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डोर टू डोर कचरा उठान पर आरएफआईडी टैग से रखी जाएगी नजर
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पंचकूला। शहर में कुछ महीनों से सफाई व्यवस्था को लेकर चल रहे विवाद को निपटाने के लिए अब नगर निगम अधिकारी एक खास योजना लेकर आए हैं। इसमें डोर-टू-डोर कचरा उठाने और सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के लिए नगर निगम अब आरएफआईडी (रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन) तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है।
इस प्रक्रिया में शहर के मकानों पर आरएफआईडी टैग लगाया जा रहा है। इसके जरिये कचरा एकत्र करने वाले वाहनों पर आसानी से निगरानी रखी जा सकेगी। अब लोग भी यह आरोप नहीं लगा सकेंगे कि उनके सेक्टर में घरों से कचरा उठाने वाला वाहन नहीं पहुंच रहा है। लगभग तीन महीने पहले नगर निगम ने शहर से कचरा उठाने का काम निजी कलेक्टरों से छीनकर एक कंपनी को दे दिया था। शहरवासियों के लिए यह राहत की खबर थी। क्योंकि अब शहरवासियों को कचरा उठान के लिए मासिक भुगतान करने की जरूरत नहीं है। इस कंपनी को इसके लिए नगर निगम भुगतान करेगा। लेकिन शुरुआत में ही कंपनी की हालत खराब हो गई थी और वह शहर की सफाई व्यवस्था को संभाल नहीं पाई थी। पूरे शहर में गंदगी का आलम हो गया था। जगह-जगह पड़े गंदगी के ढेरों से चारों ओर बदबू फैल रही थी। इस स्थिति को संभालने में कंपनी को लगभग एक महीने का समय लग गया। मगर अब भी लोगों की शिकायत रहती है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ी उनके सेक्टर में नहीं पहुंचती है। कई बार आती है तो चक्कर लगाकर तुरंत वापस चली जाती है। आरोप यह भी लगे हैं कि वह पूरे सेक्टर में न जाकर कुछ ही हिस्से में जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए नगर निगम ने आरएफआईडी तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। संवाद
मकानों के आगे लगाए जा रहे टैग
नगर निगम की ओर से शहर में मकानों के आगे आरएफआईडी टैग लगाए जा रहे हैं। ये टैग सभी मकानों पर लगाने के बजाय हर 10वें मकान पर लगाए जा रहे हैं। कचरा उठाने वाली गाड़ी पर इससे संबंधित एक स्कैनर लगाया जाएगा। गाड़ी जिस भी मकान के सामने से गुजरेगी तो उसकी लाइव लोकेशन उसमें फीड हो जाएगी। जिस मकान के सामने गाड़ी रुकेगी तो उसका पता कंपनी के अधिकारियों को रहेगा। अगर किसी सेक्टर से शिकायत आती है तो तुरंत डाटा जांच करके उस शिकायत की हकीकत का पता किया जा सकेगा।
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एक हजार से ज्यादा मकानों पर लग चुके टैग
शहर में अब तक एक हजार से ज्यादा मकानों पर यह टैग लगाए जा चुके हैं। वहीं नगर निगम अधिकारियों की मानें तो लगभग 4 हजार टैग नगर निगम के क्षेत्र में आने वाले सेक्टरों और अन्य जगहों पर लगाए जाने हैं। जल्द ही इस टारगेट को पूरा कर लिया जाएगा। यह टैग लगाने का काम भी कंपनी के ही कर्मचारियों की ओर से किया जा रहा है। लगातार इसकी मॉनिटरिंग भी कंपनी के अधिकारी ही करेंगे।
लोगों को जागरूक करना चाहिए
