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अन्य राज्यों की तरह हरियाणा ने नहीं की केंद्र से धान की एमएसपी बढ़ाने की सिफारिश ः हुड्डा

Wed, 15 Jun 2022 01:39 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 15 Jun 2022 01:39 AM IST
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Like other states, Haryana government did not recommend to the Center to increase the MSP of paddy: Hooda
चंडीगढ़। प्रदेश की गठबंधन सरकार ने बार-बार यह साबित किया है कि उसे किसानों के हितों से कोई सरोकार नहीं है। इसलिए न तो इस सरकार ने अपने स्तर पर आज तक किसान हित का कोई फैसला लिया और ना ही कभी केंद्र से ऐसी कोई मांग की। यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का।
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हुड्डा ने कहा कि कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने खरीफ की फसलों के लिए एमएसपी में मामूली बढ़ोतरी का ऐलान किया था। इसलिए धान उत्पादक 14 राज्यों ने एमएसपी में इस बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए केंद्र सरकार से और बढ़ोतरी की मांग की है। हैरत की बात है की धान के बड़े उत्पादक हरियाणा की सरकार ने केंद्र से ऐसी कोई सिफारिश नहीं की। जबकि तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने करीब 4500 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की मांग की है। ऐसे में हरियाणा गठबंधन सरकार को भी जो पंजाब सरकार ने 3085 प्रति क्विंटल की सिफारिश की है, कम से कम इतनी तो करनी चाहिए थी।
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हुड्डा ने कहा कि भाजपा ने 2022 तक किसानों की दोगुनी आय करने का वादा किया था, लेकिन पहले रबी और अब खरीफ सीजन के लिए हुए एमएसपी ऐलान से स्पष्ट हो गया है कि यह वादा सिर्फ एक जुमला था। आज पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही है। खाद, बीज, दवाई और खेती उपकरणों पर सरकार ने बेतहाशा टैक्स लगा दिया है। ऐसे में अब एमएसपी में मामूली बढ़ोतरी कर उसने किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।
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हुड्डा ने बताया कि जयपुर में हुए कांग्रेस के मंथन शिविर के दौरान उनकी कमेटी ने एक बार फिर स्वामीनाथन आयोग के सी2 फार्मूले के तहत किसानों को एमएसपी देने और एमएसपी गारंटी का कानून बनाने की सिफारिश की है। हुड्डा ने कहा कि आढ़तियां को करीब 190 करोड रुपये कमीशन और श्रमिकों को 115 करोड़ 50 लाख रुपये बकाया है। सरकार को चाहिए कि तुरंत प्रभाव से 308 करोड़ 50 लाख रुपये का भुगतान करे।
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