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नई आबकारी नीति: पटियाला के बाद अब जालंधर में भी ई-टेंडरिंग का होगा विरोध
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार की नई आबकारी नीति का पटियाला के बाद अब जालंधर में भी विरोध होगा। शराब ठेकेदारों ने नई नीति के तहत शुरू की गई ई टेंडरिंग के बहिष्कार का फैसला किया है। अब तक शराब ग्रुपों के 63 ठेकों में मात्र 13 आवेदन ही आबकारी विभाग को प्राप्त हुए हैं। सस्ती शराब नीति से सरकार ने 10 हजार करोड़ के राजस्व का लक्ष्य तय किया है। नई आबकारी नीति के तहत पटियाला जोन के कई जिलों में वीरवार को हुई ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में एक भी शराब ठेकेदार ने हिस्सा ही नहीं लिया है।
वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए बनाई गई आबकारी नीति में लाटरी के बजाय ई टेंडरिंग प्रक्रिया से शराब ठेकों की बिक्री की जानी है। इसके लिए आबकारी विभाग ने प्रदेश को तीन जोन में बांटा है। तीनों जोन की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से किए जाने का फैसला विभाग ने किया है। शुरुआत पटियाला जोन के जिलों से की गई थी। 63 शराब ग्रुप बनाए गए, जिनमें से मात्र 13 को खरीदने के लिए ही आवेदन आए हैं, जबकि 50 ग्रुपों पर आवेदन ही प्राप्त नहीं हुए हैं। प्रदेश के अधिकतर शराब ठेकेदार आबकारी नीति का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
शराब ठेकेदारों का दावा है कि नई आबकारी नीति में शराब ठेकों की बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 40 फीसदी की राजस्व बढ़ोतरी के साथ की जा रही है। इसके अलावा शराब ठेकेदारों से 10 फीसदी के बजाय 17 फीसदी सिक्योरिटी वसूली जा रही है, जिसे किस्तों में समायोजित नहीं किया जाएगा, बल्कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर वापसी करने की बात कही जा रही है। पटियाला के बाद जालंधर से उनके शराब ठेकेदार भी ई टेंडरिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने का दावा कर रहे हैं। शराब ठेकेदारों का तर्क है कि अगर अफसरशाही शराब ठेके बेचने के लिए ई टेंडरिंग प्रक्रिया की अंतिम समय सीमा को बढ़ा सकती है तो फिर ठेकेदारों की मांग के मुताबिक एक्साइज पालिसी में बदलाव भी करवा सकती है। अगर बदलाव नहीं किया जाता है तो फिर शराब ठेकेदार ई टेंडरिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे।
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विरोध के कारण बढ़ाई तिथि
पहले चरण में अच्छा रिस्पांस नहीं मिलने और शराब ठेकेदारों के विरोध के बाद आबकारी विभाग ने टेंडरिंग प्रक्रिया की तिथि में बदलाव कर दिया है। विभाग ने अब टेंडरिंग के लिए तिथि 21 जून तक कर दी है। हालांकि विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ बिंदुओं को लेकर आबकारी नीति में बदलाव भी किए जा सकते हैं।
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वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए बनाई गई आबकारी नीति में लाटरी के बजाय ई टेंडरिंग प्रक्रिया से शराब ठेकों की बिक्री की जानी है। इसके लिए आबकारी विभाग ने प्रदेश को तीन जोन में बांटा है। तीनों जोन की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से किए जाने का फैसला विभाग ने किया है। शुरुआत पटियाला जोन के जिलों से की गई थी। 63 शराब ग्रुप बनाए गए, जिनमें से मात्र 13 को खरीदने के लिए ही आवेदन आए हैं, जबकि 50 ग्रुपों पर आवेदन ही प्राप्त नहीं हुए हैं। प्रदेश के अधिकतर शराब ठेकेदार आबकारी नीति का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
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शराब ठेकेदारों का दावा है कि नई आबकारी नीति में शराब ठेकों की बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 40 फीसदी की राजस्व बढ़ोतरी के साथ की जा रही है। इसके अलावा शराब ठेकेदारों से 10 फीसदी के बजाय 17 फीसदी सिक्योरिटी वसूली जा रही है, जिसे किस्तों में समायोजित नहीं किया जाएगा, बल्कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर वापसी करने की बात कही जा रही है। पटियाला के बाद जालंधर से उनके शराब ठेकेदार भी ई टेंडरिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने का दावा कर रहे हैं। शराब ठेकेदारों का तर्क है कि अगर अफसरशाही शराब ठेके बेचने के लिए ई टेंडरिंग प्रक्रिया की अंतिम समय सीमा को बढ़ा सकती है तो फिर ठेकेदारों की मांग के मुताबिक एक्साइज पालिसी में बदलाव भी करवा सकती है। अगर बदलाव नहीं किया जाता है तो फिर शराब ठेकेदार ई टेंडरिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे।
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विरोध के कारण बढ़ाई तिथि
पहले चरण में अच्छा रिस्पांस नहीं मिलने और शराब ठेकेदारों के विरोध के बाद आबकारी विभाग ने टेंडरिंग प्रक्रिया की तिथि में बदलाव कर दिया है। विभाग ने अब टेंडरिंग के लिए तिथि 21 जून तक कर दी है। हालांकि विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ बिंदुओं को लेकर आबकारी नीति में बदलाव भी किए जा सकते हैं।