पंचकूला। सेक्टर-1 लघु सचिवालय के सभागार में सोमवार को एनीमिया मुक्त अभियान को लेकर बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता डीसी सुशील सारवान ने की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि 11 से 17 मार्च तक चलने वाले अभियान के तहत खून की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि दाखिले के समय बच्चे की खून की मात्रा का फार्म जरूर भरा जाए। सभी विभागों के अधिकारी संयुक्त रूप से इस अभियान को चलाएं और अभियान के दौरान संयुक्त रूप से स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा अवश्य करें। उपायुक्त ने कहा कि बच्चों के हेल्थ कार्ड में एचबी का एक अलग कॉलम का प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि कमी पाए जाने पर बच्चों को जरूरी इलाज मुहैया करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि एनीमिया मुक्त हरियाणा का उद्देश्य एनीमिया के चक्र को तोड़ना है। इसके लिए शुरूआत में छह अलग-अलग आयु वर्ग को लक्षित किया गया है। इनमें छोटे बच्चों छह से 59 माह तक, स्कूल जाने वाले 5 से 9 वर्ष, किशोरों में 10 से 19 वर्ष, महिलाओं में 20 से 24 वर्ष और गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। सिविल सर्जन डाॅ. मुक्ता कुमार ने बताया कि एनीमिया का मतलब है कि शरीर में खून की कमी होना। हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन एक ऐसा तत्व है जो शरीर में खून की मात्रा बताता है। मनुष्य एनीमिया का शिकार तब होता है जब शरीर के रक्त में लाल कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर, उनके निर्माण की दर से अधिक हो जाती है। आमतौर पर लोग खून की कमी को हल्के में लेते हैं, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है। इस अवसर पर उप सिविल सर्जन डाॅ. शिवानी, खंड शिक्षा अधिकारी रायपुररानी सुमन चौधरी, पिंजौर से सीमा रानी, बरवाला से जोगिंद्र सिंह और मोरनी से अनूप सिंह, डब्ल्यूसीडीपीओ रायपुररानी शशि, सीनियर मेडिकल अधिकारी डाॅ. राजेश समेत अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।