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Panchkula News: कथा अगर छप्पन भोग तो हरिनाम संकीर्तन तुलसी दल

Thu, 01 Jun 2023 01:40 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Jun 2023 01:40 AM IST
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Katha agar chhappan bhog to Harinam Sankirtan Tulsi Dal
संवाद न्यूज एजेंसी पंचकूला। फिरोजपुर सेक्टर-19 स्थित प्राचीन शिव-पार्वती मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक डॉ. रमनीक कृष्ण महाराज ने नवधा भक्ति की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भक्ति का प्रथम सिद्धांत है श्रवण अर्थात जीवन में जितना हो सके भगवान की कथा श्रवण की जाए। कीर्तनम अर्थात हरिनाम का संकीर्तन किया जाए। सतपुरुष कहते हैं कथा अगर छप्पन भोग है तो हरिनाम संकीर्तन उसमें तुलसी दल है। बिना तुलसी दल के भगवान को भोग नहीं लगता।
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भक्ति का तृतीय लक्षण है विष्णु स्मरण अर्थात हर स्थिति में मनुष्य भगवान का स्मरण करके रहे। पाद सेवनम भक्ति का चतुर्थ लक्षण है अर्थात भगवत चरणों में ये हमारा मन बुद्धि सहित लगा रहे। हम सदैव भगवत चरणों की सेवा करते रहें। पांचवीं भक्ति है अर्चनम अर्थात भगवान की उपासना ही मनुष्य का एकमात्र लक्ष्य हो। हम सदा भगवान के चरणों की अर्चना करते रहें। षष्ठम भक्ति है वंदन अर्थात जीव को अपनी भक्ति को पुष्ट करने के लिए भगवत चरणों का वंदन करना चाहि। सप्तमी भक्ति है दाष्यम अर्थात हम भगवत चरणों के दास बन जाएं।
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