फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   panchkula, jaat movement, dead person, job, compensations

जाटों ने की आश्रितों को सरकारी नौकरी व मुआवजा देने की मांग

Tue, 15 Mar 2016 10:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पंचकूला।
अमर उजाला ब्यूरो, पंचकूला। Updated Tue, 15 Mar 2016 10:09 AM IST
विज्ञापन
panchkula, jaat movement, dead person, job, compensations
Jat Agitation - फोटो : अमर उजाला
जाट आरक्षण आंदोलन के मृतकों को शहीद बताते हुए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने मृतक आश्रितों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की है। संघर्ष समिति ने ऐसी 7 मांगों से संबंधित ज्ञापन सोमवार को प्रधानमंत्री के नाम सिटी मैजिस्ट्रेट को सौंपा। ज्ञापन देने से पूर्व समिति ने जाट सभा सेक्टर-6 में एक बैठक की।
विज्ञापन


यहां विचार विमर्श के बाद पांच सदस्यीय शिष्टमंडल ने सिटी मैजिस्ट्रेट ममता शर्मा को ज्ञापन सौंपा। शिष्टमंडल में अखिल भारतीय जाट महासभा पंचकूला के अध्यक्ष एवं संघर्ष समिति के सदस्य दिलबाग सिंह, आजाद मलिक, एडवोकेट अनिल कालीरमन, जसबीर सिंह और एडवोकेट सतीश कादियान शामिल थे।
विज्ञापन


दिलबाग सिंह ने बताया कि उनकी मांग है कि हरियाणा सरकार पहले अध्यादेश लाकर जाटों को पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल करे और इसके बाद विधानसभा में बिल लाकर हरियाणा के जाटों को आरक्षण दे। केंद्रीय स्तर पर जाटों को आरक्षण देने के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन बिल लाकर बट सत्र में प्रदेश व केंद्र सरकार की ओबीसी सूचियों में व्याप्त विसंगतियों को दूर किया जाए। जाट आंदोलन के दौरान गोली चलवाने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
विज्ञापन
विज्ञापन


आंदोलन के दौरान जिनकी मौत हुई है उन्हें शहीद बताते हुए आश्रितों को सरकारी नौकरी और मुआवजे दिया जाए। आंदोलन के दौरान जिन लोगों पर मामले दर्ज हुए हैं उन्हें वापस लिया जाए। कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के सांसद राज कुमार सैनी के खिलाफ गलत बयानबाजी के लिए सख्त कार्रवाई की जाए। दिलबाग सिंह बताया कि हरियाणा के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर सोमवार को जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए हैं।

सरकार प्रायोजित था 35 बिरादरी बनाम जाट का मामला
संघर्ष समिति ने ज्ञापन में कहा है कि राज्य में 35 बिरादरी बनाम जाट का जो प्रचार किया गया वह प्रदेश सरकार और उसके मंत्रियों द्वारा प्रायोजित था। मांग ये भी कि गई है कि आंदोलन के दौरान जो हिंसा हुई उसके लिए सरकार जिम्मेदार है।


एसआईटी से नहीं है न्याय की अपेक्षा
संघर्ष समिति का आरोप है कि आंदोलन के दौरान जो हिंसा हुई उसकी जांच के लिए सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी एवं सरकार के जातिवादी अधिकारियों से जाट समाज को न्याय की कोई अपेक्षा नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार एक न्यायिक जांच आयोग सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनाया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed