड-2026 से किया सम्मानित
पीजीआई की टीम को चार मेंटर-मेंटी पुरस्कार और स्टार स्वैप ट्रांसप्लांट सेंटर अवॉर्ड-2026 भी मिला
चंडीगढ़। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दान में मिली जिस किडनी को खराब स्थिति के कारण इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, उसे भी विशेष तकनीक से मरीज के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में पीजीआई के डॉक्टर काम कर रहे हैं। इस प्रयास के लिए रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देवप्रकाश चौधरी को हैदराबाद में आयोजित इंडियन सोसायटी ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन (आईएसओटी) के 36वें वार्षिक सम्मेलन में टैंकर यंग इन्वेस्टिगेटर अवॉर्ड-2026 से सम्मानित किया गया।
डॉ. चौधरी ने भारत में नॉर्मोथर्मिक मशीन परफ्यूजन तकनीक पर काम किया है। इसमें दान की गई किडनी को विशेष मशीन के जरिए शरीर के सामान्य तापमान के करीब रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति दी जाती है। इससे किडनी की स्थिति का आकलन करने और उसे ट्रांसप्लांट के लिए उपयोगी बनाने की संभावना समझने में मदद मिलती है।
चार शोधों को भी मिला सम्मान
सम्मेलन में पीजीआई की टीम को चार मेंटर-मेंटी पुरस्कार भी मिले। इनमें किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दवाओं की सही खुराक तय करने, बुजुर्गों के किडनी दान की सुरक्षा, ट्रांसप्लांट के बाद डायबिटीज के खतरे की पहचान और डोनर सर्जरी के प्रभाव से जुड़े शोध शामिल रहे। संस्थान को स्टार स्वैप ट्रांसप्लांट सेंटर अवॉर्ड-2026 से भी सम्मानित किया गया।
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क्या है स्टार स्वैप ट्रांसप्लांट?
यह पुरस्कार किडनी की अदला-बदली के जरिए प्रत्यारोपण की सुविधा देने वाले केंद्रों के योगदान को मान्यता देता है। जब किसी मरीज का इच्छुक किडनी डोनर चिकित्सकीय कारणों से उससे मेल नहीं खाता, तो दूसरे मरीज के डोनर के साथ जोड़ी मिलाकर दोनों मरीजों का प्रत्यारोपण संभव हो सकता है। ये सम्मान अंगदान और ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में मरीजों के लिए बेहतर विकल्प विकसित करने की दिशा में पीजीआई के प्रयासों को पहचान देते हैं।
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पीजीआई की टीम को चार मेंटर-मेंटी पुरस्कार और स्टार स्वैप ट्रांसप्लांट सेंटर अवॉर्ड-2026 भी मिला
चंडीगढ़। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दान में मिली जिस किडनी को खराब स्थिति के कारण इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, उसे भी विशेष तकनीक से मरीज के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में पीजीआई के डॉक्टर काम कर रहे हैं। इस प्रयास के लिए रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देवप्रकाश चौधरी को हैदराबाद में आयोजित इंडियन सोसायटी ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन (आईएसओटी) के 36वें वार्षिक सम्मेलन में टैंकर यंग इन्वेस्टिगेटर अवॉर्ड-2026 से सम्मानित किया गया।
डॉ. चौधरी ने भारत में नॉर्मोथर्मिक मशीन परफ्यूजन तकनीक पर काम किया है। इसमें दान की गई किडनी को विशेष मशीन के जरिए शरीर के सामान्य तापमान के करीब रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति दी जाती है। इससे किडनी की स्थिति का आकलन करने और उसे ट्रांसप्लांट के लिए उपयोगी बनाने की संभावना समझने में मदद मिलती है।
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चार शोधों को भी मिला सम्मान
सम्मेलन में पीजीआई की टीम को चार मेंटर-मेंटी पुरस्कार भी मिले। इनमें किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दवाओं की सही खुराक तय करने, बुजुर्गों के किडनी दान की सुरक्षा, ट्रांसप्लांट के बाद डायबिटीज के खतरे की पहचान और डोनर सर्जरी के प्रभाव से जुड़े शोध शामिल रहे। संस्थान को स्टार स्वैप ट्रांसप्लांट सेंटर अवॉर्ड-2026 से भी सम्मानित किया गया।
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क्या है स्टार स्वैप ट्रांसप्लांट?
यह पुरस्कार किडनी की अदला-बदली के जरिए प्रत्यारोपण की सुविधा देने वाले केंद्रों के योगदान को मान्यता देता है। जब किसी मरीज का इच्छुक किडनी डोनर चिकित्सकीय कारणों से उससे मेल नहीं खाता, तो दूसरे मरीज के डोनर के साथ जोड़ी मिलाकर दोनों मरीजों का प्रत्यारोपण संभव हो सकता है। ये सम्मान अंगदान और ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में मरीजों के लिए बेहतर विकल्प विकसित करने की दिशा में पीजीआई के प्रयासों को पहचान देते हैं।