{"_id":"57a790894f1c1b2f1a2b94c1","slug":"panchkula-dispensary-not-build-in-sector-12-panchkula","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचकूला में प्रोजेक्ट पास न होने से लटका डिस्पेंसरी का निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचकूला में प्रोजेक्ट पास न होने से लटका डिस्पेंसरी का निर्माण
ब्यूरो, अमर उजाला/पंचकूला
Updated Mon, 08 Aug 2016 01:18 AM IST
विज्ञापन
पंचकूला में डिस्पेंसरी की साइट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सर्वहितकारी सोसायटी के प्रधान राकेश अग्रवाल ने हुडा के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर पर डिस्पेंसरी की फाइल रोकने का आरोप लगाया है। अग्रवाल ने कहा कि सेक्टर-12 में डिस्पेंसरी बनाने की मंजूरी मिली, साइट का स्केच बना, बजट के लिए करीब 95 लाख का एस्टीमेट तैयार हुआ, बिल्डिंग का ढांचा भी तैयार किया गया, लेकिन टेंडर होने से पहले सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर ने फाइल रोक दी।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में डेढ़ साल का वक्त लगा। हर साल इन्हीं सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर से फाइल पास होकर जाती थी, लेकिन इस बार हुडा के इस अधिकारी ने फाइल ऐसे क्यों रोक दी, यह बात समझ में नहीं आई। इसके लिए वह विधायक ज्ञानचंद गुप्ता से भी मिले थे, उन्होंने आश्वासन दिया कि सेक्टर में डिस्पेंसरी बनेगी।
2015 में उम्मीद दिखी पर नहीं बनी
अग्रवाल ने बताया कि 2014 से डिस्पेंसरी बनवाने के लिए हुडा कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। हुडा के अधिकारियों ने कहा कि पहले स्वास्थ्य विभाग से परमिशन लाइए, उसके बाद डिस्पेंसरी की फाइल बढ़ेगी। स्वास्थ्य विभाग से पत्र आने के बाद डिस्पेंसरी की फाइल हुडा में एस्टीमेट और बजट के लिए आगे बढ़ाई गई। इस प्रोजेक्ट को मंजूरी भी मिली, लेकिन निर्माण नहीं हुआ।
विज्ञापन
बाउंड्री वॉल के बाद भी नहीं हुआ निर्माण
राकेश अग्रवाल ने बताया कि मास्टर प्लान में डिस्पेंसरी होने के बाद भी सेक्टर के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सेक्टर में करीब सात हजार लोग रहते हैं, जिन्हें इलाज के लिए डिस्पेंसरी की जरूरत है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1995 में डिस्पेंसरी साइट की चार दीवारी करवाई थी। लेकिन यहां 21 साल बाद भी डिस्पेंसरी नहीं बन पाई। अब इस साइट में घासें उग आईं हैं और मच्छर पनप रहे हैं।
जनरल अस्पताल का वर्कलोड होगा कम
फिलहाल सेक्टर-12 में अभी डिस्पेंसरी नहीं है। लोगों को ईसीजी, ब्लड टेस्ट, बीपी जैसे टेस्ट करवाने के लिए सेक्टर-6 जनरल अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों को काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर डिस्पेंसरी का निर्माण सेक्टर-12 में हो जाता है तो जनरल अस्पताल का वर्कलोड कम होगा।
हुडा कार्यालय का चक्कर काटने के बाद भी नहीं बनी
राकेश अग्रवाल ने बताया कि सेक्टर के लोगों द्वारा पिछले एक साल से डिस्पेंसरी बनाने के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है। सेक्टर-12 के लोगों ने कई वर्षों से डिस्पेंसरी बनवाने के लिए हुडा ऑफिस के चक्कर काटे। इसके बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, इसी बीच चीफ इंजीनियर ने फाइल ही रोक दी।
मैंने नहीं रोकी फाइल: सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर
हुडा के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर एनके वर्मा ने कहा की डिस्पेंसरी की कोई भी फाइल मैंने नहीं रोकी। फिलहाल मैं छुट्टी पर हूं। इस संबंध में बेहतर जानकारी एक्सईएन ही दे सकते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में डेढ़ साल का वक्त लगा। हर साल इन्हीं सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर से फाइल पास होकर जाती थी, लेकिन इस बार हुडा के इस अधिकारी ने फाइल ऐसे क्यों रोक दी, यह बात समझ में नहीं आई। इसके लिए वह विधायक ज्ञानचंद गुप्ता से भी मिले थे, उन्होंने आश्वासन दिया कि सेक्टर में डिस्पेंसरी बनेगी।
विज्ञापन
2015 में उम्मीद दिखी पर नहीं बनी
अग्रवाल ने बताया कि 2014 से डिस्पेंसरी बनवाने के लिए हुडा कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। हुडा के अधिकारियों ने कहा कि पहले स्वास्थ्य विभाग से परमिशन लाइए, उसके बाद डिस्पेंसरी की फाइल बढ़ेगी। स्वास्थ्य विभाग से पत्र आने के बाद डिस्पेंसरी की फाइल हुडा में एस्टीमेट और बजट के लिए आगे बढ़ाई गई। इस प्रोजेक्ट को मंजूरी भी मिली, लेकिन निर्माण नहीं हुआ।
विज्ञापन
बाउंड्री वॉल के बाद भी नहीं हुआ निर्माण
राकेश अग्रवाल ने बताया कि मास्टर प्लान में डिस्पेंसरी होने के बाद भी सेक्टर के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सेक्टर में करीब सात हजार लोग रहते हैं, जिन्हें इलाज के लिए डिस्पेंसरी की जरूरत है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1995 में डिस्पेंसरी साइट की चार दीवारी करवाई थी। लेकिन यहां 21 साल बाद भी डिस्पेंसरी नहीं बन पाई। अब इस साइट में घासें उग आईं हैं और मच्छर पनप रहे हैं।
जनरल अस्पताल का वर्कलोड होगा कम
फिलहाल सेक्टर-12 में अभी डिस्पेंसरी नहीं है। लोगों को ईसीजी, ब्लड टेस्ट, बीपी जैसे टेस्ट करवाने के लिए सेक्टर-6 जनरल अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों को काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर डिस्पेंसरी का निर्माण सेक्टर-12 में हो जाता है तो जनरल अस्पताल का वर्कलोड कम होगा।
हुडा कार्यालय का चक्कर काटने के बाद भी नहीं बनी
राकेश अग्रवाल ने बताया कि सेक्टर के लोगों द्वारा पिछले एक साल से डिस्पेंसरी बनाने के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है। सेक्टर-12 के लोगों ने कई वर्षों से डिस्पेंसरी बनवाने के लिए हुडा ऑफिस के चक्कर काटे। इसके बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, इसी बीच चीफ इंजीनियर ने फाइल ही रोक दी।
मैंने नहीं रोकी फाइल: सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर
हुडा के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर एनके वर्मा ने कहा की डिस्पेंसरी की कोई भी फाइल मैंने नहीं रोकी। फिलहाल मैं छुट्टी पर हूं। इस संबंध में बेहतर जानकारी एक्सईएन ही दे सकते हैं।