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Panchkula News: खेतों में धान की बंपर पैदावार, पोर्टल पर अधिकतम सीमा डाल रही बिक्री में अड़ंगा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरवाला। खेतों में धान की बंपर पैदावार होने के बावजूद किसान अपनी पूरी फसल बेचने के लिए परेशान हैं। सरकार की ओर से धान खरीद के लिए प्रति एकड़ 26 क्विंटल 86 किलो का पंजीकरण किया गया है, जबकि किसानों के अनुसार उनके खेतों में प्रति एकड़ 35 से 40 क्विंटल तक पैदावार हो रही है। ऐसे में निर्धारित सीमा से अधिक बची धान की फसल बेचने के लिए किसानों को दफ्तरों और आढ़तियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि मेहनत से उगाई गई फसल बेचने के लिए भी उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान नरेंद्र सिंह नयागांव और किसान गुरजीत सिंह, श्रीपाल, नरेंद्र काका, रामकुमार व करनैल सिंह ने कहा कि सरकार किसानों का दाना-दाना खरीदने के दावे करती है, लेकिन खरीद पोर्टल पर कम सीमा के कारण किसान अपनी पूरी उपज बेचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेत में प्रति एकड़ 35 से 40 क्विंटल धान पैदा हो रही है, तो 26 क्विंटल 86 किलो से अधिक उपज की बिक्री कैसे होगी।
किसानों ने बताया कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर प्रति एकड़ आवक बढ़ाने के लिए आवेदन ले लिए हैं, लेकिन 10 दिन बीतने के बाद भी पोर्टल की सीमा नहीं बढ़ाई गई। इससे मंडियों में किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। किसानों को आशंका है कि समय पर खरीद नहीं होने से उनकी उपज बेचने में और देरी हो सकती है।
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किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से पोर्टल की सीमा तत्काल बढ़ाकर बची हुई धान की खरीद सुनिश्चित करने की मांग की है। भाकियू जिला प्रधान नरेंद्र सिंह नयागांव ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान मार्केट कमेटी कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या का समय रहते समाधान करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
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बरवाला। खेतों में धान की बंपर पैदावार होने के बावजूद किसान अपनी पूरी फसल बेचने के लिए परेशान हैं। सरकार की ओर से धान खरीद के लिए प्रति एकड़ 26 क्विंटल 86 किलो का पंजीकरण किया गया है, जबकि किसानों के अनुसार उनके खेतों में प्रति एकड़ 35 से 40 क्विंटल तक पैदावार हो रही है। ऐसे में निर्धारित सीमा से अधिक बची धान की फसल बेचने के लिए किसानों को दफ्तरों और आढ़तियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि मेहनत से उगाई गई फसल बेचने के लिए भी उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान नरेंद्र सिंह नयागांव और किसान गुरजीत सिंह, श्रीपाल, नरेंद्र काका, रामकुमार व करनैल सिंह ने कहा कि सरकार किसानों का दाना-दाना खरीदने के दावे करती है, लेकिन खरीद पोर्टल पर कम सीमा के कारण किसान अपनी पूरी उपज बेचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेत में प्रति एकड़ 35 से 40 क्विंटल धान पैदा हो रही है, तो 26 क्विंटल 86 किलो से अधिक उपज की बिक्री कैसे होगी।
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किसानों ने बताया कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर प्रति एकड़ आवक बढ़ाने के लिए आवेदन ले लिए हैं, लेकिन 10 दिन बीतने के बाद भी पोर्टल की सीमा नहीं बढ़ाई गई। इससे मंडियों में किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। किसानों को आशंका है कि समय पर खरीद नहीं होने से उनकी उपज बेचने में और देरी हो सकती है।
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किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से पोर्टल की सीमा तत्काल बढ़ाकर बची हुई धान की खरीद सुनिश्चित करने की मांग की है। भाकियू जिला प्रधान नरेंद्र सिंह नयागांव ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान मार्केट कमेटी कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या का समय रहते समाधान करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।