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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के समर्थन में नहीं किसान, पीएम को लिखा पत्र
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भारत-अमेरिका के संभावित व्यापार समझौते की अटकलों से किसान बेचैन हैं। किसान इस व्यापार समझौते के पक्ष में नहीं है। इसी को लेकर राष्ट्रीय किसान महासंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन्हें ऐसा कोई समझौता न करने की मांग की है।
राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि पीएम को लिखे पत्र में पीएम को इस समझौते के दुष्परिणामों से अवगत करवाया गया है। कोहाड़ के अनुसार पत्र में बताया गया है कि ऐसी खबरें आ रही है कि सरकार कई हजार करोड़ रुपये के कृषि, दूध, मुर्गी उत्पादों को अमेरिका से आयात करवाने का व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर करने वाली है।
अगर ऐसे किसी समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं व अमेरिका से उत्पाद भारत में कम आयात शुल्क पर आते हैं तो भारत के किसान पूर्ण तौर पर बर्बाद हो जाएंगे। भारत का किसान अमेरिका के किसान के साथ मुकाबला नहीं कर सकता है क्योंकि अमेरिका में किसानों को बहुत भारी सब्सिडी सरकार द्वारा दी जाती है, वहीं दूसरी तरफ भारत का किसान नकारात्मक सब्सिडी में अपना जीवनयापन कर रहा है, क्योेकि उसे अपनी फसलों का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।
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अमेरिका और भारत में भूमि जनसंख्या अनुपात भी बिल्कुल अलग है। अमेरिका कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत से कई गुना अधिक खर्च करता है। एक तरफ केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के किसान विरोधी व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर करने का प्रयास हो रहा है जिससे 2022 तक किसानों की आय नहीं, बल्कि आत्महत्याओं के मामले दोगुनी होने का खतरा है।
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राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि पीएम को लिखे पत्र में पीएम को इस समझौते के दुष्परिणामों से अवगत करवाया गया है। कोहाड़ के अनुसार पत्र में बताया गया है कि ऐसी खबरें आ रही है कि सरकार कई हजार करोड़ रुपये के कृषि, दूध, मुर्गी उत्पादों को अमेरिका से आयात करवाने का व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर करने वाली है।
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अगर ऐसे किसी समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं व अमेरिका से उत्पाद भारत में कम आयात शुल्क पर आते हैं तो भारत के किसान पूर्ण तौर पर बर्बाद हो जाएंगे। भारत का किसान अमेरिका के किसान के साथ मुकाबला नहीं कर सकता है क्योंकि अमेरिका में किसानों को बहुत भारी सब्सिडी सरकार द्वारा दी जाती है, वहीं दूसरी तरफ भारत का किसान नकारात्मक सब्सिडी में अपना जीवनयापन कर रहा है, क्योेकि उसे अपनी फसलों का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।
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अमेरिका और भारत में भूमि जनसंख्या अनुपात भी बिल्कुल अलग है। अमेरिका कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत से कई गुना अधिक खर्च करता है। एक तरफ केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के किसान विरोधी व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर करने का प्रयास हो रहा है जिससे 2022 तक किसानों की आय नहीं, बल्कि आत्महत्याओं के मामले दोगुनी होने का खतरा है।