{"_id":"56f992184f1c1b6621f00294","slug":"panchkula-jeter-seemed-to-tractor-line","type":"story","status":"publish","title_hn":"कभी छह माह लाइन में लगने से मिलता था एचएमटी में बना जेटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कभी छह माह लाइन में लगने से मिलता था एचएमटी में बना जेटर
अमर उजाला ब्यूरो, पंचकूला।
Updated Tue, 29 Mar 2016 09:00 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिंजौर की एचएमटी में बना जेटर हासिल करने के लिए कभी छह माह का इंतजार करना पड़ता था। इस फैक्ट्री ने पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया की तस्वीर भी बदल दी थी और इसी ने पंचकूला का नाम विश्व भर में चमका दिया।
अब फैक्टरी में सिर्फ पचास से साठ ट्रैक्टर प्रतिमाह बनते हैं। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू ने एचएमटी का उद्घाटन 23 अक्तूबर 1963 को किया था। मशीन टूल्स फैक्ट्री के बाद 1975 में ट्रैक्टर यूनिट शुरू हुई तो रोजगार के अपार अवसर मिले। वर्ष 1978 में एचएसआईडीसी के साथ मिलकर पंचकूला और कालका में 40 छोटी यूनिट्स भी स्थापित की गईं। एचएमटी के लिए 842 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई। फैक्ट्री की दोनों यूनिट और कॉलोनी के साथ इमारतों का 396 एकड़ में निर्माण हुआ।
छह माह तक होता था ट्रैक्टर का इंतजार
पंचकूूला की छोटी यूनिट्स एचएमटी के लिए ट्रैक्टर पार्ट्स बनाती थीं। इनके पास इतना काम था कि कोई दूसरा आर्डर ले ही नहीं पाते थे। उस समय दिनरात काम करके एचएमटी का आर्डर पूरा किया जाता था।
विज्ञापन
एचएमटी पिंजौर के लिए ट्रैक्टर पार्ट बनाने वाले सीबी गोयल ने बताया कि एचएमटी में जेटर ट्रैक्टर बनता था। विश्व प्रसिद्ध एचएमटी के कारण इस ट्रैक्टर के लिए लोग छह माह पहले ट्रैक्टर की बुकिंग कराते थे। एचएमटी में दो हजार ट्रैक्टर प्रतिमाह तैयार होते थे।
एचएमटी में उस समय आठ हजार से ज्याद लोग नौकरी करते थे। पंचकूला और कालक में छोटी इंडस्ट्री को भी अब काम मिलना बंद हो चुका है। उनकी पेमेंट बाकी है। जिस कारण वह बंद होने के कगार पर है। ऐसी चालीस इंडस्ट्री हैं, जो एचएमटी पर निर्भर थीं, अब यहां कोई काम नहीं होता है।
2013 में केंद्र ने दिया था 1083 करोड़ का पैकेज
एचएमटी पिंजौर के लिए अप्रैल 2013 में केंद्र ने ट्रैक्टर प्लांट को 1083 करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज दिया था। लेकिन अधिकतर राशि पुरानी देनदारी में चली गई। वर्किंग कैपिटल के 53 करोड़ में से मात्र 45 करोड़ रुपये आए थे, उसमें से भी 15 करोड़ रुपये रॉ मैटेरियल एवं अन्य को 4 करोड़ रुपये का पुराना भुगतान कर दिया गया। 656 करोड़ रुपये से पुराना कर्जा अदा किया।
कोट्स
एचएमटी एनसीलिएरी इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी भूषण ने कहा कि एचएमटी वही है, जिसके ट्रैक्टर की डिलीवरी के लिए लंबी कतारें लगती थीं। इसके हालात इस वजह से बदले क्योंकि यह प्राइवेट सेक्टर से टक्कर नहीं ले सकी। एचएमटी एनसीलिएरी इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के महासचिव अशोक सिंघल ने कहा कि एचएमटी के खर्च ज्यादा हैं और उन पर अंकुश लगाना नामुमकिन हो गया है।
विज्ञापन
अब फैक्टरी में सिर्फ पचास से साठ ट्रैक्टर प्रतिमाह बनते हैं। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू ने एचएमटी का उद्घाटन 23 अक्तूबर 1963 को किया था। मशीन टूल्स फैक्ट्री के बाद 1975 में ट्रैक्टर यूनिट शुरू हुई तो रोजगार के अपार अवसर मिले। वर्ष 1978 में एचएसआईडीसी के साथ मिलकर पंचकूला और कालका में 40 छोटी यूनिट्स भी स्थापित की गईं। एचएमटी के लिए 842 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई। फैक्ट्री की दोनों यूनिट और कॉलोनी के साथ इमारतों का 396 एकड़ में निर्माण हुआ।
विज्ञापन
छह माह तक होता था ट्रैक्टर का इंतजार
पंचकूूला की छोटी यूनिट्स एचएमटी के लिए ट्रैक्टर पार्ट्स बनाती थीं। इनके पास इतना काम था कि कोई दूसरा आर्डर ले ही नहीं पाते थे। उस समय दिनरात काम करके एचएमटी का आर्डर पूरा किया जाता था।
विज्ञापन
एचएमटी पिंजौर के लिए ट्रैक्टर पार्ट बनाने वाले सीबी गोयल ने बताया कि एचएमटी में जेटर ट्रैक्टर बनता था। विश्व प्रसिद्ध एचएमटी के कारण इस ट्रैक्टर के लिए लोग छह माह पहले ट्रैक्टर की बुकिंग कराते थे। एचएमटी में दो हजार ट्रैक्टर प्रतिमाह तैयार होते थे।
एचएमटी में उस समय आठ हजार से ज्याद लोग नौकरी करते थे। पंचकूला और कालक में छोटी इंडस्ट्री को भी अब काम मिलना बंद हो चुका है। उनकी पेमेंट बाकी है। जिस कारण वह बंद होने के कगार पर है। ऐसी चालीस इंडस्ट्री हैं, जो एचएमटी पर निर्भर थीं, अब यहां कोई काम नहीं होता है।
2013 में केंद्र ने दिया था 1083 करोड़ का पैकेज
एचएमटी पिंजौर के लिए अप्रैल 2013 में केंद्र ने ट्रैक्टर प्लांट को 1083 करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज दिया था। लेकिन अधिकतर राशि पुरानी देनदारी में चली गई। वर्किंग कैपिटल के 53 करोड़ में से मात्र 45 करोड़ रुपये आए थे, उसमें से भी 15 करोड़ रुपये रॉ मैटेरियल एवं अन्य को 4 करोड़ रुपये का पुराना भुगतान कर दिया गया। 656 करोड़ रुपये से पुराना कर्जा अदा किया।
कोट्स
एचएमटी एनसीलिएरी इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी भूषण ने कहा कि एचएमटी वही है, जिसके ट्रैक्टर की डिलीवरी के लिए लंबी कतारें लगती थीं। इसके हालात इस वजह से बदले क्योंकि यह प्राइवेट सेक्टर से टक्कर नहीं ले सकी। एचएमटी एनसीलिएरी इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के महासचिव अशोक सिंघल ने कहा कि एचएमटी के खर्च ज्यादा हैं और उन पर अंकुश लगाना नामुमकिन हो गया है।