नगर निगम ने डोर-टू-डोर कचरा उठाने के लिए जो नई योजना लागू की है, वह बेहतर है, मगर शहरवासियों को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। मकानों के बाहर प्लेट लगी देख लोग सकते में आ गए थे। निगम को इसका प्रचार करना चाहिए ताकि लोग भी जागरूक हो सकें और यह योजना अच्छी तरह सिरे चढ़ सके। -सुभाष पपनेजा, महासचिव, सेक्टर-16 आरडब्ल्यूए
सोसायटी में बड़ा डस्टबिन रखना चाहिए
मेरे सेक्टर में विभिन्न सोसायटी बसी हैं। वहां यह योजना काम नहीं करेगी। सोसायटियों के लिए भी निगम को कोई विशेष योजना बनानी चाहिए। हर सोसायटी के नीचे एक बड़ा डस्टबिन रखवाया जा सकता है, जिसमें लोग कूड़ा डाल दें। उस कूड़े को नगर निगम की गाड़ी रोजाना उठाकर ले जाए सकती है। -विजय गुप्ता, अध्यक्ष, एमडीसी सेक्टर-5 आरडब्ल्यूए
अधिकारियों को नजर रखनी होगी
योजना तो बेहतर है, लेकिन अधिकारियों को इस पर ईमानदारी से नजर रखनी होगी। अगर अधिकारी ही नजर नहीं रखेंगे तो यह योजना भी फेल हो जाएगी। निगम योजनाएं तो कई बनाता है, मगर उनका क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पाता है। यहीं कारण रहता है कि लोगों को उनका लाभ नहीं मिल पाता है। -योगेंद्र क्वात्रा, उपाध्यक्ष, सेक्टर-2 आरडब्ल्यूए
वर्जन::
शहर के लोगों से अपील है कि वे अपना कूड़ा नगर निगम की गाड़ी में ही डालें। जब भी गाड़ी सेक्टर में जाती है तो अनाउंसमेंट भी की जाती है। लोगों को घर से कूड़े का उठान कराने के लिए मासिक भुगतान की जरूरत नहीं है। अगर कूड़ा नगर निगम की ही गाड़ी में डलेगा तो उसका सही निस्तारण भी सुनिश्चित हो सकेगा। -अविनाश सिंगला, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर निगम
वर्जन::
डोर-टू-डोर कचरा उठाने के काम को पारदर्शी बनाने के लिए नगर निगम आरएफआईडी तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इससे लोगों की शिकायतों का निवारण करने में सुविधा होगी। वहीं लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर भी निगरानी रखी जा सकेगी। यह फायदेमंद योजना है। -धर्मवीर सिंह, कमिश्नर, नगर निगम
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इस प्रक्रिया में शहर के मकानों पर आरएफआईडी टैग लगाया जा रहा है। इसके जरिये कचरा एकत्र करने वाले वाहनों पर आसानी से निगरानी रखी जा सकेगी। अब लोग भी यह आरोप नहीं लगा सकेंगे कि उनके सेक्टर में घरों से कचरा उठाने वाला वाहन नहीं पहुंच रहा है। लगभग तीन महीने पहले नगर निगम ने शहर से कचरा उठाने का काम निजी कलेक्टरों से छीनकर एक कंपनी को दे दिया था। शहरवासियों के लिए यह राहत की खबर थी। क्योंकि अब शहरवासियों को कचरा उठान के लिए मासिक भुगतान करने की जरूरत नहीं है। इस कंपनी को इसके लिए नगर निगम भुगतान करेगा। लेकिन शुरुआत में ही कंपनी की हालत खराब हो गई थी और वह शहर की सफाई व्यवस्था को संभाल नहीं पाई थी। पूरे शहर में गंदगी का आलम हो गया था। जगह-जगह पड़े गंदगी के ढेरों से चारों ओर बदबू फैल रही थी। इस स्थिति को संभालने में कंपनी को लगभग एक महीने का समय लग गया। मगर अब भी लोगों की शिकायत रहती है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ी उनके सेक्टर में नहीं पहुंचती है। कई बार आती है तो चक्कर लगाकर तुरंत वापस चली जाती है। आरोप यह भी लगे हैं कि वह पूरे सेक्टर में न जाकर कुछ ही हिस्से में जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए नगर निगम ने आरएफआईडी तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। संवाद
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मकानों के आगे लगाए जा रहे टैग
नगर निगम की ओर से शहर में मकानों के आगे आरएफआईडी टैग लगाए जा रहे हैं। ये टैग सभी मकानों पर लगाने के बजाय हर 10वें मकान पर लगाए जा रहे हैं। कचरा उठाने वाली गाड़ी पर इससे संबंधित एक स्कैनर लगाया जाएगा। गाड़ी जिस भी मकान के सामने से गुजरेगी तो उसकी लाइव लोकेशन उसमें फीड हो जाएगी। जिस मकान के सामने गाड़ी रुकेगी तो उसका पता कंपनी के अधिकारियों को रहेगा। अगर किसी सेक्टर से शिकायत आती है तो तुरंत डाटा जांच करके उस शिकायत की हकीकत का पता किया जा सकेगा।
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एक हजार से ज्यादा मकानों पर लग चुके टैग
शहर में अब तक एक हजार से ज्यादा मकानों पर यह टैग लगाए जा चुके हैं। वहीं नगर निगम अधिकारियों की मानें तो लगभग 4 हजार टैग नगर निगम के क्षेत्र में आने वाले सेक्टरों और अन्य जगहों पर लगाए जाने हैं। जल्द ही इस टारगेट को पूरा कर लिया जाएगा। यह टैग लगाने का काम भी कंपनी के ही कर्मचारियों की ओर से किया जा रहा है। लगातार इसकी मॉनिटरिंग भी कंपनी के अधिकारी ही करेंगे।
लोगों को जागरूक करना चाहिए
नगर निगम ने डोर-टू-डोर कचरा उठाने के लिए जो नई योजना लागू की है, वह बेहतर है, मगर शहरवासियों को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। मकानों के बाहर प्लेट लगी देख लोग सकते में आ गए थे। निगम को इसका प्रचार करना चाहिए ताकि लोग भी जागरूक हो सकें और यह योजना अच्छी तरह सिरे चढ़ सके। -सुभाष पपनेजा, महासचिव, सेक्टर-16 आरडब्ल्यूए
सोसायटी में बड़ा डस्टबिन रखना चाहिए
मेरे सेक्टर में विभिन्न सोसायटी बसी हैं। वहां यह योजना काम नहीं करेगी। सोसायटियों के लिए भी निगम को कोई विशेष योजना बनानी चाहिए। हर सोसायटी के नीचे एक बड़ा डस्टबिन रखवाया जा सकता है, जिसमें लोग कूड़ा डाल दें। उस कूड़े को नगर निगम की गाड़ी रोजाना उठाकर ले जाए सकती है। -विजय गुप्ता, अध्यक्ष, एमडीसी सेक्टर-5 आरडब्ल्यूए
अधिकारियों को नजर रखनी होगी
योजना तो बेहतर है, लेकिन अधिकारियों को इस पर ईमानदारी से नजर रखनी होगी। अगर अधिकारी ही नजर नहीं रखेंगे तो यह योजना भी फेल हो जाएगी। निगम योजनाएं तो कई बनाता है, मगर उनका क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पाता है। यहीं कारण रहता है कि लोगों को उनका लाभ नहीं मिल पाता है। -योगेंद्र क्वात्रा, उपाध्यक्ष, सेक्टर-2 आरडब्ल्यूए
वर्जन::
शहर के लोगों से अपील है कि वे अपना कूड़ा नगर निगम की गाड़ी में ही डालें। जब भी गाड़ी सेक्टर में जाती है तो अनाउंसमेंट भी की जाती है। लोगों को घर से कूड़े का उठान कराने के लिए मासिक भुगतान की जरूरत नहीं है। अगर कूड़ा नगर निगम की ही गाड़ी में डलेगा तो उसका सही निस्तारण भी सुनिश्चित हो सकेगा। -अविनाश सिंगला, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर निगम
वर्जन::
डोर-टू-डोर कचरा उठाने के काम को पारदर्शी बनाने के लिए नगर निगम आरएफआईडी तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इससे लोगों की शिकायतों का निवारण करने में सुविधा होगी। वहीं लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर भी निगरानी रखी जा सकेगी। यह फायदेमंद योजना है। -धर्मवीर सिंह, कमिश्नर, नगर निगम