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शराब की तस्करी रोकने के लिए क्यूआर टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा प्रशासन
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चंडीगढ़। शराब तस्करी रोकने केलिए यूटी प्रशासन का आबकारी विभाग कई तरह के एहतियाती कदम उठा रहा है। आबकारी विभाग क्यूआर कोड की नई तकनीक पर कार्य कर रहा है। इससे शराब तस्करी पर लगाम लगाई जा सकेगी। जो कर्मचारी लापरवाही बरत रहे हैं, विभाग की तरफ से उन पर कार्रवाई भी की जा रही है।
आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त सौरभ अरोड़ा ने बताया कि तस्करी रोकने केलिए विभाग शहर के 12 बॉटलिंग प्लांट पर नजर रख रहा है। उनकी तरफ से रोजाना रिपोर्ट ली जा रही है। इसके अलावा जिन भी गाड़ियों का इस्तेमाल शराब लाने और ले जाने में हो रहा है, उनमें जीपीएस इंस्टॉल किए जा रहे है। प्लांट में होने वाली हलचल को सीधे सेक्टर-17 स्थित उनकेदफ्तर से रोजाना मॉनिटर किया जाता है।
सौरभ अरोड़ा ने बताया कि वह खुद भी सीसीटीवी कैमरे देखते रहते हैं और बीते दिनों उन्होंने कुछ ट्रकों के जीपीएस को भी ट्रैक किया। उन्होंने बताया कि प्लांट से निकलने वाली सभी गाड़ियों की विभाग केइंस्पेक्टर जांच करते हैं और फिर उन्हें परमिट देकर जाने दिया जाता है। विभाग परमिट पर क्यूआर कोड लगाने पर काम कर रहा है, ताकि अगर किसी ट्रक को किसी अन्य राज्य में रोका जाता है तो वह क्यूआर कोड को स्कैन कर पूरी जानकारी हासिल कर सके। इससे डुप्लीकेट परमिट का इस्तेमाल कर शराब की तस्करी करने के मामले रुक जाएंगे। अरोड़ा ने कहा कि बॉटलिंग प्लांट से होने वाली तस्करी पर भी विभाग की नजर है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी काम को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। बताया कि ऐसे ही मामले में एक इंस्पेक्टर को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है।
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प्रशासन ने पड़ोसी राज्यों केसाथ मिलकर कार्य करने केदिए हैं निर्देश
शराब तस्करी रोकने के लिए प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने वीरवार को पंजाब, हरियाणा और यूटी प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तस्करी को रोकने के लिए तीनों राज्यों को साथ मिलकर काम करना होगा। सलाहकार धर्मपाल ने कहा कि शराब तस्करी से संबंधित जानकारी साझा करने से ही इस पर रोक लगाई जा सकती है। बैठक में तस्करी के अलावा पंजाब, हरियाणा और यूटी के एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर पर भी चर्चा की गई।
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आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त सौरभ अरोड़ा ने बताया कि तस्करी रोकने केलिए विभाग शहर के 12 बॉटलिंग प्लांट पर नजर रख रहा है। उनकी तरफ से रोजाना रिपोर्ट ली जा रही है। इसके अलावा जिन भी गाड़ियों का इस्तेमाल शराब लाने और ले जाने में हो रहा है, उनमें जीपीएस इंस्टॉल किए जा रहे है। प्लांट में होने वाली हलचल को सीधे सेक्टर-17 स्थित उनकेदफ्तर से रोजाना मॉनिटर किया जाता है।
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सौरभ अरोड़ा ने बताया कि वह खुद भी सीसीटीवी कैमरे देखते रहते हैं और बीते दिनों उन्होंने कुछ ट्रकों के जीपीएस को भी ट्रैक किया। उन्होंने बताया कि प्लांट से निकलने वाली सभी गाड़ियों की विभाग केइंस्पेक्टर जांच करते हैं और फिर उन्हें परमिट देकर जाने दिया जाता है। विभाग परमिट पर क्यूआर कोड लगाने पर काम कर रहा है, ताकि अगर किसी ट्रक को किसी अन्य राज्य में रोका जाता है तो वह क्यूआर कोड को स्कैन कर पूरी जानकारी हासिल कर सके। इससे डुप्लीकेट परमिट का इस्तेमाल कर शराब की तस्करी करने के मामले रुक जाएंगे। अरोड़ा ने कहा कि बॉटलिंग प्लांट से होने वाली तस्करी पर भी विभाग की नजर है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी काम को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। बताया कि ऐसे ही मामले में एक इंस्पेक्टर को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है।
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प्रशासन ने पड़ोसी राज्यों केसाथ मिलकर कार्य करने केदिए हैं निर्देश
शराब तस्करी रोकने के लिए प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने वीरवार को पंजाब, हरियाणा और यूटी प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तस्करी को रोकने के लिए तीनों राज्यों को साथ मिलकर काम करना होगा। सलाहकार धर्मपाल ने कहा कि शराब तस्करी से संबंधित जानकारी साझा करने से ही इस पर रोक लगाई जा सकती है। बैठक में तस्करी के अलावा पंजाब, हरियाणा और यूटी के एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर पर भी चर्चा की गई।