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रिश्वत मामले में नायाब कोर्ट को चार साल की सजा
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चंडीगढ़। सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को रिश्वत के सात साल पुराने मामले में दोषी नायब कोर्ट बलराज को चार साल की सजा सुनाई है। इसके साथ दोषी पर 20 हजार रुपये हर्जाना भी लगाया है। बलराज को मंगलवार को दोषी करार दिया गया था।
बलराज अदालत में बतौर नायब कोर्ट ड्यूटी पर तैनात था। ड्यूटी के दौरान ही उसे चार हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया था। सीबीआई के वकील पीके डोगरा ने अदालत में बहस के दौरान बताया कि दोषी बलराज ने एक आरोपी से जमानत दिलाने के नाम पर पैसे मांगे थे। धनास मिल्क कॉलोनी निवासी रोमी की शिकायत पर सीबीआई ने बलराज को पकड़ने के लिए ट्रैप लगाया था।
आरोप के मुताबिक रोमी पर मारपीट का केस चल रहा था, लेकिन एक तारीख पर वह अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया। इस पर रोमी ने जमानत के लिए बलराज से संपर्क किया। बलराज ने जमानत दिलाने के लिए उससे 5 हजार रुपये मांगे। दोनों के बीच सौदा चार हजार रुपये में तय हुआ। इसी बीच रोमी ने सीबीआई को शिकायत दे दी। बलराज ने कोर्ट रूम के बाहर जैसे ही पैसे लिए, सीबीआई ने दबोच लिया।
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बलराज अदालत में बतौर नायब कोर्ट ड्यूटी पर तैनात था। ड्यूटी के दौरान ही उसे चार हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया था। सीबीआई के वकील पीके डोगरा ने अदालत में बहस के दौरान बताया कि दोषी बलराज ने एक आरोपी से जमानत दिलाने के नाम पर पैसे मांगे थे। धनास मिल्क कॉलोनी निवासी रोमी की शिकायत पर सीबीआई ने बलराज को पकड़ने के लिए ट्रैप लगाया था।
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आरोप के मुताबिक रोमी पर मारपीट का केस चल रहा था, लेकिन एक तारीख पर वह अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया। इस पर रोमी ने जमानत के लिए बलराज से संपर्क किया। बलराज ने जमानत दिलाने के लिए उससे 5 हजार रुपये मांगे। दोनों के बीच सौदा चार हजार रुपये में तय हुआ। इसी बीच रोमी ने सीबीआई को शिकायत दे दी। बलराज ने कोर्ट रूम के बाहर जैसे ही पैसे लिए, सीबीआई ने दबोच लिया।
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