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बैंस ने भगोड़ा घोषित करने के आदेश को दी हाईकोर्ट में चुनौती
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चंडीगढ़। पूर्व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना की ट्रायल कोर्ट की ओर से भगोड़ा घोषित करने के 12 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी है। याचिका में आदेश को रद्द करने के साथ ही मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। हाईकोर्ट ने अब इस याचिका पर सुनवाई 23 मई को तय की है।
याचिका दाखिल करते हुए बैंस ने हाईकोर्ट कोे बताया कि उन पर दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज है। यह एफआईआर राजनीतिक रंजिश का नतीजा है। इस मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। इसी बीच उन्हें पता चला कि लुधियाना की ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में उन्हें 12 अप्रैल को भगोड़ा घोषित कर दिया। याची ने कहा कि उसे जब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है तो कैसे उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा सकता है। साथ ही यह भी कहा कि भगोड़ा घोषित तब किया जाता है जब न्यायालय को लगता है कि व्यक्ति कानूनी प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर रहा है। इस मामले में वह अपने न्यायिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसके साथ ही भगोड़ा घोषित करने के लिए जो तय प्रक्रिया है उसका पालन नहीं किया गया। उनके घर के बाहर नोटिस चस्पां नहीं किया गया जो भगोड़ा घोषित करने के लिए जरूरी है। वे विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं तो कैसे उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा सकता है। यह याचिका हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल कर दी गई है।
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याचिका दाखिल करते हुए बैंस ने हाईकोर्ट कोे बताया कि उन पर दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज है। यह एफआईआर राजनीतिक रंजिश का नतीजा है। इस मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। इसी बीच उन्हें पता चला कि लुधियाना की ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में उन्हें 12 अप्रैल को भगोड़ा घोषित कर दिया। याची ने कहा कि उसे जब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है तो कैसे उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा सकता है। साथ ही यह भी कहा कि भगोड़ा घोषित तब किया जाता है जब न्यायालय को लगता है कि व्यक्ति कानूनी प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर रहा है। इस मामले में वह अपने न्यायिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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इसके साथ ही भगोड़ा घोषित करने के लिए जो तय प्रक्रिया है उसका पालन नहीं किया गया। उनके घर के बाहर नोटिस चस्पां नहीं किया गया जो भगोड़ा घोषित करने के लिए जरूरी है। वे विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं तो कैसे उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा सकता है। यह याचिका हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल कर दी गई है।
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