फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   Haryana Day Special Story

...दिल्ली देश की नहीं हरियाणा की राजधानी होती

Sat, 01 Nov 2014 01:01 PM IST
मनोज कुमार/अमर उजाला, रोहतक
मनोज कुमार/अमर उजाला, रोहतक Updated Sat, 01 Nov 2014 01:01 PM IST
विज्ञापन
Haryana Day Special Story

आज हम हरियाणा का 49वां स्थापना दिवस मना रहे हैं। भौगोलिक दृष्टि से हमारे सूबे का क्षेत्रफल 44,212 वर्ग किलोमीटर है। लेकिन हमारी मांग सिर्फ इतनी ही नहीं थी। हम हरियाणा नहीं विशाल हरियाणा चाहते थे। देश के आजाद होने के बाद 1950 में ही अलग हरियाणा की मांग शुरू हो गई थी।

विज्ञापन


1954-1955 तक हमारी मांग विशाल हरियाणा की थी, जिसमें न केवल वर्तमान हरियाणा, बल्कि दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के भरतपुर व अलवर जिला तक शामिल था। तर्क भी दिया गया था कि इन इलाकों की भाषा मिलती जुलती है और देश की आजादी से पहले दिल्ली की हर हुकूमत का क्षेत्र भी लगभग इतना रहा।
विज्ञापन


बकौल 1966 में रोहतक के एपीआरओ रहे सतवीर सिंह राणा, इसे लेकर सबसे पहले सूबे में एडवोकेट आनंद स्वरूप, एडवोकेट प्रताप सिंह दौलता आदि ने अलग हरियाणा की मांग की और आंदोलन शुरू किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

हुकुम सिंह कमेटी की सिफारिश पर बना हरियाणा

Haryana Day Special Story

1957 तक इसमें ताऊ देवीलाल, प्रोफेसर शेरसिंह, आर्य समाज के स्वामी ओमानंद जैसे नेता भी शामिल हो गए। हरियाणा में हिंदी भाषी क्षेत्र को अलग करने की मांग उठती रही तो पंजाब में पंजाबी सूबा अलग करने के लिए आंदोलन शुरू हो गया। आखिर हुकुम सिंह कमेटी बनी और उसने हिंदी भाषी क्षेत्र को अलग हरियाणा बनाने की सिफारिश की।

कई कमीशन भी बनाए गए। जस्टिस जेसी शाह की चैयरमैनशिप में शाह कमीशन बनाया गया, जिसने 31 मई, 1966 को केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी और एक नवंबर, 1966 को हरियाणा बना। लेकिन विशाल हरियाणा नहीं। केवल संयुक्त पंजाब के हिंदी भाषी क्षेत्र को ही इसमें शामिल किया गया।

दिल्ली को हरियाणा में शामिल करने की हुई थी मांग

Haryana Day Special Story

हरियाणा के लोगों की लाइफ स्टाइल में तेजी से बदलाव आया है। यहां चमचमाती गाड़ियां शहर से लेकर गांव तक घरों के बाहर खड़ी मिल जाएंगी तो शहरों की तरह सुविधायुक्त कोठियां गांवों की शान बढ़ा रही हैं।

बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। गुड़गांव व फरीदाबाद तक मेट्रो पहुंच चुकी है तो बहादुरगढ़ में इसका कार्य चल रहा है।

दिल्ली से सटे होने की वजह से यहां की संस्कृति भी कुछ बदलाव आ रहा है। गुड़गांव व फरीदाबाद जैसे शहरों में रहने वालों की रहन-सहन और खान-पान पूरी तरह बदल चुका है।

आज भी है हरियाणा को इनका इंतजार

Haryana Day Special Story

सूबे की अर्थ व्यवस्था कृषि पर निर्भर है। 80 फीसदी लोग कृषि करते हैं लेकिन पंजाब ने आज तक हमारे हिस्से का पानी नहीं दिया। एसएवाईएल नहर की खुदाई भी हो चुकी है। कुछ पानी दिया जो नरवाना ब्रांच में छोड़ा जाता है लेकिन वह राजनीतिक प्रभाव की वजह से हिसार, फतेहाबाद व सिरसा जिले को ही मिल रहा है।

पंजाब और हरियाणा का आज भी संयुक्त हाई कोर्ट है। इसे लेकर शुरू से ही विवाद चल रहा है। कई बार मांग भी उठती रहती है लेकिन अभी तक इस तरफ किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया है। पंजाब से अलग होने पर चंडीगढ़ हरियाणा केहिस्से में आया लेकिन पंजाब देने से मना कर दिया। अब तक प्रदेश की अलग राजधानी नहीं बन पाई है।

दोनों प्रदेश की संयुक्त राजधानी आज भी चंडीगढ़ है। 1966 में बिजली व्यवस्था की हालत बिगड़ी हुई थी। गांवों में चिमनी से काम चलता था। धीरे-धीरे व्यवस्था सुधरी लेकिन आज भी 24 घंटे बिजली की बाट किसान और आम आदमी जोह रहा है। हर सरकार 24 घंटे बिजली का वादा भी करती रहती है।

हरियाणावीं खान-पान और संस्कृति की अपनी अलग पहचान है। यहां दूध-दही का खानपान है। हरियाणा केलोगों को मजबूत माना जाता है। यहां पुरुषों केपहनावे में धोती, गोल बाहों का पुराने रिवाज का कुर्ता, कमीज, पगड़ी ज्यादा पहनते हैं तो महिलाएं घाघरा, अंगिया, समीज, सलवार-कुर्ता, कढ़ाई किया हुआ ओढ़ना पहनना पसंद करती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed