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पटियाला हिंसा: राज्यपाल से मिले सुखबीर, सीबीआई जांच की उठाई मांग
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चंडीगढ़। पटियाला हिंसा को लेकर शिरोमणि अकाली दल के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को राज्यपाल से मुलाकात की। इस दौरान शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने इस मामले की सीबीआई जांच से कराने की मांग की। साथ ही पंजाब और दिल्ली के बीच हुए समझौतों को असांविधानिक बताते हुए मामले में हस्तक्षेप कर इन्हें रद्द करने को लेकर मांग पत्र सौंपा।
राज्यपाल से राजभवन में शिअद अध्यक्ष ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि एक निर्वाचित राज्य ने अपना प्रशासन दूसरे राज्य को सौंप दिया है। अकाली दल प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से पंजाब सरकार को दिल्ली सरकार को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति न देने का निर्देश देने का आग्रह किया है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कोई भी आधिकारिक फाइल देखने के लिए दिल्ली सरकार के पास नहीं भेजा जाना चाहिए।
अकाली दल अध्यक्ष ने पटियाला में हाल ही में हुई हिंसा के मामले मेें राज्यपाल को अवगत कराया कि कैसे मुख्यमंत्री ने चार दिन पहले ही अग्रिम नोटिस दिए जाने के बावजूद इसे रोकने के लिए कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। सुखबीर बादल ने कहा कि यह और भी अधिक निराशाजनक है कि मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे दो राजनीतिक दलों के बीच लड़ाई में बदलने की कोशिश की। प्रतिनिधिमंडल में बलविंदर सिंह भूंदड़, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, सिकंदर सिंह मलूका तथा डॉ. दलजीत सिंह चीमा शामिल थे।
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राज्यपाल से राजभवन में शिअद अध्यक्ष ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि एक निर्वाचित राज्य ने अपना प्रशासन दूसरे राज्य को सौंप दिया है। अकाली दल प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से पंजाब सरकार को दिल्ली सरकार को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति न देने का निर्देश देने का आग्रह किया है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कोई भी आधिकारिक फाइल देखने के लिए दिल्ली सरकार के पास नहीं भेजा जाना चाहिए।
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अकाली दल अध्यक्ष ने पटियाला में हाल ही में हुई हिंसा के मामले मेें राज्यपाल को अवगत कराया कि कैसे मुख्यमंत्री ने चार दिन पहले ही अग्रिम नोटिस दिए जाने के बावजूद इसे रोकने के लिए कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। सुखबीर बादल ने कहा कि यह और भी अधिक निराशाजनक है कि मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे दो राजनीतिक दलों के बीच लड़ाई में बदलने की कोशिश की। प्रतिनिधिमंडल में बलविंदर सिंह भूंदड़, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, सिकंदर सिंह मलूका तथा डॉ. दलजीत सिंह चीमा शामिल थे।
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